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केन्द्रीय जांच ब्यूरो न्यायाधीश की मौत के मामले की जांच तत्काल प्रारंभ करे-उच्च न्यायालय

By भाषा | Updated: August 3, 2021 22:49 IST

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रांची, तीन अगस्त झारखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया कि वह राज्य सरकार की अनुशंसा के अनुरूप धनबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की मौत के मामले की जांच सीबीआई से कराये जाने की अधिसूचना जारी होते ही तत्काल मामले की जांच प्रारंभ करे।

मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने धनबाद के न्यायाधीश उत्तम आनंद की 28 जुलाई को सुबह की सैर के दौरान आटो की टक्कर से हुई मौत के मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश सीबीआई को दिया।

न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई ने बताया कि राज्य सरकार की मामले की सीबीआई जांच का सिफारिश का पत्र उसे कल ही मिला है और चार अगस्त को मामले की सीबीआई जांच की अधिसूचना जारी हो सकती है।

इस पर पीठ ने कहा कि मामले की त्वरित जांच करने के लिए अधिसूचना जारी होने के बाद सीबीआई को इस मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करना चाहिए। साथ ही पीठ ने सरकार को केस के सभी दस्तावेज और अन्य हर प्रकार के सहयोग (लॉजिस्टिक सपोर्ट) सीबीआई को करने का निर्देश दिया।

इससे पहले आज राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से जांच की प्रगति रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष पेश की गयी। जांच की प्रगति रिपोर्ट पर न्यायालय ने असंतोष व्यक्त किया। पीठ ने कहा,‘‘ घटना सुबह लगभग पांच बजे हुई तो प्राथमिकी दर्ज करने में इतना विलंब क्यों किया गया? आखिर क्यों मामले की प्राथमिकी पौने एक बजे दर्ज की गयी? जबकि सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट है कि जज को उठाकर इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है।’’

पीठ ने पुलिस से तीखे सवाल किये। उसने पूछा, ‘‘...आखिर पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने में छह घंटे क्यों लग गए?’’

सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता राजीव रंजन से पूछा,‘‘ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की है। क्या यह सही है? ’’ इस पर महाधिवक्ता ने पीठ को बताया ,‘‘ इस मामले के तार दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। ऐसे में अंतरराज्यीय मामलों से जुड़े अपराध की जांच के लिए सीबीआई उचित जांच एजेंसी है। इसलिए सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की है।’’

मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने पुलिस महानिदेशक को राज्य की अदालतों की सुरक्षा पुख्ता करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा, ‘‘इस घटना के बाद न्यायिक अधिकारियों में भी भय है। इसलिए पुलिस महानिदेशक न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा पुख्ता और सख्त करें।’’

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालतों में भी सुरक्षा के सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। उच्च न्यायालय समेत सभी न्यायालयों में कुशल प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों की तैनाती की जानी चाहिए।

धनबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की 29 जुलाई को उस समय मौत हो गयी थी जब वह सुबह की सैर पर थे। उनकी मौत जिन परिस्थितियों में हुई उसके बाद इसकी जांच की मांग उठने लगी। धनबाद के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इस संबंध में उच्च न्यायालय को पत्र लिखा था। इस पत्र को उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका में तब्दील कर दिया और इसकी सुनवाई प्रारंभ की।

मामले की पिछली सुनवाई के दौरान बृहस्पतिवार को सरकार ने बताया था कि मामले की जांच के लिए एसआईटी बना दी गयी है। इस पर न्यायालय ने एसआईटी को जांच की प्रगति रिपोर्ट उसके समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था।

इस मामले का सर्वोच्च न्यायालय ने भी शुक्रवार को स्वतः संज्ञान लिया और राज्य सरकार के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में न्यायाधीश की मौत की जांच की प्रगति रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष रखने के निर्देश दिये थे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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