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लोकसभा में अधीर रंजन चौधरी ने मोदी सरकार और अध्यक्ष को आईना दिखाने की कोशिश की

By शीलेष शर्मा | Updated: June 19, 2019 19:14 IST

चौधरी ने अपनी बात किसानों की खुदकुशी से शुरू की और लोकसभा अध्यक्ष से मांग की कि उनकी कोशिश होनी चाहिए कि ऐसी आत्महत्याओं पर रोक लगे तथा किसानों के हालातों को सुधारा जाए.

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बंगाल में रॉबिनहुड की छवि से पहचाने जाने वाले अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के चुने जाने पर उन्हें बधाई देते हुए सरकार को आईना दिखाने में कोई चूक नहीं की. लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन ने बड़ी चतुराई से उन तमाम मुद्दों को उठाया जिनको लेकर कांग्रेस लंबे समय से शिकायत करती रही है. चौधरी ने अपनी बात किसानों की खुदकुशी से शुरू की और लोकसभा अध्यक्ष से मांग की कि उनकी कोशिश होनी चाहिए कि ऐसी आत्महत्याओं पर रोक लगे तथा किसानों के हालातों को सुधारा जाए. लोकतंत्र की गरिमा और उसे बचाकर रखने के लिए भी कांग्रेस नेता ने अध्यक्ष को यह समझाने की कोशिश की कि भारत का लोकतंत्र कितना महत्वपूर्ण है जहां एक मतदाता के लिए आधा दर्जन से अधिक चुनाव कर्मी पहाड़ों को पार कर मतदान कराने के लिए पहुंचते है. कांग्रेस पार्टी की सोच का खुलासा करते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कांग्रेस की नीयत साफ है वह चर्चा, विरोध और निर्णय में विश्वास रखती है. लोकसभा अध्यक्ष से कांग्रेस अपेक्षा करती है कि उसको सही ढंग से अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए. दरअसल यह सवाल चौधरी ने इसलिए उठाया कि 16वीं लोकसभा में पूरे पांच साल तक कांग्रेस यह शिकायत करती रही कि सदन में उसे अपनी बात रखने का समूचित अवसर नही मिल रहा है.  प्रधानमंत्री मोदी की इस टिप्पणी पर भी कि अब पक्ष विपक्ष नहीं होगा, बहुपक्ष होगा. अधीर रंजन ने व्यंग्यात्मक शैली में कहते हुए इसके साथ स्पीकर की ओर इशारा करते हुए कहा कि आपको निष्पक्ष रहना होगा. 

सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जय श्रीराम के जो नाम लगे उस पर भी अधीर रंजन चौधरी ने कड़ी आपत्ति उठाई और उदाहरण देते हुए कहा कि हमें ऐसा समाज बनाना चाहिए जिसमें पुजारी को मंदिर में अल्ला, मुल्ला को मस्जिद में राम नजर आए और इंसान को इंसान नजर आए. लोकसभा अध्यक्ष को निष्पक्ष होकर संसद की स्थाई समितियों को महत्व देने की मांग भी चौधरी ने की. उन्होंने कहा कि अध्यादेश का रास्ता लोकतंत्र के लिए कोई बहुत अच्छा रास्ता नहीं है. इस पर अंकुश लगना चाहिए और किसी भी विधेयक को पारित करने से पहले उस पर विस्तृत चर्चा हो. पंडित नेहरू का उल्लेख करते हुए अधीर रंजन ने लोकसभा अध्यक्ष को यह बताया कि यह सदन स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति करता है चूंकि आप इसके संरक्षक हैं इसलिए यह जिम्मेदारी आपकी हो जाती है कि संसदीय लोकतंत्र को मजबूत बनाया जाए जिसके लिए कांग्रेस कृतसंकल्प है. 

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