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बिहारः बाढ़ प्रभावित इलाकों की बेटियों पर तस्करों की नजर, लोगों की खरीद-फरोख्त का धंधा जोरों पर

By एस पी सिन्हा | Updated: October 5, 2019 16:04 IST

बिहार में सुशासन के दावों के बीच सामान की तरह लोगों की खरीद-फरोख्त का धंधा यहां जोरों पर है जारी। बाढ़ प्रभावित इलाकों की बेटियों पर है तस्करों की नजर... 

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ठळक मुद्दे बिहार में पिछले पांच सालों के दौरान 1742 लोगों का बचाया गया।मानव तस्करी के दोषी 1287 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

बिहार सरकार भले ही सुशासन का कितना भी दावा करे लेकिन हकीकत कुछ और ही है. यहां मानव का ही मोल नहीं है तो विकास किस बात का. मानव के मोल की बात करें तो यहां सामान की तरह लोगों की खरीद-फरोख्त का धंधा जोरों पर हैं. बिहार के कोसी और सीमांचल समेत मधेपुरा में मानव तस्करी का बड़ा रैकेट चल रहा है. बिहार में पिछले पांच सालों के दौरान 1742 लोगों का बचाया गया और मानव तस्करी के दोषी 1287 लोगों को गिरफ्तार किया गया. ये बात खुद सरकार के आंकड़े बता रहे हैं. 

एक माह पूर्व पुरैनी की एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसे 55 हजार रुपये में मुंबई में बेच दिया गया था. अपहरणकर्ता की गिरफ्तारी के बाद उसकी निशानदेही पर लड़की की बरामदगी की गई. लड़की के बयान के बाद मामले का खुलासा हुआ. बाढ प्रभावित कोसी इलाके की अधिकांश बेटियों की यही दशा है. उत्तर बिहार में मानव तस्करी का बड़ा रैकेट चल रहा है. गरीबों की बेटी पर मानव तस्कर की पैनी नजर है. शादी के नाम पर लड़कियों की खरीद-फरोख्त होती है और उसे देह व्यापार में धकेल दिया जाता है. स्थानीय अपराधियों के संरक्ष्ण में मानव तस्करी ये बड़ा खेल चल रहा है. 

कोसी में लड़कियों को बहला-फुसलाकर या अपहरण कर उन्हें बेचने के लिए एक संगठित गिरोह काम कर रहा है. गरीब तबके की बेटियों को राजस्थान, पंजाब व हरियाणा ले जाकर बेचा जा रहा है. सूत्रों की मानें तो 40 से 50 हजार रुपये में लड़कियों का सौदा किया जाता है. मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा आदि इलाकों की लड़कियों को पहले शादी के नाम पर फुसलाया जाता है. इसके बाद इन लड़कियों को दूसरे शहरों में बेच दिया है. ऐसे कई मामले जिले में दर्ज हैं. मधेपुरा जिला में गरीबों की बेटियों पर मानव तस्कर ने अपनी खतरनाक नजरें गड़ा रखी हैं. इस गोरख धंधे की शुरुआत दलालों के माध्यम से बाल विवाह से होती है. बाद में हरियाणा, पंजाब, उतरप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे महानगरों में देह व्यापार को लेकर मोटी रकम के सहारे बेच दी जाती है. 

बिहार में झूठी शादी करके मानव तस्करी के मामले आम हैं. खासतौर पर सीमांचल यानी पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया जिले के ग्रामीण हिस्सों में. जहां गरीबी, प्राकृतिक आपदा और लड़की की शादी से जुड़े खर्चों के चलते लड़कियों को शादी के नाम पर बेच दिया जाता है. बिहार से सस्ते श्रम, देह व्यापार, मानव अंग और झूठी शादी के लिए मानव तस्करी होती है. बीते एक दशक में मानव तस्करी के कुछ 753 मामले पुलिस ने दर्ज किए. 2274 मानव तस्करों की गिरफ्तारी हुई. 1049 महिला और 2314 पुरुषों को मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया गया. 

ये गैंग मां-बाप को लालच देते हैं और वो पैसे के लिए ऐसी शादियों के लिए सहमत हो जाते हैं. बाद में कई लड़कियों की री-ट्रैफिकिंग भी हो जाती है. ये पूरी प्रक्रिया मांग और आपूर्ति की है. बिहार का लिंगानुपात 918 है जबकि सीमांचल का 927. यही वजह है कि जिन राज्यों में लिंगानुपात कम है, उनके लिए सीमांचल की लड़कियां आसान शिकार हैं.

उदाहरण के रूप में मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज की खुशबू की शादी पिछले साल मुंबई के एक लड़के से हुई थी. खुशबू के मुंबई जाने के एक सप्ताह बाद तक तो उससे बात होती रही, फिर उसका फोन बंद हो गया. मुंबई जाने पर भी किसी से मुलाकात नहीं हुई. वहीं, गम्हिरया की सोनी की शादी भी पिछले साल हुई थी. लड़का पंजाब का था. वह भी गायब है. आलमनगर की रोशनी व उदाकिशुनगंज की शबनम भी शादी के बाद गायब है. लड़का बाहरी था, शादी किसी दूसरे के माध्यम से की गई थी. ऐसे में पुलिस का मानना है कि इन मामलों में अभिभावकों को सतर्कता बरतने की जरूरत है. बिना जांच-पडताल के किसी को बेटी नहीं सौंपनी चाहिए. शादी की बात नहीं बनने पर कई बार लड़कियों का अपहरण भी कर लिया जाता है. 

कई मामलों में तो लड़कियों का पता भी नहीं चल पाता है. वहीं, बिहार विधान परिषद के पिछले सत्र के दौरान भाजपा विधायक रजनीश कुमार द्वारा पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए समाज कल्याण मंत्री ने बताया था कि जनवरी, 2011 से नवम्बर 2016 तक रेस्क्यु दल द्वारा कुल 1742 लोगों को बचाया गया, जिनमें 1001 पुरुष एवं 741 महिलायें थी. मानव तस्करी के दोषी 1287 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस कार्य के लिए कुल 372 बचाव अभियान चलाया गया. यह आंकड़ा था जनवरी 2011 से नवम्बर 2016 तक का. 

उन्होंने बताया था कि मानव तस्करी रोकने एवं पीड़ितों के पुनर्वास के लिए 12 दिसंबर 2008 से पूरे राज्य में अस्तित्व नामक योजना चलाई जा रही है. उन्होंने बताया था कि इन समितियों द्वारा समय-समय पर बैठक कर मानव तस्करी विरोधी कार्यों की समीक्षा कर कार्रवाई की जाती है. पुलिस उपाधीक्षक की अध्यक्षता में मानव तस्करी विरोधी इकाई सभी 44 पुलिस जिलों (रेल जिला सहित) में गठित है जिसके द्वारा छपामारी और बचाव का कार्य किया जा रहा है.

टॅग्स :बिहारमानव तस्करी
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