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पायल तड़वी मामला: आरोपियों की अपील पर बंबई HC शुक्रवार को सुनाएगा फैसला, आरोपी डॉक्टरों ने PG की पढ़ाई करने की मांगी है इजाजत

By भाषा | Updated: February 20, 2020 17:49 IST

पायल तड़वी खुदकुशी मामला: पिछले साल अगस्त में, तीन डॉक्टरों-हेमा आहुजा, भक्ति मेहर और अंकिता खंडेलवाल को जमानत देते हुए उच्च न्यायालय ने उन्हें बीवाईएल नायर अस्पताल में प्रवेश नहीं करने का निर्देश दिया था, जहां तड़वी ने अपने छात्रावास के कमरे में खुदकुशी की थी।

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ठळक मुद्देपायल तड़वी को खुदकुशी के लिए उकसाने की आरोपी तीन वरिष्ठ महिला डॉक्टरों की अपील पर कोर्ट कल फैसला सुनाएगा।सुसाइड नोट में तड़वी ने तीन डॉक्टरों को अपने उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार ठहराया था। 

बंबई उच्च न्यायालय ने कहा कि महाराष्ट्र में अपनी कनिष्ठ सहकर्मी पायल तड़वी को खुदकुशी के लिए उकसाने की आरोपी तीन वरिष्ठ महिला डॉक्टरों की अपील पर वह शुक्रवार को फैसला सुनाएगा। इन आरोपी डॉक्टरों ने सरकारी बीवाईएल नायर अस्पताल से अपनी स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने की इजाजत मांगी है।

पिछले साल अगस्त में, तीन डॉक्टरों.... हेमा आहुजा, भक्ति मेहर और अंकिता खंडेलवाल को जमानत देते हुए उच्च न्यायालय ने उन्हें बीवाईएल नायर अस्पताल में प्रवेश नहीं करने का निर्देश दिया था, जहां तड़वी ने अपने छात्रावास के कमरे में खुदकुशी की थी। अदालत ने मुकदमे की सुनवाई के खत्म होने तक तीनों आरोपियों के मेडिकल लाइसेंस भी निलंबित कर दिये थे।

तीन आरोपियों के वकील ए पोंडा ने न्यायमूर्ति साधना जाधव की एकल पीठ से बृहस्पतिवार को कहा कि तीनों डॉक्टरों को स्त्रीरोग-विज्ञान में स्नातकोत्तर का अंतिम वर्ष पूरा करना है, इसलिए उन्हें अस्पताल में प्रवेश की जरूरत है। विशेष लोक अभियोजक राजा ठाकरे ने उनकी अपील का विरोध करते हुए कहा कि मामले के कई गवाह अब भी अस्पताल में काम कर रहे हैं।

पोंडा ने कहा कि अदालत अस्पताल को, तीन डॉक्टरों को अस्पताल के स्त्रीरोग-विज्ञान विभाग की दूसरी इकाई में स्थानांतरित करने का निर्देश दे सकती है ताकि वे गवाहों से बात नहीं कर सकें। न्यायमूर्ति जाधव ने कहा कि चूंकि अदालत को मामले की गंभीरता का पता है, तो किसी की भी शिक्षा को रोकना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा, “ यह सही है कि पीड़िता ने अपनी जिंदगी और पढ़ने का अधिकार गंवाया है लेकिन हम आरोपियों को भी उनकी पढ़ाई पूरी करने से नहीं रोक सकते।”

अदालत ने कहा, “ हमारा समाज ‘आंख के बदले आंख के सिद्धांत पर नहीं चलता है। उन्हें (आरोपियों को) भी उत्पीड़न का सामना नहीं करना चाहिए।” तड़वी बीवाईएल नायर अस्पताल में स्नातकोत्तर के द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। उन्होंने 22 मई 2019 को अस्पताल परिसर में स्थित छात्रावास के अपने कमरे में खुदकुशी कर ली थी। सुसाइड नोट में तड़वी ने तीन वरिष्‍ठ डॉक्टरों को अपने उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार ठहराया था। 

टॅग्स :बॉम्बे हाई कोर्ट
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