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Repo Rate Cut: रेपो दर को 0.5 प्रतिशत घटाकर 5.5 प्रतिशत?, होम और कार लोन होगा सस्ता, जानें मुख्य बातें

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: June 6, 2025 11:22 IST

Repo Rate Cut: रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं।

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ठळक मुद्दे छह सदस्यीय समिति ने रेपो दर में 0.50 प्रतिशत कटौती करने का निर्णय किया है।एमपीसी में आरबीआई के तीन सदस्य और सरकार द्वारा नियुक्त तीन बाहरी सदस्य शामिल हैं।मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 0.25-0.25 प्रतिशत की कटौती की थी।

मुंबईः महंगाई दर में नरमी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को घरेलू अर्थव्यवस्था को गति देने के मकसद से प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.5 प्रतिशत घटाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया है। वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के बीच केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है। द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘‘मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की छह सदस्यीय समिति ने रेपो दर में 0.50 प्रतिशत कटौती करने का निर्णय किया है।’’ रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं।

वैश्विक स्तर पर कमजोर आर्थिक परिदृश्य के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।

वैश्विक स्थिति नाजुक, विभिन्न देशों में आर्थिक परिदृश्य कमजोर बना हुआ है: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कहा।

मौद्रिक नीति समिति का मानना ​​है कि ब्याज दर में कटौती से आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार उम्मीद के अनुरूप।

नकदी के ‘संतोषजनक’ स्तर पर होने से बैंक ग्राहकों को कम ब्याज दर का लाभ तेजी से दे सकेंगे।

आरबीआई ने प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.50 प्रतिशत घटाकर 5.50 प्रतिशत किया।

भारतीय अर्थव्यवस्था निवेशकों के लिए अपार अवसर प्रदान करती है: आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा।

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान चार प्रतिशत से घटाकर 3.7 प्रतिशत किया गया।

काफी तेजी से रेपो दर में एक प्रतिशत की कटौती के बाद अब मौद्रिक नीति में वृद्धि को समर्थन देने के लिए सीमित गुंजाइश।

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा, भू-राजनीतिक तनाव एवं मौसम संबंधी अनिश्चितताएं बाधाएं उत्पन्न कर सकती हैं।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि अब एमपीसी भविष्य की नीति तैयार करने के लिए आय के आंकड़ों और उभरते परिदृश्य का सावधानीपूर्वक आकलन करेगी।

मौद्रिक नीति समिति का मानना ​​है कि ब्याज दर में कटौती से आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

आरबीआई ने नकद आरक्षित अनुपात एक प्रतिशत घटाने की घोषणा की, इससे बैंकों के पास 2.5 लाख करोड़ रुपये की नकदी बढ़ेगी।

विदेशी मुद्रा भंडार 691.5 अरब अमेरिकी डॉलर पर, 11 महीने से अधिक की आयात जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त। बाह्य क्षेत्र मजबूत बना हुआ है।

शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में गिरावट के बावजूद भारत आकर्षक गंतव्य बना हुआ है।

वित्त वर्ष 2024-25 में चालू खाते का घाटा (कैड) कम रहा; 2025-26 में भी प्रबंधन के स्तर पर बना रहेगा।

आरबीआई मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिये इस दर का उपयोग करता है। रेपो दर में कमी करने का मतलब है कि मकान समेत विभिन्न कर्जों पर मासिक किस्त (ईएमआई) में कमी आ सकती है। उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने इससे पहले इस साल फरवरी और अप्रैल की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 0.25-0.25 प्रतिशत की कटौती की थी।

एमपीसी में आरबीआई के तीन सदस्य और सरकार द्वारा नियुक्त तीन बाहरी सदस्य शामिल हैं। इसके साथ, आरबीआई ने 2025-26 के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। वहीं चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को चार प्रतिशत से घटाकर 3.7 कर दिया गया है।

टॅग्स :रेपो रेटसंजय मल्होत्राभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई)मुंबई
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