नासिक: जालसाज अशोक खरात के मामले में जांच एजेंसियों ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है और विशेष जांच दल (एसआईटी) ने उसकी कथित 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति की गहन जांच की है। खरात से संबंधित संपत्ति दस्तावेजों को जब्त करने के साथ-साथ बैंक खाते को भी सील कर दिया गया है। जांच फिलहाल इस संपत्ति के स्रोत का पता लगाने पर केंद्रित है। विशेष जांच दल ने खरात और उनके परिवार के नाम पर मौजूद जमीन, भूखंड, फ्लैट, व्यावसायिक परिसर और वाहनों जैसी सभी संपत्तियों की जानकारी मांगी है। राज्य भर में उन्होंने कितना और कहाँ निवेश किया है।
इसकी जानकारी जुटाने के लिए पंजीकरण विभाग की मदद ली जा रही है। धोखाधड़ी करने वाले अशोक खरात के करोड़ों के वित्तीय 'व्यापार' को देखते हुए अब संकेत मिल रहे हैं कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), विदेशी मुद्रा विभाग (फॉरेक्स) और सीमा शुल्क विभाग भी उसके पीछे पड़ने वाले हैं। ऐसा माना जा रहा है कि खरात के लेन-देन से संबंधित दस्तावेज अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंपे जाएंगे।
फॉरेक्स विभाग उसकी विदेश यात्राओं और विदेशी मुद्रा लेन-देन की जांच करेगा और यह भी पता लगाएगा कि क्या उसने तुर्की से लाए गए फर्नीचर जैसी अन्य वस्तुओं पर सीमा शुल्क का भुगतान किया था। उनकी इस चौंका देने वाली संपत्ति का खुलासा अब रियल एस्टेट, निवेश और अन्य वित्तीय लेन-देन में उनके प्रावधानों के रूप में हो रहा है।
चूंकि यह राशि बहुत बड़ी है, इसलिए दस्तावेज ईडी को सौंपे जाएंगे। खरात का पिस्टल लाइसेंस रद्द; कारतूस मामले में जांच तेज पुलिस सूत्रों ने बताया कि जालसाज बाबा अशोक खरात का पिस्टल लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। प्रशासन ने इस हथियार के दुरुपयोग को लेकर संदेह के चलते उनका पिस्टल लाइसेंस रद्द किया है।
मंत्री गिरीश महाजन ने राज्य में चल रहे खरात मामले को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा किया है। नासिक में गिरीश महाजन ने दावा किया, "खरात के काले कारनामे अब सामने आए हैं, लेकिन हमें इस मामले की जानकारी सिर्फ दो महीने पहले ही मिली थी।" इस मामले की गंभीरता को समझते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सही कदम उठाए हैं।
उन्होंने यह भी विश्वास जताया है कि खरात अब इस जाल से नहीं निकल पाएगा। गिरीश महाजन गुरुवार को नासिक स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने मामले की जांच की दिशा और राजनीतिक आरोपों पर स्पष्टीकरण दिया। गिरीश महाजन ने बताया कि खरात की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दो महीने पहले मिली थी।
इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को तुरंत सूचित किया गया। प्रशासन और सरकार ने इस मामले में कार्रवाई की रणनीति बड़ी सावधानी से तैयार की। इसीलिए अब सबूतों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है और खरात को बचाने की कोई उम्मीद नहीं बची है। विपक्ष ने खरात मंदिर को वित्तीय सहायता देने के लिए पूर्व मंत्री जयकुमार रावल को निशाना बनाया था।
महाजन ने इस मामले में रावल का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अक्सर, भक्त या जन प्रतिनिधि किसी धार्मिक स्थल की मदद करते समय आस्था या विकास कार्यों के लिए ऐसा करते हैं। उस पिता या दादा की पर्दे के पीछे की गतिविधियों के बारे में किसी को कुछ नहीं पता। तत्कालीन मंत्री जयकुमार रावल ने तो केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में सहायता प्रदान की थी। उन्हें पहले से कैसे पता चल सकता था कि खरात भविष्य में ऐसा कुछ करेगा?