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दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी में विशेष आमंत्रित के तौर पर टाइटलर की नियुक्ति पर भाजपा ने साधा निशाना

By भाषा | Updated: October 29, 2021 17:51 IST

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नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सिख विरोधी दंगों के आरोपी जगदीश टाइटलर को अपनी दिल्ली प्रदेश की समिति में विशेष आमंत्रित के तौर पर शामिल करके सिखों के जख्मों को हरा कर दिया है।

हालांकि कांग्रेस ने कहा कि टाइटलर को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति (डीपीसीसी) में दिल्ली से पूर्व सांसद होने के नाते नियुक्त किया गया है और भाजपा भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही है।

अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले वहां कांग्रेस की सरकार को घेरते हुए भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी से यह साफ करने को कहा कि क्या वह इस नियुक्ति से सहमत हैं जिसने पूरे देश को ‘नाराज’ किया है।

भाटिया ने कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगे भारतीय लोकतंत्र पर ‘सबसे बड़ा काला धब्बा’ हैं। दंगों को कांग्रेस प्रायोजित बताते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी ने कभी सिखों को न्याय नहीं दिया और भाजपा उन्हें इंसाफ दिलाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी, दिल्ली प्रदेश की प्रमुख समिति में टाइटलर को लाकर कांग्रेस ने सिख समुदाय के जख्मों को हरा कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘क्या यह टाइटलर के लिए सम्मान है? क्या सोनिया गांधी की ओर से उन्हें संरक्षण प्रदान करना उचित है?’’

भाटिया ने कहा कि इस तरह की नियुक्तियों को कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा मंजूरी दी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘जब भाजपा पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की तथा दोषियों को कठघरे में लाने की कोशिश कर रही है, वहीं आरोपियों को कांग्रेस का संदेश है कि चिंता मत करो, गांधी परिवार आपके साथ है।’’

इस बीच कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि टाइटलर दिल्ली के पूर्व सांसद हैं, इसलिए उन्हें समिति में नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही है’’। उन्होंने पूछा कि ‘‘अगर उच्चतम न्यायालय गुजरात दंगों को देखने की बात कर रहा है तो क्या प्रधानमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।’’

खेड़ा का संकेत इस ओर था कि उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा था कि वह 2002 के दंगों के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी समेत 64 लोगों को क्लीन चिट देने वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) की क्लोजर रिपोर्ट और इसे स्वीकार करते समय मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा दिए गए औचित्य को देखना चाहेगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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