Madhya Pradesh bhopal Indore Jailor transferred after pictures of Honey Trap scandal with woman accused go viral | इंदौरः हनी ट्रैप कांड की महिला आरोपी के साथ तस्वीरें वायरल होने के बाद जेलर का तबादला
वायरल होने के बाद अधिकारी का शुक्रवार को तबादला कर दिया गया। (file photo)

Highlightsमुख्य आरोपियों में शामिल श्वेता विजय जैन (40) के साथ कुलश्रेष्ठ की कुछ तस्वीरें हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं।कुर्सी पर बैठे नजर आते हैं, जबकि 40 वर्षीय महिला उनके पास खड़ी होकर उनसे बातचीत करती दिख रही हैं। ड्राइवर को भोपाल और इंदौर से सितंबर 2019 में गिरफ्तार किया गया था।

इंदौरः मध्य प्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रैप कांड से जुड़े मामले में जिला जेल में बंद 40 वर्षीय महिला आरोपी के साथ जेलर की बातचीत की तस्वीरें वायरल होने के बाद अधिकारी का शुक्रवार को तबादला कर दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि जिला जेल के जेलर कृष्ण कुमार कुलश्रेष्ठ को भोपाल में केंद्रीय जेल का उपाधीक्षक बनाया गया है। सरकारी आदेश के मुताबिक यह तबादला "प्रशासनिक आधार पर" भोपाल केंद्रीय जेल में उपाधीक्षक के खाली पद पर तत्काल प्रभाव से किया गया है।

हनी ट्रैप कांड के मुख्य आरोपियों में शामिल श्वेता विजय जैन (40) के साथ कुलश्रेष्ठ की कुछ तस्वीरें हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं। इन तस्वीरों में वह जेल के महिला वॉर्ड में बने वीडियो कॉन्फ्रेंस कक्ष के बाहर बरामदे में कुर्सी पर बैठे नजर आते हैं, जबकि 40 वर्षीय महिला उनके पास खड़ी होकर उनसे बातचीत करती दिख रही हैं।

अधिकारियों ने बताया कि जेल विभाग इन तस्वीरों के पीछे कारागार स्टाफ के ही किसी व्यक्ति का हाथ होने का संदेह जताते हुए मामले की जांच का आदेश पहले ही दे चुका है। जेल विभाग के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) संजय पांडेय ने बृहस्पतिवार को जिला जेल के दौरे के बाद "पीटीआई-भाषा" से कहा था, "वायरल तस्वीरों में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है क्योंकि सभी जेलरों का दायित्व होता है कि वे हर रोज जेल के सभी वॉर्डों का भ्रमण कर इंतजाम का जायजा लें।"

उन्होंने बताया कि मामले की जांच इन बिंदुओं पर केंद्रित है कि हनी ट्रैप कांड की विचाराधीन कैदी के साथ जिला जेल के तत्कालीन जेलर की बातचीत की तस्वीरें किस व्यक्ति ने गुप्त रूप से खींचीं और किस व्यक्ति ने पहली बार इन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। श्वेता विजय जैन समेत हनी ट्रैप गिरोह की पांच महिलाओं और उनके ड्राइवर को भोपाल और इंदौर से सितंबर 2019 में गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने इस मामले में एक स्थानीय अदालत में 16 दिसंबर 2019 को पेश आरोप पत्र में कहा था कि यह संगठित गिरोह मानव तस्करी के जरिये भोपाल लायी गयी युवतियों के इस्तेमाल से धनवान लोगों और ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों को अपने जाल में फांसता था। फिर अंतरंग पलों के खुफिया कैमरे से बनाये गये वीडियो, सोशल मीडिया चैट के स्क्रीनशॉट आदि आपत्तिजनक सामग्री के आधार पर उन्हें ब्लैकमेल करता था। 

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