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India-EU FTA: मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी, वाइन और दवाइयां, भारत-यूरोपीय संघ समझौते के बाद क्या सस्ता होगा?

By सतीश कुमार सिंह | Updated: January 27, 2026 19:01 IST

India-EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ वैश्विक अर्थव्यवस्था का 25 प्रतिशत हिस्सा हैं। वे विश्व की कुल जनसंख्या का 30 प्रतिशत हिस्सा हैं।

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ठळक मुद्देIndia-EU FTA: आसियान 10 अलग-अलग देशों (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों) का एक समूह है।India-EU FTA: विश्व स्तर पर हुए सबसे बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में से एक है। India-EU FTA: समझौते के लिए बातचीत शुक्रवार (23 जनवरी) को संपन्न हुई।

नई दिल्लीः भारत और यूरोपीय संघ के बीच 18 साल के लंबे इंतजार के बाद मुक्त व्यापार समझौते पर मुहर लग गई। कई लोगों को खुशी होगी, जिनमें वाइन और व्हिस्की के पारखी और ऑटोमोबाइल के शौकीन भी शामिल हैं। भारतीय वस्तुओं के लिए यूरोपीय बाजार खुल जाएंगे। आयातित यूरोपीय वस्तुओं पर शुल्क कम होने से वे भारत में सस्ती हो जाएंगी। मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी यूरोपीय कारों पर वर्तमान में 100 प्रतिशत से अधिक आयात शुल्क लगता है। 15000 यूरो (लगभग 16 लाख रुपये) से अधिक कीमत वाली कारों पर अब 40 प्रतिशत शुल्क लगेगा। यह शुल्क और कम होकर 10 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे इन कारों की कीमतों में लाखों की गिरावट आएगी। कदम तेजी से बढ़ते भारतीय ऑटो उद्योग को संरक्षण देने के लिए उठाया गया है।

भारत-यूरोपीय संघ के बीच एफटीए सबसे बड़ा व्यापार समझौता

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को ‘सबसे बड़ा समझौता’ कहा जा रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, यह विश्व स्तर पर हुए सबसे बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में से एक है। चीन-आसियान व्यापार समझौता भी सबसे बड़े समझौतों में से एक है लेकिन आसियान 10 अलग-अलग देशों (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों) का एक समूह है।

समझौते के लिए बातचीत शुक्रवार (23 जनवरी) को संपन्न

यह यूरोपीय संघ की तरह सीमा शुल्क संघ नहीं है। आसियान के सदस्य ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमा, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम हैं। भारत का भी इस समूह के साथ वस्तुओं का मुक्त व्यापार समझौता है। अधिकारी ने कहा, ‘‘ इसलिए इस लिहाज से यह बहुत बड़ी बात है।’’ समझौते के लिए बातचीत शुक्रवार (23 जनवरी) को संपन्न हुई।

विश्व की कुल जनसंख्या का 30 प्रतिशत हिस्सा

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को इसे मंजूरी दी थी। समझौते का पैमाना निम्नलिखित आंकड़ों में झलकता है:- इस समझौते का असर करीब 1.9 अरब लोगों पर होगा (जिसमें भारत के 1.4 अरब और यूरोपीय संघ में करीब 50 करोड़ लोग शामिल हैं)। भारत और यूरोपीय संघ वैश्विक अर्थव्यवस्था का 25 प्रतिशत हिस्सा हैं। वे विश्व की कुल जनसंख्या का 30 प्रतिशत हिस्सा हैं।

भारत और यूरोपीय संघ का हिस्सा 11,000 अरब अमेरिकी डॉलर

यूरोपीय संघ का कुल वस्तु आयात 2024 में 6,900 अरब अमेरिकी डॉलर था। यूरोपीय संघ का सेवा आयात 2,900 अरब अमेरिकी डॉलर था। भारत का कुल वस्तु आयात 2024 में लगभग 750 अरब अमेरिकी डॉलर था। दोनों मिलकर वैश्विक व्यापार का 11 से 12 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। कुल 33,000 अरब अमेरिकी डॉलर के वैश्विक व्यापार में से भारत और यूरोपीय संघ का हिस्सा 11,000 अरब अमेरिकी डॉलर है।

2024-25 में कुल व्यापार 190 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा

द्विपक्षीय व्यापार, भारत-यूरोपीय संघ संबंधों का आधार स्तंभ है। 2024-25 में कुल व्यापार 190 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा। भारत ने यूरोपीय संघ को 75.85 अरब अमेरिकी डॉलर का सामान तथा सेवा क्षेत्र में 30 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया। दूसरी ओर यूरोपीय संघ ने भारत को 60.68 अरब अमेरिकी डॉलर का सामान तथा सेवा क्षेत्र में 23 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया।

भारत में 6,000 यूरोपीय संघ की कंपनियां मौजूद

भारत को 2024-25 में 15.17 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष प्राप्त हुआ। यूरोपीय संघ भी भारत में एक प्रमुख निवेशक है। अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक यूरोपीय संघ से भारत में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 117.4 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। भारत में 6,000 यूरोपीय संघ की कंपनियां मौजूद हैं।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में से 16.5 प्रतिशत से अधिक एफडीआई का योगदान रहा

सभी देशों से कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में से 16.5 प्रतिशत से अधिक एफडीआई का योगदान रहा। अप्रैल 2000 से मार्च 2024 तक यूरोपीय संघ को भारत से करीब 40.04 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) हुआ। आर्थिक आकार एवं नियामक दायरे, दोनों ही दृष्टि से यह व्यापार समझौता भारत का अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता होगा।

