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जेपी नड्डा ने कहा- शुरुआत से ही अनुच्छेद 370 था अस्थायी प्रावधान, जवाहर लाल नेहरू-शेख अब्दुल्ला बीच हुआ था ये निर्णय 

By रामदीप मिश्रा | Updated: October 1, 2019 09:55 IST

जेपी नड्डा ने कहा कि हम लोग 70 साल से ये नारा लगाते रहे हैं कि एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो संविधान नहीं चलेंगे। अब हम गर्व महसूस कर सकते हैं कि एक देश में एक प्रधान, एक विधान और एक संविधान का सपना सच हो गया है।

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ठळक मुद्देबीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बीते दिन सोमवार (30 सितंबर) को चंडीगढ़ पार्टी की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 शुरुआत से ही संविधान में अस्थायी प्रावधान था। संसद ने अगस्त में अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया था, जिसमें राज्य को विशेष दर्जा दिया था और जम्मू-कश्मीर (पुनर्गठन) अधिनियम 2019 को पारित किया था।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बीते दिन सोमवार (30 सितंबर) को चंडीगढ़ पार्टी की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 शुरुआत से ही संविधान में अस्थायी प्रावधान था। संसद ने अगस्त में अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया था, जिसमें राज्य को विशेष दर्जा दिया था और जम्मू-कश्मीर (पुनर्गठन) अधिनियम 2019 को पारित किया था। इस अधिनियम के तहत राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया था, जिसमें जम्मू और कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित राज्य बनाए गए।

उन्होंने कहा कि पहले शेख अब्दुल्ला, फिर फारूक अब्दुल्ला, मुफ्ती मोहम्मद सईद, बाद में उमर अब्दुल्ला और अब कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे के बारे में लोगों को गुमराह किया। वहां कोई विशेष दर्जा नहीं था, शुरुआत से ही अनुच्छेद 370 था अस्थायी प्रावधान था। 

उन्होंने विशेष दर्जा समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह की सराहना की और कहा कि पीएम मोदी की इच्छा शक्ति और अमित शाह की रणनीति के कारण अनुच्छेद 370 को हटाना संभव हो सका। 

जेपी नड्डा ने कहा कि हम लोग 70 साल से ये नारा लगाते रहे हैं कि एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो संविधान नहीं चलेंगे। अब हम गर्व महसूस कर सकते हैं कि एक देश में एक प्रधान, एक विधान और एक संविधान का सपना सच हो गया है। जवाहर लाल नेहरू जी ने शेख अब्दुल्ला के साथ दिल्ली एकॉर्ड किया था, जो किसी तरह से प्रमाणित नहीं था। इसमें ही तय हुआ कि जम्मू कश्मीर में अलग संविधान होगा, वहां का अलग झंडा होगा और वहां का अलग प्रधान होगा जो विधान सभा से चुना जाएगा। उन्होने बताया कि 1951 के विधानसभा चुनाव में अनुच्छेद 370 के कारण सभी 75 सीटें शेख अब्दुल्ला जीत गए, तो आंदोलन शुरू हुआ। उस आंदोलन में 15,000 लोगों ने गिरफ्तारियां दी, करीब 18 लोगों का बलिदान हुआ, तब श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने देश को जागृत किया। अनुच्छेद 370 के कारण जम्मू कश्मीर में भारतीय संसद से पारित करीब 104 कानून लागू नहीं थे। पश्चिमी पाकिस्तान से जम्मू कश्मीर में आए लोग वहां लोकसभा, विधानसभा या काउंसलर के चुनाव में वोट नहीं दे सकते थे। 

उन्होंने कहा कि प्रावधान को हटाने के साथ जम्मू कश्मीर का पूरी तरह से भारत में एकीकरण हो गया और अब सभी 104 भारतीय कानून नए केंद्रशासित प्रदेशों में लागू होंगे। उन्होंने आगे कहा कि श्रीनगर और जम्मू में दो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) संस्थान स्थापित किए जाएंगे। 

उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने से भारत के सभी कानून जम्मू कश्मीर में भी लागू होंगे। वहां के सफाई कर्मचारियों के बच्चे प्रशासनिक और न्यायिक सेवाओं में नौकरी कर सकेंगे। वहां की विवाहित महिलाओं को भी संपत्ति के अधिकार मिलेंगे। विकास कार्यों का पैसा सीधा पंचायतों के पास पहुंचेगा। 

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