पटनाः बिहार में सत्ता परिवर्तन की तैयारियों के बीच सियासी गलियारे में यह सवाल तैर रहा है कि आख़िर अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? ऐसे में सरकार के नए स्वरूप को लेकर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व बेहद गंभीर नजर आ रहा है। दिल्ली में हुई एक सीक्रेट मीटिंग ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है, जहां बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ मिलकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से गोपनीय मुलाकात की। ये इतनी गुप्त कि इसकी कोई तस्वीर तक सामने नहीं आई। वहीं, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार का इन दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय में रहना और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करना, इस पूरे घटनाक्रम को वैचारिक मार्गदर्शन और संभावित लॉबिंग से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बिहार भाजपा के कई कद्दावर नेता दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और केंद्रीय नेतृत्व से मिलने की जुगत में हैं। हालांकि, हाईकमान फिलहाल चुनिंदा नेताओं से ही मिल रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि नई सरकार का खाका लगभग तैयार हो चुका है और सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है।
उधर, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डा. प्रेम कुमार नागपुर पहुंचकर संघ मुख्यालय में अहम शख्सियतों से मुलाक़ात कर रहे हैं। आरएसएस के इस गढ़ में हो रही बातचीत को सियासी लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। उनकी मौजूदगी और डॉ. केशव बलिराम हेगड़ेवाड़ की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि ने इन मुलाक़ातों को और भी मायने दे दिए हैं।
दरअसल, बिहार की सियासत में इन दिनों भारी हलचल है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद अब राज्य में नई सरकार के गठन की उल्टी गिनती शुरू मानी जा रही है। एक तरफ जहां प्रशासनिक गलियारों में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सस्पेंस बरकरार है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के भीतर भविष्य की रणनीति को लेकर बैठकों का दौर जारी है।
हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ को पूरा करने में व्यस्त हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस यात्रा में दोनों उपमुख्यमंत्री, सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा, लगातार उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। राजनीतिक जानकार इसे सत्ता के हस्तांतरण से पहले की ‘एकजुटता’ के रूप में देख रहे हैं।
लेकिन असली हलचल दिल्ली और नागपुर के बंद कमरों में चल रही है, जहां सियासत की नई इबारत लिखी जा रही है। ऐसे में बयानबाजी में भले एहतियात बरती जा रही हो, लेकिन अंदरखाने सियासी शतरंज की बिसात बिछ चुकी है। फिलहाल हर कोई यही कह रहा है कि जब तक नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ नहीं ले लेते, तब तक कोई बड़ा फैसला नहीं होगा।
मगर इसके बाद एनडीए और बीजेपी का केंद्रीय क़यादत मिलकर नया चेहरा तय करेगा। सियासी गलियारों में ये भी चर्चा है कि क्या इस बार भाजपा अपना मुख्यमंत्री पेश करेगी या फिर कोई नया समीकरण सामने आएगा? फिलहाल तस्वीर धुंधली है, लेकिन इतना तय है कि बिहार की सियासत एक नए दौर में दाखिल होने वाली है जहां हर चाल बेहद अहम और हर फैसला इतिहास रच सकता है।