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मूडीज ने कहा- 2019 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8 नहीं 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: August 23, 2019 16:18 IST

पहले इसे 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। कैलेंडर वर्ष 2020 के लिए भी वृद्धि दर के अनुमान को 0.6 प्रतिशत घटाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। पहले इसके 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया था।

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ठळक मुद्देनीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार को ऐसे कदम उठाने की जरूरत है।मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने बयान में कहा कि कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था से एशियाई निर्यात प्रभावित हुआ है।

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने कैलेंडर वर्ष 2019 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है।

पहले इसे 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। कैलेंडर वर्ष 2020 के लिए भी वृद्धि दर के अनुमान को 0.6 प्रतिशत घटाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। पहले इसके 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया था।

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने बयान में कहा कि कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था से एशियाई निर्यात प्रभावित हुआ है। इसके अलावा अनिश्चित वातावरण की वजह से भी निवेश पर असर पड़ा है। 

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार को ऐसे कदम उठाने की जरूरत है जिससे निजी क्षेत्र की कंपनियों की आशंकाओं को दूर किया जा सके और वे निवेश के लिये प्रोत्साहित हों।

आर्थिक नरमी को लेकर चिंता के बीच उन्होंने यह बात कही। उन्होंने वित्तीय क्षेत्र में बने अप्रत्याशित दबाव से निपटने के लिये लीक से हटकर कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि निजी निवेश तेजी से बढ़ने से भारत को मध्यम आय के दायरे से बाहर निकलने में मदद मिलेगी। कुमार ने वित्तीय क्षेत्र में दबाव को अप्रत्याशित बताया।

उन्होंने कहा कि किसी ने भी पिछले 70 साल में ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया जब पूरी वित्तीय प्रणाली में जोखिम है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को ऐसे कदम उठाने की जरूरत है जिससे निजी क्षेत्र की कंपनियों की आशंकाओं को दूर किया जा सके और वे निवेश के लिये प्रोत्साहित हों।’’

उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘कोई भी किसी पर भी भरोसा नहीं कर रहा है ...निजी क्षेत्र के भीतर कोई भी कर्ज देने को तैयार नहीं है, हर कोई नकदी लेकर बैठा है...आपको लीक से हटकर कुछ कदम उठाने की जरूरत है। इस बारे में विस्तार से बताते हुए कुमार ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र में दबाव से निपटने और आर्थिक वृद्धि को गति के लिये केंद्रीय बजट में कुछ कदमों की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। वित्त वर्ष 2018-19 में वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रही जो 5 साल का न्यूनतम स्तर है।

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