बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार और साथ छोड़ रहे यार?, जनसुराज संस्थापक पीके की पार्टी में पसरा सन्नाटा?

By एस पी सिन्हा | Updated: January 13, 2026 14:35 IST2026-01-13T14:34:25+5:302026-01-13T14:35:11+5:30

करीब-करीब तीन वर्ष तक बिहार के गांव-गली की खाक छानने के बाद प्रशांत किशोर ने वर्ष 2024 में दो अक्टूबर को जन सुराज पार्टी के गठन की सार्वजनिक घोषणा की थी।

bihar patna prashant kishor crushing defeat Assembly elections friends deserting you silence Jansuraj founder PK's party | बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार और साथ छोड़ रहे यार?, जनसुराज संस्थापक पीके की पार्टी में पसरा सन्नाटा?

file photo

Highlightsविधानसभा की चार सीटों पर हुए उपचुनाव में जनसुराज पार्टी को लगभग 10 प्रतिशत वोट मिले थे। वोट को जनाधार मानकर प्रशांत किशोर अति-उत्साहित हो गए।परिणाम ने पीके के उत्साह पर पानी फेर दिया।

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुप्पी साध ली है। विधानसभा चुनाव बाद से ही सांगठनिक गतिविधियां लगभग ठप-सी हैं और पटना में उसके चारों परिसरों (दो कार्यालय, एक प्रशांत किशोर का विश्राम-स्थल और एक कंट्रोल रूम) में सन्नाटा पसरा हुआ है। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर के भी अभी बिहार से बाहर होने का बात बताई जा रही है। जानकारों की मानें तो प्रशांत किशोर अगली रणनीति के लिए अभी वे धन के प्रबंध में लगे हैं। संभव है कि मकर संक्रांति के बाद वे फिर से सक्रिय हों। यह सक्रियता उनके बिहार के एक और परिभ्रमण के रूप में हो सकती है। बता दें कि करीब-करीब तीन वर्ष तक बिहार के गांव-गली की खाक छानने के बाद प्रशांत किशोर ने वर्ष 2024 में दो अक्टूबर को जन सुराज पार्टी के गठन की सार्वजनिक घोषणा की थी।

उसी वर्ष विधानसभा की चार सीटों पर हुए उपचुनाव में जनसुराज पार्टी को लगभग 10 प्रतिशत वोट मिले थे। उस वोट को जनाधार मानकर प्रशांत किशोर अति-उत्साहित हो गए। विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही जनसुराज पार्टी को लेकर एनडीए निश्चिंत हो गया था। परिणाम ने पीके के उत्साह पर पानी फेर दिया। 238 प्रत्याशियों के बूते मात्र तीन प्रतिशत वोट मिले।

विधानसभा चुनाव के दौरान ही उनके कई प्रत्याशी पाला बदल लिए थे। भले ही प्रशांत किशोर ने लगभग हर सीट पर प्रचार किया। इसके बाद भी वे एक भी सीट नहीं जीत पाए हैं। ज्यादातर प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई है। पराजय के पश्चाताप में पीके ने उसी भितिहरवा आश्रम में बापू की प्रतिमा के नीचे एक दिन का मौन व्रत रखा, जहां से वे जन सुराज यात्रा की शुरुआत किए थे।

हालांकि अबतक की उपलब्धि संकेत कर रही कि नई रणनीति के बिना जनसुराज पार्टी के लिए गुंजाइश नहीं। जानकारों के अनुसार प्रशांत किशोर से एक उम्मीद यह भी थी कि वो कम से कम वोटकटवा बनकर तो सामने आएंगे ही। पर ऐसा नहीं हो सका। जनसुराज की सभाओं में प्रशांत किशोर को सुनने के लिए उमड़ने वाली भीड़ इस बात की तस्दीक करते रहे थे कि वो एनडीए और महागठबंधन दोनों को ही नुकसान पहुंचा सकते हैं। पर परिणामों को देखकर तो ऐसा लग रहा है कि प्रशांत किशोर ने कोई जमीन तैयार ही नहीं की थी, केवल हवा में उड़ रहे थे।

