जम्मूः कश्मीर के मेडिकल छात्र ईरान की आर्मेनिया और अजरबैजान से लगी जमीनी सीमाओं पर फिर से फंस गए हैं, क्योंकि ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। छात्रों ने भारत सरकार से अपने तत्काल प्रत्यावर्तन (वापसी) के लिए जरूरी और प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने दो दिन पहले बताया था कि संघर्ष शुरू होने के बाद से उसने दो जमीनी रास्तों से 1,170 से ज्यादा लोगों के बाहर निकलने में मदद की है। एक अप्रैल को मीडिया को जानकारी देते हुए उसने बताया कि 1,171 भारतीय नागरिकों, जिनमें 818 छात्र शामिल हैं।
ईरान छोड़ने की अनुमति दी गई थी; इनमें से 977 आर्मेनिया में प्रवेश कर गए और 194 अजरबैजान चले गए। मंत्रालय के बकौल, वहां से, भारत के इन निवासियों को कमर्शियल या विशेष उड़ानों से वापस लाया गया है। हालांकि, जमीन पर मौजूद छात्र एक ज्यादा गंभीर तस्वीर पेश कर रहे हैं। जो लोग कोम से अजरबैजान सीमा तक लाए गए हैं।
उनका कहना है कि भारतीय नागरिकों के निकलने की रफ्तार लगभग रुक सी गई है। एक छात्र ने वीडियो काल पर कश्मीर में अपने अभिभावकों को बताया कि हममें से सैकड़ों लोग यहां फंसे हुए हैं; हमें नहीं पता कि आगे क्या होगा और सीमा पर क्या चल रहा है, इस बारे में भी हमें कोई जानकारी नहीं है। उसने बताया कि अजरबैजान के अधिकारी रोजाना सिर्फ दस छात्रों के कागजात ही जांच पा रहे थे।
अब तो वह धीमी रफ्तार भी पूरी तरह से रुक गई है। उसने कहा कि पिछले एक हफ्ते से किसी को भी सीमा चौकी से गुजरने की अनुमति नहीं दी गई है। कई अन्य छात्रों ने भी इस रुकावट की पुष्टि की। एक अन्य छात्र ने कहा कि इससे हममें बहुत ज्यादा घबराहट फैल रही है। हमें नहीं पता कि वे इस चौकी को दोबारा कब खोलेंगे।
छात्र प्रतिनिधियों ने प्रक्रियागत देरी और पाबंदियों की ओर ध्यान दिलाया है, जिनके कारण लंबे समय से लोगों की आवाजाही लगभग ठप सी हो गई है। आल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डा मोहम्मद मोमिन खान ने तेहरान स्थित भारतीय दूतावास से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।