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"सीएए लागू करके मोदी सरकार पूरे देश में दंगे भड़काना चाहती है", उद्धव ठाकरे ने नागरिकता संशोधन कानून को 'चुनावी जुमला' बताते हुए कहा

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: March 13, 2024 07:52 IST

उद्धव ठाकरे ने सीएए लागू करने के लिए मोदी सरकार की बेहद कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि यह केंद्र सरकार और भाजपा की ओर से लोकसभा चुनाव से पहले वोटरों के लिए फेंका गया 'चुनावी जुमला' है।

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ठळक मुद्देउद्धव ठाकरे ने सीएए लागू करने के लिए मोदी सरकार की बेहद कड़ी आलोचना की ठाकरे ने कहा कि सीएए लोकसभा चुनाव से भाजपा की ओर से फेंका गया 'चुनावी जुमला' हैमोदी सरकार और भाजपा धर्मों के बीच नफरत पैदा करना और पूरे देश में दंगे भड़काना चाहती है

यवतमाल: शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), 2019 को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की बेहद कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि यह केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार और भाजपा की ओर से लोकसभा चुनाव से पहले वोटरों के लिए फेंका गया 'चुनावी जुमला' है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार उद्धव ठाकरे ने बीते मंगलवार शाम को महाराष्ट्र के यवतमाल के पुसाद में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि सीएए के जरिये मोदी सरकार और भाजपा धर्मों के बीच नफरत पैदा करना और पूरे देश में दंगे भड़काना चाहती है।

आम चुनाव से पहले दो दिवसीय विदर्भ दौरे पर पहुंचे ठाकरे ने कहा, "सीएए कुछ नहीं बल्कि बीजेपी का 'चुनावी जुमला' है। दिसंबर में बीजेपी सीएए और एनआरसी का भूत लेकर आई थी। उस वक्त लोगों, खासकर असम के लोगों के मन में डर पैदा हो गया था। इस कानून के खिलाफ कई याचिकाएं कोर्ट में हैं। कोर्ट का फैसला अभी नहीं आया है, लेकिन फिर भी उन्होंने सीएए अधिसूचना जारी कर दी है। यह सिर्फ एक चुनावी जुमला है।''

उद्धव ने आगे कहा, "सीएए लागू करने के पीछे केंद्र सरकार और भाजपा का केवल एक ही मकसद है कि वो विभिन्न धर्मों के बीच भेदभाव पैदा करना है और चुनाव से पहले देश में दंगे कराना चाहते हैं। अगर बीजेपी सरकार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देशों से प्रताड़ित हिंदुओं को भारत लाना चाहती है तो उसे सबसे पहले कश्मीर में पंडितों को वापसी करानी चाहिए।"

मालूम हो कि लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से कुछ दिन पहले बीते सोमवार शाम को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के कार्यान्वयन के लिए नियमों को अधिसूचित किया।

इस अधिनियम का उद्देश्य सताए गए उन बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई जैसे गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है, 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आए हैं। 

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