नागपुर: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर स्थानीय उद्याेग जगत पर भी हाेने लगा है. खासताैर पर प्लास्टिक इंडस्ट्री पर दाेहरी मार पड़ रही है. एक ओर प्लास्टिक उद्याेग काे ‘दाना’ यानी पाॅलिमर नहीं मिल पा रहा है और यदि मिल भी रहा है ताे इसके दाम आसमान छू रहे हैं. वहीं, इंडस्ट्रीयल गैस की आपूर्ति भी ठप हाेने से उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हाे रहा है. इस सबके बीच महंगी बिजली से आर्थिक बाेझ पहले से पड़ रहा है. ऐसे में यदि आगामी कुछ दिनाें तक युद्ध के हालात इसी तरह बने रहे ताे नागपुर सहित विदर्भ के कई प्लास्टिक उद्याेग बंद हाेने की प्रबल आशंका बनी हुई है.
प्लास्टिक उद्योग के जानकाराें के अनुसार इस उद्याेग में रिमोल्डिंग के लिए गैस का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से इंडस्ट्रीयल गैस की आपूर्ति बंद होने से कुछ ही प्लास्टिक उद्याेगाें में गिनती के दिनों की गैस का स्टॉक बचा है. उधर, देश की बड़ी कंपनियों में भी कच्चे तेल की आपूर्ति ठप हाेने से पॉलिमर का उत्पादन प्रभावित हुआ है.
इससे प्लास्टिक उद्याेग पाॅलिमर यानी ‘दाने-दाने’ काे माेहताज हाे रहे हैं. हालत ये है कि पॉलिमर की कीमतें बीते कुछ दिनाें में बेतहाशा बढ़ गई हैं. एक सप्ताह में ही इनका रेट 90 रुपए से बढ़कर 150 रुपए प्रति किलो हो गया है. ब्लैक मार्केट में इसका रेट और अधिक है. नागपुर सहित विदर्भ के प्लास्टिक के तीन हजार कराेड़ रुपए से अधिक के काराेबार पर असर हाे रहा है. उद्याेगाें ने ताे उत्पादन बंद कर दिया है.
‘विदर्भ प्लास्टिक इंडस्ट्रीज एसाेसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राकेश सुराना ने कहा कि ईरान युद्ध की स्थिति और 15 दिन तक जारी रही ताे विदर्भ के 75 फीसदी प्लास्टिक इंडस्ट्री बंद हाेने की आशंका है. पेंट, टायर और अन्य संबंधित उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित हाेंगे.’
‘वीआईए के पूर्व अध्यक्ष एवं आरसी प्लास्टाे के संचालक विशाल अग्रवाल ने कहा कि इंडस्ट्रीयल गैस की आपूर्ति प्रभावित हाेने से माैजूदा स्टाॅक से काम चलाया जा रहा है. ये स्टाॅक ज्यादा दिनाें तक नहीं चलेगा. वहीं, पाॅलिमर के रेट भी काफी बढ़ गए हैं. इससे इंडस्ट्री में पंद्रह प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित हाे रहा है.’