नई दिल्लीः दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को 2026-27 के लिए 1.03 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जिसमें बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने, शासन में सुधार और कल्याणकारी उपायों की घोषणा की गई। इसे "ग्रीन बजट" बताते हुए उन्होंने कहा कि कुल बजट का 21% पर्यावरण संरक्षण के लिए आरक्षित किया जाएगा। भाषण में गुप्ता ने कहा कि "ट्रिपल-इंजन सरकार" के तहत दिल्ली तेजी से प्रगति कर रही है, वहीं उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए विकास की धीमी गति के लिए "मुफ्तखोरी की संस्कृति" और "खराब शासन" को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं का आह्वान करते हुए कहा, "दिल्ली की एक विशिष्ट पहचान है - बार-बार गिरने के बावजूद यह उठती रहती है।"
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "आप की पिछली सरकार द्वारा अधूरे छोड़े गए सात आईसीयू अस्पतालों को पूरा किया जाएगा, इसके लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।" दिल्ली सरकार का लक्ष्य छात्रों के लिए मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाना है, स्नातक स्तर की सीटों में 820 और स्नातकोत्तर सीटों में 762 की वृद्धि की जाएगी।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि महिला एवं बाल विकास के लिए 7,406 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं; बसों में महिलाओं के मुफ्त सफर के लिए 406 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी बताया कि होली और दिवाली पर प्रत्येक व्यक्ति को एक-एक एलपीजी सिलेंडर मुफ्त देने के लिए 260 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
रेखा गुप्ता सरकार ने शहरी विकास विभाग के लिए 7,887 करोड़ रुपये और दिव्यांगजन विभाग के लिए 5,921 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। रेखा गुप्ता की सरकार ने ओवरहेड बिजली के तारों को भूमिगत करने के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इस बात पर चिंता जताई कि "मुफ्त सुविधाओं की संस्कृति" ने विकास दर को प्रभावित किया है।
साथ ही उन्होंने कहा कि 2018 से 2020 के बीच राजस्व में गिरावट आई है। बजट में 74,000 करोड़ रुपये के कर राजस्व का अनुमान है, जबकि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के लिए 11,666 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय देश में तीसरी सबसे अधिक है।