इस बीच सवाल यह उठ रहा है कि क्या वो चुनाव प्रचार के दौरान किया अपना वादा निभाएंगे? प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के दौरान दावा किया था कि इस बार के विधानसभा चुनावों में जदयू को 25 सीट से ज्यादा नहीं मिलने वाला है। उन्होंने अपनी बात जोर देते हुए कहा था कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वो संन्यास ले लेंगे।

पत्रकार के दुबारा पूछने पर उन्होंने कहा यह रिकॉर्डिंग रख लीजिए अगर मेरी पार्टी सत्ता में आती है तो भी अगर जदयू के 25 सीट से अधिक आते हैं तो मैं संन्यास ले लूंगा। इस बीच चर्चा है कि कई राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर फिर से पनी पुरानी भूमिका में दिख सकते हैं। वह चुनावी रणनीति बनाने का काम कर सकते हैं। 

बता दें कि अभी हाल ही में प्रशांत किशोर ने कांग्रेस सांसद सह राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी। इसके बाद अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। इस बीच पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने संकेत दिया है कि अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के प्रचार अभियान की तैयारी करने में चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सेवाएं ली जा सकती है।

इससे पहले, किशोर ने 2017 के विधानसभा चुनावों में अमरिंदर सिंह के प्रचार अभियान की जिम्मेदारी संभाली थी। पंजाब में 2017 के चुनाव में कांग्रेस भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई थी। बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर को जो झटका लगा है, वो उनके लिए पचा पाना आसान तो नहीं। लेकिन लगता है कि प्रशांत किशोर इस कड़वे घूट को पीकर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।

बिहार चुनाव के नतीजों में मिली करारी शिकस्त के बाद प्रशांत किशोर अब रणनीति को लेकर एक बार फिर रणभूमि में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। प्रशांत किशोर ने अभी कुछ दिन पहले अपने एक वक्तव्य में यह भी कहा है कि वो अगले 5 साल और जनता के बीच संघर्ष करेंगे। उन्होंने हार से हतोत्साहित नहीं होने की बात कही और इसे संघर्ष की नई शुरुआत बताया।

जनसुराज के प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना ने कहा कि जल्द ही नई यात्रा की शुरुआत होगी। इस यात्रा को बिहार नवनिर्माण संकल्प यात्रा या बिहार संकल्प यात्रा की संज्ञा दी जा सकती है जो लगभग डेढ़ वर्ष तक जारी रह सकती है। उन्होंने कहा कि जनसुराज पार्टी को चुनाव में हार जरूर मिली है, लेकिन हिम्मत नहीं हारी है।

हम जनता के बीच जायेंगे और समझेंगे कि आखिर हमसे भूल कहां हुई? भारी जनसमर्थन के बावजूद हमारी हार हुई है। मुन्ना ने कहा कि जल्द ही प्रशांत किशोर लोगों से मिलेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।इधर, विधानसभा चुनाव में झटका लगने के बाद जनसुराज में भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

अभी सोमवार को ही भोजपुरी फिल्मों के लोकप्रिय गायक और अभिनेता रितेश पांडेय ने प्रशांत किशोर के राजनीतिक अभियान से अलग होने का फैसला कर बिहार की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। रितेश का जन सुराज पार्टी से इस्तीफा प्रशांत किशोर के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

रितेश ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए यह साफ कर दिया कि वे अब किसी राजनीतिक दल के बंधन में बंधकर काम नहीं करना चाहते। इसके पहले भी कई कार्यकर्ताओं ने जनसुराज से नाता तोड लिया था। हालांकि अभी सियासी गहमागहमी नहीं होने के कारण नेता भी चुप्पी साधे हुए हैं।  नेता अपने भविष्य को लेकर परेशान दिखने लगे हैं।

Web Title: bihar patna prashant kishor crushing defeat Assembly elections friends deserting you silence Jansuraj founder PK's party

भारत से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे