85-year-old 'Amma with one rupee idli' is no longer required to burn and burn... | 85 साल की ‘एक रुपये की इडली वाली अम्मा’ को अब चूल्हा और फूंकने की जरूरत नहीं रही...
पिछले 30 साल से लोगों की भूख शांत करने के लिए सस्ती इडली का यह अनोखा व्यापार कर रही हैं।

Highlightsलकड़ी चूल्हे पर इडली पकाते पकाते कमलातल 85 की उम्र पार कर चुकी है।उद्योगपति आनंद महिंद्रा और धर्मेंद्र प्रधान के हस्तक्षेप की वजह से उन्हें मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन जो मिल गया है।

इडली वाली अम्मा... जी हां, यहां ‘एक रुपये की इडली वाली वयो-वृद्ध कमलातल सालों से सांभर, चटनी के साथ लोगों को एक रुपये में इडली खिलाती आ रही हैं। उनकी ख्याति एक रुपये की इडली वाली अम्मा के रूप में है।

लकड़ी चूल्हे पर इडली पकाते पकाते कमलातल 85 की उम्र पार कर चुकी है। पर सोशल मीडिया के इस दौर में उनकी कहानी देश के नामी गिरामी लोगों तक पहुंचने के बाद उनका कम थोड़ा आसान हुआ है। उन्हें अब लकड़ी का चूल्हा नहीं फूंकनी होगी।

उद्योगपति आनंद महिंद्रा और धर्मेंद्र प्रधान के हस्तक्षेप की वजह से उन्हें मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन जो मिल गया है। यहां छोटे ढाबों में आमतौर पर जहां इडली 10 रुपये और बड़े रेस्तरां में 50 रुपये तक में मिलती है। लेकिन कमलातल हैं कि अपने ठीहे पर पिछले 30 साल से लोगों की भूख शांत करने के लिए सस्ती इडली का यह अनोखा व्यापार कर रही हैं।

इस उम्र में भी वह सांभर-नारियल की चटनी के साथ रोजाना करीब 600 इडली एक रुपये के हिसाब से ही बेच रही हैं। उनके पति अब इस दुनिया में नहीं रह गए हैं। शुरुआत में वह 25 पैसे में इडली बेचती थीं। चावल, उड़द दाल, नारियल की लागत बढ़ने से उन्होंने इडली की कीमत उन्होंने अब एक रुपये कर दी है। उनके लिए यह एक तरह से सामाजिक व्यापार है। इसमें मुनाफा से अधिक सेवा भाव जुड़ा है।

कमलातल सवेरे चार बजे उठकर अकेले सारी तैयारी में जुट जाती हैं। उनकी दुकान पर छात्रों, सरकारी और निजी कंपनियों कर्मचारियों, ड्राइवरों एवं दिहाड़ी मजदुरों की भीड़ रहती हैं। इन्हीं के बीच में किसी ने उनकी इडली की दुकान के बारे में सोशल मीडिया पर डाल दिया और बात वायरल होते हुए महिंद्रा एंड महिंद्रा समूह के प्रमुख आनंद महिंद्रा तक पहुंच गयी।

वहीं कोयंबटूर के जिलाधिकारी के. राजामणि ने भी उनसे कुछ दिन पहले मुलाकात की। उन्होंने कमलातल को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर दिलाने से लेकर अन्य हर संभव मदद का आश्वासन दिया। महिंद्रा कमलातल की कहानी से अभिभूत हुए और उन्हें लकड़ी का चूल्हा फूंकते हुए देखकर उन्हें मुफ्त गैस स्टोव और रसोई गैस कनेक्शन देने की बात कही।

उन्होंने हाल में ट्वीट किया था, ‘‘ मैंने देखा कि वह (कमलातल) अभी भी लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाती हैं। यदि कोई उन्हें जानता है तो मैं उनके व्यापार में ‘निवेश’ करना चाहता हूं और उन्हें एक एलपीजी स्टोव खरीदकर देना चाहता हूं।’’ इस पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के हस्तक्षेप करने पर भारत गैस कोयंबटूर ने उन्हें एक गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया।

इस संबंध में किए गए ट्वीट पर प्रतिक्रिया करते हुए महिंद्रा ने भारत गैस का धन्यवाद भी किया। महिंद्रा ने यह भी ट्वीट किया, ‘‘ मैं पहले ही कह चुका हूं कि उनकी एलपीजी की लागत का वहन करने में मुझे खुशी होगी। प्रधान आपका इसके प्रति संवेदनशीलता दिखाने के लिए धन्यवाद।’’

इस पर प्रधान ने ट्वीट किया, ‘‘कमलातल की लगन और प्रतिबद्धता को सलाम। स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से उन्हें गैस कनेक्शन दिलवाने में मदद करने पर खुशी हुई। समाज को ऐसे मेहनती लोगों को सशक्त बनाना चाहिए।’’ 


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