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अवधेश कुमार का ब्लॉगः पत्थरबाजों को मुंहतोड़ जवाब

By अवधेश कुमार | Updated: December 20, 2018 07:49 IST

अगर कश्मीर के नेता चाहते हैं कि आम लोग ऑपरेशन में न मारे जाएं तो उन्हें पत्थरबाजी न करने की अपील करनी चाहिए. जो भी आतंकवादी के समर्थन में सरेआम संघर्ष करने आ जाए उसे क्या नाम दिया जा सकता है?

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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा मुठभेड़ में मारे गए सात नागरिकों के परिवारों के प्रति निश्चय ही हमारी सहानुभूति होगी, किंतु जम्मू-कश्मीर के अनेक नेता ऐसे बयान दे रहे हैं मानो सुरक्षा बलों ने जानबूझकर उनको मार दिया. सुरक्षा बलों को पूरी घाटी में खलनायक बनाने वाले केवल अलगाववादी हुर्रियत, आतंकवादी समर्थक तत्व ही नहीं, मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां भी हैं. 

वैसे घटनाक्रम का विवरण स्पष्ट करता है कि सुरक्षा बलों ने पूरी कोशिश की कि किसी प्रदर्शनकारी और पत्थरबाज की जान लिए बगैर ऑपरेशन पूरा कर लें. लेकिन पत्थरबाजी एवं उग्र भीड़ का हमला रुकने का नाम नहीं ले रहा था. पहले आंसू गैस के गोले छोड़े गए, पैलेट गन भी इस्तेमाल हुआ.

जिस आतंकवादी को मारा गया वह सर्वाधिक वांछित आतंकवादियों में से एक जहूर अहमद ठोकर था. थल सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने घाटी में ही बयान दिया था कि जो पत्थरबाजी करते हैं वे जान लें कि उनके साथ भी दुश्मनों जैसा व्यवहार किया जाएगा, क्योंकि पत्थर भी हथियार है जिससे वे हमारे ऊपर हमले करते हैं.

बावजूद पत्थरबाज नहीं मानें तो मूल कारण इसके पीछे निहित विचार है जिसकी प्रेरणा मजहब के नाम पर फैलाए गए अलगाववाद की विकृत सोच है. यह विचार पत्थरबाजों में भरा गया है या वो शक्तियां जो इन विचारधारा का पोषक हैं इनका इस्तेमाल करतीं हैं. ये जम्मू-कश्मीर में हैं और सीमा के उस पार भी. मुख्य बात है हथियारबंद आतंकवादियों का खात्मा कर जम्मू-कश्मीर को शांत करना. वही सुरक्षाबल कर रहे हैं और यही उनको करना चाहिए भी. 

ऑपरेशन ऑल आउट को कामयाबी मिल रही है. इस वर्ष करीब 240 आतंकवादी मारे जा चुके हैं. 2017 में भी 213 आतंकी मारे गए जबकि 2016 में कुल 150. इस तरह आतंकवादियों के काम तमाम किए जाने की संख्या बढ़ रही है. माना जा रहा है कि 250 के आसपास आतंकवादी अभी भी जम्मू-कश्मीर में सक्रिय हैं.

सुरक्षा बल इसके अलावा आतंकवादियों के परिवार से संपर्क कर उनकी वापसी की अपील करवाते हैं, जो हथियार छोड़कर वापस आ गए सामान्य पूछताछ के बाद उनकी काउंसिलिंग कराई जाती है, घर छोड़ा जाता है. उमर, मेहबूबा या अन्य ऐसे नेता इस पक्ष की चर्चा नहीं करते. अगर कश्मीर के नेता चाहते हैं कि आम लोग ऑपरेशन में न मारे जाएं तो उन्हें पत्थरबाजी न करने की अपील करनी चाहिए. जो भी आतंकवादी के समर्थन में सरेआम संघर्ष करने आ जाए उसे क्या नाम दिया जा सकता है?

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