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रात में सिर्फ़ 11 मिनट ज़्यादा सोने से हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है कम

By रुस्तम राणा | Updated: March 28, 2026 20:01 IST

रिसर्च करने वालों ने पाया कि रात में सिर्फ़ 11 मिनट ज़्यादा सोना, साथ में 4.5 मिनट तक हल्की से तेज़ शारीरिक कसरत करना और एक चौथाई कप ज़्यादा सब्ज़ियाँ खाना, दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को काफ़ी हद तक कम करने से जुड़ा है।

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नई दिल्ली: 'यूरोपियन जर्नल ऑफ़ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी' में छपी एक नई रिसर्च के मुताबिक, हर दिन थोड़ी ज़्यादा नींद लेना, थोड़ा ज़्यादा हिलना-डुलना और कुछ ज़्यादा सब्ज़ियाँ खाना, दिल के दौरे और स्ट्रोक के खतरे को काफ़ी हद तक कम कर सकता है।

इस स्टडी में यूके बायोबैंक (UK Biobank) के 53,000 से ज़्यादा वयस्कों पर आठ साल तक नज़र रखी गई और पाया गया कि इन तीन आदतों में मामूली सुधार करने से भी सेहत को काफ़ी फ़ायदे मिलते हैं।

रिसर्च करने वालों ने पाया कि रात में सिर्फ़ 11 मिनट ज़्यादा सोना, साथ में 4.5 मिनट तक हल्की से तेज़ शारीरिक कसरत करना और एक चौथाई कप ज़्यादा सब्ज़ियाँ खाना, दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को काफ़ी हद तक कम करने से जुड़ा है। इस मेल से दिल के दौरे, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर का खतरा 10 फ़ीसदी तक कम होता पाया गया।

यूरोपियन सोसाइटी ऑफ़ कार्डियोलॉजी के अनुसार, जो लोग अपने जीवनशैली में बड़े बदलाव करने में सक्षम थे, उन्हें इसके और भी अधिक लाभ मिले। सबसे अच्छा संयोजन था: हर रात आठ से नौ घंटे की नींद लेना, प्रतिदिन 42 मिनट से अधिक समय तक मध्यम से ज़ोरदार शारीरिक गतिविधि करना, और संतुलित आहार बनाए रखना। 

जिन लोगों की जीवनशैली सबसे कम स्वस्थ थी, उनकी तुलना में इस जीवनशैली वाले लोगों में हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं का जोखिम 57 प्रतिशत तक कम पाया गया।

रिसर्चर्स ने स्मार्टवॉच जैसे पहनने वाले डिवाइस से मिले डेटा का इस्तेमाल करके सोने के पैटर्न और एक्सरसाइज़ के लेवल का एनालिसिस किया। हिस्सा लेने वालों ने अपनी खाने-पीने की आदतों के बारे में भी खुद जानकारी दी। आठ साल के फ़ॉलो-अप पीरियड के दौरान, रिसर्चर्स ने 2,034 बड़ी दिल से जुड़ी घटनाओं को रिकॉर्ड किया।

इस स्टडी के मुख्य लेखक, सिडनी यूनिवर्सिटी के रिसर्च फ़ेलो डॉ. निकोलस कोएमेल ने कहा कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी के अलग-अलग हिस्सों में छोटे-छोटे बदलावों को मिलाकर दिल की सेहत पर हैरानी की हद तक बड़ा और अच्छा असर पड़ सकता है। 

उन्होंने यह भी कहा कि ज़्यादातर लोगों के लिए, ज़िंदगी जीने के तरीके में एक साथ कोई बड़ा बदलाव करने की कोशिश करने के बजाय, इस तरह के छोटे-छोटे बदलाव करना ज़्यादा मुमकिन और टिकाऊ होता है।

ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन की एमिली मैकग्रा ने कहा कि लोगों को अपनी ज़िंदगी में रातों-रात कोई बड़ा बदलाव करने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि सोने, हिलने-डुलने और खाने-पीने की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके दिल की सेहत को सचमुच बेहतर बनाया जा सकता है।

टॅग्स :हेल्थ टिप्सहार्ट अटैक (दिल का दौरा)
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