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Vagina को हेल्दी, स्मेल फ्री रखने और यीस्‍ट इन्फेक्शन से बचाने के लिए हर लड़की जरूर करे ये 5 काम

By उस्मान | Updated: January 31, 2019 17:54 IST

Vaginal yeast infection के लक्षणों में बहुत अधिक खुजली, जलन, दर्द और डिस्‍चार्ज आदि शामिल हैं. टाइट कपड़े पहनना इसका सबसे बड़ा कारण है.

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योनि (Vagina) महिला के शरीर के सबसे नाजुक हिस्सों में से एक है और इसकी विशेष देखभाल की जरूरत होती है। उचित देखभाल नहीं करने से इस हिस्से में तेजी से बैक्टीरिया पैदा हो सकते हैं जिससे आपको वैजाइनल यीस्‍ट इन्फेक्शन (Vaginal yeast infection) का खतरा होता है। इतना ही नहीं बैक्टीरिया गंदी स्मेल का भी कारण बन सकते हैं। इससे बचने के लिए आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। 

वैजाइनल यीस्‍ट इन्फेक्शन क्या है (causes and symptoms of Vaginal yeast infection)

यह एक दर्दनाक स्थिति है जो कई महिलाओं को अपने जीवन में कभी न कभी अनुभव होती है। इसके लक्षणों में बहुत अधिक खुजली, जलन, दर्द और डिस्‍चार्ज आदि शामिल हैं। योनि और उसके आसपास के हिस्से में नमी की वजह से फंगस को बढ़ने का मौका मिलता है। यह संक्रमण कैंडिडा एल्बीकैंस नामक फंगस के कारण होता है।

1) कॉटन इनर वियर पहनने कॉटन इनर वियर पहनने में आरामदायक होते हैं, तेजी से सूखते हैं। कॉटन का कपड़ा बैक्टीरिया और यीस्ट के विकास को रोकते हैं। सिंथेटिक इनर वियर पहनने से इस हिस्से में जलन पैदा हो सकती है।

2) सेक्स के बाद योनि को धोयें सेक्स के बाद योनि को धोने से संक्रमण की संभावना को कम करने में मदद मिलती है। इससे वो जीवाणु साफ़ हो जाते हैं, जो सेक्स के दौरान प्रवेश कर जाते हैं। सेक्स के बाद दोनों पार्टनर को अपने अंगों की सफाई करनी चाहिए। 

3) पेशाब के बाद भी योनी को धोयेंबैक्टीरिया मूत्रमार्ग के जरिये भी फैल सकते हैं। इसलिए मूत्र पथ में किसी भी संक्रमण को रोकने के लिए पेशाब के बाद तुरंत पानी से अंगों को धोना इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है। पेशाब से बैक्टीरिया बाहर निकल जाते हैं। 

4) टाइट कपड़े पहनने से बचें बहुत ज्यादा टाइट कपडे पहनने से निचले हिस्से में हवा नहीं पहुंच पाती है। इससे नमी का खतरा होता है और नमी में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। इसलिए आपको लंबे समय तक टाइट कपड़े पहनने से बचना चाहिए। 

5) कठोर साबुन के इस्तेमाल से बचेंयोनि अपने आप में एक बहुत ही संवेदनशील हिस्सा है और कठोर साबुन का उपयोग करने से इसका पीएच लेवल कम हो जाता है। पीएच लेवल नार्मल रहना चाहिए जो 3.5-4.5 के बीच है। इसमें असंतुलन से बैक्टीरिया पैदा हो सकता है। इसलिए योनि को साफ करने के लिए सादे गुनगुने पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

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