लखनऊः उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 9 फरवरी से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में 11 फरवरी को विधानमंडल में अपना दसवां बजट पेश करेगी. राज्य में होने वाले पंचायत चुनाव और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों की झलक भी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में देखने को मिलेगी. चर्चा है कि 11 फरवरी को पेश होने वाले बजट का आकार इस बार करीब 9 लाख करोड़ रुपए का होगा. इस बजट में योगी सरकार युवा, बुजुर्ग, महिलाओं और किसानों के लिए कई ऐलान करेगी.
वित्त विभाग के अफसरों के मुताबिक इस बार के बजट में करीब 2.25 लाख करोड़ रुपए प्रदेश सरकार विकास कार्यों पर खर्च करने के लिए देने की तैयारी में हैं. बजट में सरकार का मुख्य ध्यान प्रदेश के विकास और आम लोगों की सुविधाओं पर रहेगा, खासतौर पर सड़क, पुल, शहरों के विकास और बुनियादी ढांचे पर बड़ा खर्च किए जाने की संभावना है.
सबकी खुशहाली पर केंद्रित होगा बजट: योगी
पिछले वित्तीय वर्ष में योगी सरकार ने 8,65,079.46 करोड़ रुपए का बजट सदन में पेश किया था. इसके बाद दो बार अनुपूरक बजट लाए गए. जिसके चलते वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट का कुल आकार 8,65,079.46 करोड़ रुपए हो गया.अब 11 फरवरी को आने वाला बजट इससे भी बड़ा होगा और इसमें जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा.
सूबे के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना का कहना है कि सरकार युवाओं के रोजगार, किसानों की मदद और गरीब व जरूरतमंद वर्ग के लिए चलाई जा रही योजनाओं के लिए अच्छी खासी रकम बजट में रख सकती है. साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को और मजबूत करने की तैयारी है, ताकि हर नागरिक तक इसका लाभ सही तरीके से पहुंच सके.
बजट में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी ध्यान रहेगा. वित्त विभाग के अफसरों का कहना है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले लाए जाने वाले इस बजट का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर, 15 प्रतिशत शिक्षा, 12 प्रतिशत कृषि, 8 प्रतिशत स्वास्थ्य और 5 प्रतिशत सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर खर्च किया जाएगा.
सरकार का लक्ष्य विकास के साथ-साथ वित्तीय संतुलन बनाए रखना भी है. मुख्यमंत्री योगी भी यह कह चुके हैं कि सरकार लोक कल्याणकारी तथा सबकी खुशहाली पर बजट लाएगी और यह बजट सबकी खुशहाली पर केंद्रित होगा.
बीते साल का पूरा बजट खर्च नहीं कर पायी सरकार
योगी सरकार भले ही करीब नौ लाख करोड़ रुपए का बजट लाने की तैयारी कर रही है, लेकिन बीते वित्तीय वर्ष में लाये गए कुल 8,65,079.46 करोड़ रुपए के बजट को पूरी तरह अभी तक खर्च नहीं कर सकी है. जबकि उस बजट को आए हुए 11 माह हो चुके हैं.
इन 11 महीनों में सरकार के स्वीकृत बजट 8,65,079.46 करोड़ रुपए में से महज 4,70,835.97 करोड़ रुपए (54.42 प्रतिशत) ही विभागों को जारी किया गया. विभागों को जारी किए गए 4,70,835.97 करोड़ रुपए में से 428495.95 करोड़ रुपए की अब तक खर्च किए गए हैं.
अब इसे लेकर सदन में सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देना होगा. यह बताना होगा की हर साल बजट का आकार बढ़ रहा है लेकिन सरकार आधा बजट भी क्यों नहीं खर्च का पा रही है. जाहिर है कि बजट खर्च के इन आंकड़ों के चलते योगी सरकार को जवाब देना आसान नहीं होगा.