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बिहार में बड़ा घोटाला सामने आया, CAG ने अपनी जांच में उठाये सवाल

By एस पी सिन्हा | Updated: November 27, 2018 19:52 IST

सीएजी ने अब तक के पांच निरीक्षण रिपोर्ट्स में बुडको के भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार और लोक लेखा समिति को सैौंपी है। इसमें 13 अरब से अधिक की वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है।

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बिहार में चारा घोटाला, सृजन घोटाला के बाद अब एक और बड़ा  घोटाला सामने आया है। कैग की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि मुजफ्फरपुर और दरभंगा के नजरत कार्यालय में करीब दो अरब 33 करोड़ रुपये की अनियमितता के साथ हीं बुडको यानि बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम में 13 अरब से अधिक की वित्तीय अनियमितता की गई है।

महालेखकार कार्यालय की ऑडिट रिपोर्ट में ये गड़बड़ी पकड़ी गई है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार, 2009 से लेकर 2017 तक की ऑडिट रिपोर्ट में 2 अरब 33 करोड़ 23 लाख की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। एक आरटीआई के जरिए मिली रिपोर्ट में इसकी पुष्टी हुई है। आरटीआई कार्यकर्ता अमित कुमार मंडल ने एक आरटीआई लगाई थी। जिसमें कैग रिपोर्ट के अनुसार 2011 से लेकर 2016 तक निरीक्षण रिपोर्ट में कैग ने 102 करोड़ की अनियमितता पकड़ी है। दरअसल, जिला नजारत कार्यालय में राजस्व को सरकार के वित्तीय मापदंडों के विपरीत इस्तेमाल किया गया है।

सीएजी ने मुजफ्फरपुर के अपने दो ऑडिट रिपोर्ट में काफी स्पष्ट तरीके से वित्तीय अनियमितता को बिन्दुवार रेखांकित किया है। यहां बता दें कि लोक लेखा समिति में विपक्षी दलों के नेता भी शामिल हैं। जाहिर है मामले को पक्ष-विपक्ष मिलकर टाल रहे हैं। दूसरी ओर सरकार द्वारा जांच की अनदेखी किए जाने से नाराज आरटीआई कार्यकर्ता अब इस मामले को रिट के माध्यम से पटना उच्च न्यायालय में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। बहरहाल, महज दो जिलों की सीएजी ऑडिट रिपोर्ट ही अभी सार्वजनिक हुई है। अगर अन्य जिलों में भी ऐसी ही अनियमितता बरती गई है। तो आशंका है कि ये बिहार का सबसे बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।

इस बीच, बुडको यानि बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम में भी 13 अरब से अधिक के वित्तीय अनियमितता सामने आई है। इसके अनुसार बुडको की 2009 में स्थापना से लेकर जून 2017 के बीच भारी वित्तीय अनियमितता हुई है। मामले का खास पहलू ये है कि सीएजी की रिपोर्ट द्वारा कई बार इन गड़बड़ियों पर आपत्तियां उठाई गई हैं। बावजूद इसके बुडको ने इसका जवाब तक देना उचित नहीं समझा है। बुडको की स्थापना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर 16 जून 2009 को की गई थी। 1956 की कम्पनी एक्ट के तहत बुडको के गठन का उद्येश्य शहरी विकास को गति देना था। 

लेकिन शहरी लोगों को तेजी से विकास करने के सपने दिखाकर सरकार के पैसे का पिछले आठ सालों से बंदरबाट किया जाता रहा है। महालेखाकार कार्यालय, पटना की ऑडिट रिपोर्ट में बुडको के भ्रष्टाचार का खुलासा किया गया है। सीएजी ने अब तक के पांच निरीक्षण रिपोर्ट्स में बुडको के भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार और लोक लेखा समिति को सैौंपी है। इसमें 13 अरब से अधिक की वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है। बता दें कि सीएजी ने सबसे पहले साल 2011-12 में बुडको का ऑडिट किया था। फिर वर्ष 2013-14 और 2015-16, 2016-17 और 2017-18 का ऑडिट किया। इन सभी ऑडिट में सीएजी ने बुडको के भ्रष्टाचार को पकड़ा और अपनी रिपोर्ट सरकार और लोक लेखा समिति को सौंपी। 

सीएजी ने पहले तीन ऑडिट में ही 10 अरब 50 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितता पकड़ी थी। सरकार को जानकारी देने के बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच आरटीआई कार्यकर्ता ने बिहार के तत्कालीन राज्यपाल को 19 सितम्बर 2016 को कारवाई के लिए लिखित शिकायत भी की लेकिन कोई जांच नहीं कराई गई। इतना ही नहीं सीएजी की आपत्तियों का बुडको ने भी कोई जवाब नहीं दिया।

सीएजी ने 2016-17 और 2017-18 के दो ऑडिट रिपोर्ट में और दो अरब 52 करोड से अधिक के वित्तीय गड़बड़ियों को पकड लिया। इस बीच सीएजी ने इस बात पर भी आपत्ति जताई है कि पिछली गडबडियों पर बुडको ने कोई जबाब नहीं दिया है। दरसअल, बुडको ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कई ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा किया है, लेकिन इस दौरान वह भ्रष्टाचार की सारी सीमाओं को भी पार कर गया है।

सीएजी ने शुरुआती ऑडिट में ही 125 करोड 53 लाख की लागत से पटना में बनाए गए बुद्धा स्मृति पार्क में कई वित्तीय अनियमितताओं को पकडा था। इसमें कुल 67 करोड 20 लाख से अधिक की वित्तीय गडबडियां सामने आईं थी। रिपोर्ट के अनुसार पार्क के निर्माण में संवेदक पारसनाथ डेवलपर्स लिमिटेड द्वारा भारी अनियमतता की गई। इसमें बुडको के अधिकारियों की भूमिका अहम रही। बुद्धा स्मृति पार्क बनाने में बीओक्यू यानि स्टीमेट 58 से 78 प्रतिशत तक अधिक बनाकर सरकारी राशि की बंदरबांट की गई। इसमें पारसनाथ डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को नियम विरूद्ध 23 करोड़ 70 लाख रुपये एडवांस दिए गए। इसमें पीडब्लूडी कोड के उलट आठ करोड़ 99 लाख रुपये संवेदक को अनियमित भुगतान किया गया।

टॅग्स :नीतीश कुमारबिहारनियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कैग)
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