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क्यों बढ़ रही है माइग्रेन की तकलीफ? जानें इसके कारण और उपाय

By सैयद मोबीन | Updated: December 11, 2023 16:08 IST

माइग्रेन एक तरह का सिरदर्द है, जिसमें गंभीर दर्द होता है। आमतौर पर सिर के एक साइड में यह दर्द होता है। दर्द के अहसास के साथ ही कभी-कभी धुंधलापन आता है, चमक उठती है।

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नागपुर: वर्तमान की भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान, मौसम और जीवनशैली में बदलाव के कारण अनेक बीमारियां हो रही हैं। इनमें से ही एक सिरदर्द या माइग्रेन की समस्या भी बहुत आम हो गई है। कई लोग इस समस्या से ग्रस्त हैं। खासतौर पर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा पाई जाती है। आखिरकार यह माइग्रेन की समस्या क्या है, इसके क्या कारण है और इसके उपाय क्या है, इसे लेकर हमेशा ही लोग असमंजस में रहते हैं।

क्या है माइग्रेन?

माइग्रेन एक तरह का सिरदर्द है, जिसमें गंभीर दर्द होता है। आमतौर पर सिर के एक साइड में यह दर्द होता है। दर्द के अहसास के साथ ही कभी-कभी धुंधलापन आता है, चमक उठती है। माइग्रेन की शुरुआत होने से पहले तक यह लक्षण नजर आ सकते हैं। 

इसके अलावा चेहरे, हाथ, पैर में झुनझुनाहट या बात करने में बाधा पैदा हो सकती है। यह माइग्रेन के शुरुआती लक्षण हैं। ज्यादा लाइट जैसे सूरज की रोशनी, ज्यादा आवाज से भी माइग्रेन होता है। माइग्रेन के अटैक चार घंटे से लेकर तीन दिन अर्थात 72 घंटे तक रह सकते हैं।

इसके क्या कारण हैं?

अब तक इसका कारण पूरी तरह समझ में नहीं आया है, लेकिन कई बार बोला गया है कि जेनेटिक, एन्वायर्नमेंटल फैक्टर, हार्मोनल, धूम्रपान आदि कारक होते हैं। बुनियादी तौर पर मस्तिष्क में कुछ केमिकल असंतुलन होता है। महिलाओं में हार्मोनल चेंज, पीरियड के साथ, पिल्स के कारण, ड्रिंक्स, वाइन, ज्यादा कॉफी लेने से यह हो सकता है, ये माइग्रेन के ट्रिगर फैक्टर होते हैं।

पुरुषों में यह परफ्यूम, धूम्रपान से होता है। नींद बराबर नहीं हो रही है, खाली पेट रहने, मौसम में बदलाव से भी सिरदर्द होता है। फूड हैबिट जैसे पुरानी चीज, प्रोसेस्ड फूड खाने से, खाना नहीं खाने से भी यह समस्या होती है। फूड में एमएसजी अर्थात मोनो सोडियम ग्लूटामेड यह बेसिकली प्रिजरवेटिव होता है।

प्रोसेस्ड फूड का प्रिजरवेटिव बढ़ाने के लिए यह डाला जाता है। आर्टिफिशियल स्वीटनर से भी यह समस्या होती है। यह शिकायत पुरुषों की तुलना में महिलाओं में 3 गुना ज्यादा पाई जाती है, खासतौर पर 20 से 35 साल की उम्र में यह समस्या अधिक होती है।

इसके उपाय क्या है?

माइग्रेन के दो उपाय हैं। एक तो इसे प्रिवेंट करने के लिए दवाई ली जा सकती है ताकि यह समस्या ही पैदा न हो। इसके बावजूद माइग्रेन हो जाए तो अटैक के दौरान दवाइयां दी जाती हैं। इस दो तरीकों से इस समस्या से राहत पाई जा सकती है।

क्या ख्याल रखेंगे?

सबसे पहले तो माइग्रेन के जो ट्रिगर फैक्टर हैं, उन्हें नजरअंदाज करना चाहिए. प्रोसेस्ड फूड न खाएं, खाली पेट न रहें, बैंड-बाजे से दूर रहे, लिफ्ट में किसी ने परफ्यूम लगाया हो तो उससे दूर हो जाए या नाक पर कपड़ा रखें, धूप में ज्यादा देर न रहें, और जाना ही हो तो सन ग्लासेस का उपयोग करें, बाहर के खाने, ज्यादा कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स से परहेज करें।

इसमें आहार की क्या भूमिका है?

माइग्रेन में आहार की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए माइग्रेन की समस्या से बचने के लिए अल्कोहल से दूर रहें, ज्यादा कॉफी न पीएं, प्रोसेस्ड फूड के सेवन बचें, प्रॉपर डायट लें।

ट्रिगर फैक्टर को नजरअंदाज न करें : डॉ. पलक जायसवाल

न्यूरो सर्जन डॉ. पलक जायसवाल ने कहा कि ट्रिगर फैक्टर को नजरअंदाज न करें, प्रोसेस्ड फूड, बाहर के खाने, ज्यादा कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स, बैंड-बाजे, परफ्यूम से दूर रहें। खाली पेट न रहें, धूप में ज्यादा देर ना रहें, जाना ही हो तो सन ग्लासेस का उपयोग करें, नियमित व्यायाम करें।

माइग्रेन की समस्या किसी-किसी को जिंदगीभर भी हो सकती है और किसी की अपने आप रुक भी सकती है। इसकी समय सीमा नहीं है। जब दवाई लेते हैं तो दर्द नहीं होता है और दवाई नहीं लेने पर दर्द होने लगता है, इसलिए हो सकता है कि लंबे समय तक दवाई लेना पड़े।

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