जम्मूः सालभर पहले हुए पहलगाम नरसंहार की परछाई इस बार अमरनाथ यात्रा पर साफ दिख रही है। यात्रा के लिए किए जा रहे प्रबंधों में सबसे अधिक जोर सुरक्षा पर ही दिया जा रहा है। खासकर लंगरों और सहायता शिविरों की सुरक्षा पर क्योंकि सभी को डर यह है कि इस बार की अमरनाथ यात्रा में कुछ भी बड़ा हो सकता है। इस डर की परछाई यात्रा प्रबंधों लेकर होने वाली कश्मीर के मंडलायुक्त की बैठक में भी दिखी थी जहां डिवकाम श्री अंशुल गर्ग द्वारा सुरक्षा पर जोर देने की ताकिद बार-बार की गई थी। हालांकि अभी तक यात्रा के आनलाइन या आफलाइन पंजीकरण की तारीखें घोषित नहीं की गई हैं।
पर यह 17 जुलाई से आरंभ होने वाली है तथा इसकी प्रथम पूजा 29 जून को की जानी है। श्राइन बोर्ड के सूत्रों के बकौल, अगले एकाध दिन में यात्रा पंजीकरण की तारीखें घोषित कर दी जाएंगी। अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड पहले ही यह बता चुका है कि अमरनाथ गुफा तक जाने वाले दोनों रास्तों पर संवेदनशीलता के हिसाब से जोखिम भरे स्थानों की पहचान कर वहां सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए जाएंगे।
हालांकि दोनों यात्रा मार्गों से बर्फ हटाने का कार्य आरंभ हो चुका है पर बार-बार पश्चिमी विक्षोभ के कारण बर्फ हटाने के कार्यों में रुकावटें जरूर आ रही हैं। अधिकारी बताते थे कि बर्फ हटते ही दोनों यात्रा मार्गों और आसपास के इलाकों को सेना व अन्य सुरक्षाबलों के हवाले कर दिया जाएगा जो क्षेत्रों को आतंकी खतरे से मुक्त करने की कवायद तेज करेंगे ताकि शामिल होने वाले श्रद्धालुओं पर कोई खतरा बाकी न रहे।