Bihar: बिहार में सत्ता हस्तांतरण की तैयारियों के बीच भाजपा के द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री का चेहरा तय कर लिए जाने की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। सूत्रों से के अनुसार नए मुख्यमंत्री के चेहरे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा ने कुछ चेहरों को शॉर्टलिस्ट किया था, जिनमें से एक पर सहमति बन गई है। सूत्रों के अनुसार 6 अप्रैल को मुख्यमंत्री आवास में जदयू राज्य कार्यकारिणी की बैठक हो सकती है और 9 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली जाएंगे।
9 अप्रैल को दिल्ली में जदयू राष्ट्रीय परिषद और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हो सकती है। 9 अप्रैल की शाम को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दिल्ली में मुलाकात संभव है।
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के कार्यक्रमों के बाद, मुख्यमंत्री 11 अप्रैल को पटना लौटेंगे। इसके तुरंत बाद 12 या 13 अप्रैल को पटना में एनडीए विधायक दल की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें मुख्यमंत्री पद के लिए चयन की प्रक्रिया होगी।
माना जा रहा है कि 14 अप्रैल को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिसके बाद 18 अप्रैल से पहले बिहार में नई सरकार के गठन की पूरी संभावना है। ऐसे में 14 अप्रैल के बाद राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो सकती है। उधर, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार के अगले कदमों और नए नेतृत्व को लेकर सियासी हलचल लगातार बढ़ती जा रही है। दरअसल, सबसे पहले नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया, फिर राज्यसभा जाने की तैयारी शुरू हो गई है। 10 अप्रैल को नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं।
ऐसे में सत्ता हस्तांतरण की पटकथा लगभग तैयार हो चुकी है। इसके साथ ही पटना स्थित 7 सर्कुलर रोड आवास का लगातार दौरा भी इस बात की ओर इशारा करता है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद नए ठिकाने पर शिफ्ट होने की तैयारी में हैं।
नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद नए मुख्यमंत्री शपथ लेंगे। सूत्रों की मानें तो भाजपा के द्वारा शॉर्टलिस्ट गए नामों पर पीएम नरेंद्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी इस नाम से सहमत हैं। सबसे बड़ी बात तो यह कि आरएसएस ने भी उस चेहरे को हरी झंडी दे दी है। अब बस इंतजार 14 अप्रैल का है, जिस दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफा देंगे और उसके बाद नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो सकेगा।
सूत्रों के अनुसार, खरमास समाप्त होने के बाद कभी भी नई सरकार का गठन किया जा सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 14 अप्रैल के बाद यह प्रक्रिया तेज हो सकती है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अंदरखाने की तैयारियां पूरी रफ्तार से चल रही हैं। बता दें कि बिहार में नए मुख्यमंत्री के नामों लेकर कई लोगों की चर्चा में हैं, लेकिन उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके कामकाज की खूब सराहना की है, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। हालांकि, उनके दल बदलने और शुरू से ही विवादों के घेरे में रहना उनके सामने एक बडी चुनौती है। वैसे अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और केंद्रीय स्तर पर ही लिया जाएगा। इसमें जातीय समीकरण, राजनीतिक अनुभव और जनाधार जैसे कई फैक्टर अहम भूमिका निभाएंगे।
जानकारों के अनुसार नई सरकार के गठन के साथ-साथ मंत्रिमंडल को लेकर भी व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है। सूत्रों की मानें तो इस बार पहले की तुलना में ज्यादा संख्या में मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। पिछली बार जहां जदयू कोटे से कम मंत्री बनाए गए थे, वहीं इस बार संतुलन बनाने की कोशिश की जा सकती है। जदयू कोटे से अधिकांश पुराने चेहरों को दोबारा मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। वैसे एक-दो नए चेहरे भी शामिल किए जा सकते हैं।
वहीं भाजपा कोटे से भी कई नए नामों की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार राज्य में नई सरकार का जो खाका तैयार किया गया है, उसके अनुसार जदयू से 13 मंत्री तो लोजपा रामविलास से 2 मंत्री तो हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा की ओर से एक मंत्री शपथ ले सकता है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से एक मंत्री सरकार में होगा। भविष्य में मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। भाजपा को भी पहले की तरह आनुपातिक हिस्सेदारी मिलेगी।