नई दिल्लीः आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया है। दिल्ली चुनाव हारने के बाद आप में संकट है और अभी आप संयोजक अरविंद केजरीवाल के पास केवल पंजाब में सरकार है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव है और इस बीच अरविंद केजरीवाल ने अपने खास नेता राघव चड्ढा पर गाज गिरा दी है। चड्ढा को पंजाब का प्रभारी बनाया गया था और पार्टी को 2022 में जीत दिलाई थी। केजरीवाल ने इनाम देते हुए दिल्ली विधानसभा से इस्तीफा दिलाया और 2023 में पंजाब से राज्यसभा सांसद भेजा। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 सदस्य हैं।
7 सांसद पंजाब से और 3 सांसद दिल्ली से हैं। भाजपा, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बाद आम आदमी पार्टी सदन में चौथी सबसे बड़ी पार्टी है। आपको बता दें कि राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल भी पार्टी के खिलाफ बगावत कर चुकी है और केजरीवाल के खिलाफ लगातार बयान दे रही हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार चड्ढा की जगह पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को नियुक्त किया गया है।
सूत्रों ने बताया कि इस बदलाव के संबंध में राज्यसभा सचिवालय को औपचारिक सूचना भेज दी गई है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि चड्ढा को संसद में बोलने का समय नहीं दिया जाना चाहिए। मित्तल ने चड्ढा की जगह राज्यसभा में आप के उपनेता का पद संभाला है, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह राज्यसभा में पार्टी के नेता हैं।
आज का यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है और इससे चड्ढा के भविष्य को लेकर सवाल उठ रह हैं। कभी आम आदमी पार्टी का शीर्ष नेता और केजरीवाल के करीबी लोगों में गिना जाता था। 37 वर्षीय चड्ढा आम आदमी पार्टी की स्थापना से ही इसके सदस्य रहे हैं। दिल्ली के मॉडर्न स्कूल के पूर्व छात्र हैं। वह एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के अंतिम चरण में चड्ढा की मुलाकात केजरीवाल से हुई।
जब केजरीवाल और अन्य लोग पार्टी बनाने या न बनाने पर विचार कर रहे थे। उस समय 23 वर्षीय चड्ढा आम आदमी पार्टी के गठन के साथ जुड़े और उनका पहला राजनीतिक कार्य दिल्ली लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करना था। चड्ढा आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में पार्टी का चेहरा बन गए और नियमित रूप से टीवी बहसों में दिखाई देते थे।
26 साल की उम्र में उन्हें आम आदमी पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। 2020 के दिल्ली चुनावों में चड्ढा राजेंद्र नगर सीट से चुने गए और उन्हें दिल्ली जल बोर्ड का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। 2022 में उन्हें आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया था। पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर पिछले कई महीनों से चर्चा चल रही है।
पार्टी की प्रमुख गतिविधियों से चड्ढा की अनुपस्थिति और केजरीवाल और आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया को क्लीन चिट मिलने जैसी घटनाओं पर उनकी चुप्पी ने सत्ता के गलियारों में अटकलों को जन्म दिया। हालांकि, चड्ढा राज्यसभा में हवाई अड्डों पर खाने-पीने की चीजों की ऊंची कीमतों, गिग वर्कर्स के अधिकारों और बड़े शहरों में यातायात जाम जैसे प्रमुख मुद्दों को उठाते रहे हैं।
एनडीटीवी ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए चड्ढा के कार्यालय से संपर्क किया है। मित्तल ने उन्हें यह जिम्मेदारी देने के लिए केजरीवाल को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी एक लोकतांत्रिक पार्टी है और हर नेता को काम सीखने का मौका देती है। पहले एनडी गुप्ता उपनेता थे, फिर चड्ढा जी थे और अब मैं हूं। इस कदम से पार्टी के भीतर दरार की आशंकाएं बढ़ने लगीं।
अशोक मित्तल ने इंडिया टुडे टीवी को बताया कि सब ठीक है और यह बदलाव एक नियमित प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, "पार्टी का मानना है कि सभी को मौका मिलना चाहिए।" आप और उसके शीर्ष नेतृत्व से जुड़े प्रमुख घटनाक्रमों पर चड्ढा की लगातार चुप्पी के बीच आया है। हालांकि, पार्टी मामलों से दूरी बनाए रखने के कारण यह पहली बार नहीं है जब उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।
2024 के लोकसभा चुनावों से पहले जब केजरीवाल को शराब घोटाले में गिरफ्तार किया गया था, तब पंजाब के सांसद ने अपनी देरी से प्रतिक्रिया का कारण ब्रिटेन में हुई आंखों की सर्जरी से ठीक होना बताया था। दिल्ली आबकारी नीति मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया, तब चड्ढा ने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।