चूंकि यूरोपीय संघ एक सीमा शुल्क संघ है, इसलिए यह समझौता भारत को एक ही ढांचे के तहत सभी 27 यूरोपीय संघ देशों में तरजीही पहुंच प्रदान करेगा। यूरोपीय संघ में फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, फिनलैंड, हंगरी, आयरलैंड, नीदरलैंड, पुर्तगाल, पोलैंड, डेनमार्क और स्वीडन शामिल हैं। अधिकारी ने कहा, ‘‘ इसलिए यदि आप इस व्यापार के पैमाने को देखें, तो यह बहुत बड़ा है।’’

भारत-ईयू एफटीए साझा समृद्धि का खाका, दुनिया में लाएगा स्थिरता: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता वैश्विक भलाई के लिए साझा समृद्धि का एक खाका है। उन्होंने कहा कि यह समझौता ऐसे समय में स्थिरता देगा, जब दुनिया व्यवस्था उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। मोदी भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की वार्ता संपन्न होने के बाद यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा, ''यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है। यह साझा समृद्धि के लिए एक नया खाका है।''

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए समुद्री क्षेत्र और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने में मदद करेगा

उन्होंने आगे कहा कि भारत ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता संपन्न किया है। वैश्विक वातावरण में उथल-पुथल का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ''भारत-ईयू विश्व व्यवस्था को स्थिरता प्रदान करेंगे...। भारत-ईयू सहयोग वैश्विक भलाई के लिए एक साझेदारी है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए समुद्री क्षेत्र और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने में मदद करेगा।

भारत-ईयू एफटीए दो अरब लोगों के बाजार के लिए अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी समझौता

कोस्टा ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए दो अरब लोगों के बाजार के लिए अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी समझौता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-ईयू शिखर सम्मेलन दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत और यूरोपीय संघ भरोसेमंद भागीदारों के रूप में साथ खड़े हैं।

कोस्टा ने यह भी कहा कि ''हम यूक्रेन में संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति कायम करने में मदद के लिए आप (मोदी) पर भरोसा करते हैं।'' वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत-यूरोप साझेदारी उस समय रणनीतिक निर्भरता को कम करेगी, जब वैश्विक व्यापार का तेजी से राजनीतिकरण और हथियार के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

परिधान, रसायन और जूते-चप्पल जैसे कई घरेलू क्षेत्रों को 27 देशों के इस समूह में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा

उन्होंने कहा, ''हम तेजी से असुरक्षित होती दुनिया में अपने लोगों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।'' लेयेन ने कहा कि भारत का उदय हुआ है और यूरोप इससे वास्तव में खुश है। भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए बातचीत पूरी होने की घोषणा की।

एक अधिकारी ने बताया कि इस समझौते के तहत परिधान, रसायन और जूते-चप्पल जैसे कई घरेलू क्षेत्रों को 27 देशों के इस समूह में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। वहीं, यूरोपीय संघ (ईयू) को कार और वाइन के लिए रियायती शुल्क पर भारतीय बाजार तक पहुंच प्राप्त होगी। दो दशकों से अधिक समय तक चली बातचीत के बाद संपन्न हुए इस समझौते को 'अबतक का सबसे बड़ा’ समझौता कहा गया है।

भारत ने यूरोपीय संघ के साथ अपने इतिहास का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता संपन्न किया

यह लगभग दो अरब लोगों का बाजार तैयार करेगा। अधिकारी ने कहा कि वाहन और इस्पात को छोड़कर, भारत के लगभग सभी सामानों (93 प्रतिशत से अधिक) को यूरोपीय संघ में शून्य-शुल्क पहुंच मिलेगी। बाकी छह प्रतिशत से अधिक वस्तुओं के लिए भारतीय निर्यातकों को शुल्क में कटौती और कोटा-आधारित शुल्क रियायतें (जैसे ऑटोमोबाइल के लिए) मिलेंगी।

कुल मिलाकर भारत और ईयू वैश्विक जीडीपी में 25 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार (लगभग 33,000 अरब डॉलर) में एक-तिहाई (लगभग 11,000 अरब डॉलर) का योगदान देते हैं। ईयू के शीर्ष नेताओं उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा के साथ शिखर स्तर की वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत ने यूरोपीय संघ के साथ अपने इतिहास का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता संपन्न किया है। मोदी ने कहा, ''यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है। यह साझा समृद्धि के लिए एक नया खाका है।''

1.4 अरब लोगों के लिए 20,000 अरब डॉलर के ईयू बाजार में विशाल अवसर खोलेगा

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह एक ऐसा समझौता है जो मूल्य के आधार पर भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को बाजार पहुंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता देश के वैश्विक व्यापार जुड़ाव में एक रणनीतिक सफलता है, जो 1.4 अरब लोगों के लिए 20,000 अरब डॉलर के ईयू बाजार में विशाल अवसर खोलेगा।

यूरोपीय संघ इस मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के साथ ही पहले दिन भारत के 90 प्रतिशत सामानों पर आयात शुल्क समाप्त कर देगा। यह समझौता अगले साल की शुरुआत में लागू होने की उम्मीद है। अन्य तीन प्रतिशत वस्तुओं पर शुल्क को सात वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। उम्मीद है कि इस समझौते पर इस साल के अंत में हस्ताक्षर होंगे।

भारत समझौते को लागू करने के पहले दिन यूरोपीय वस्तुओं के केवल 30 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क हटाएगा

इसके 2027 की शुरुआत में लागू होने की संभावना है। अधिकारी ने कहा, ''इस प्रकार ईयू द्वारा भारत को व्यापार मूल्य के 99.5 प्रतिशत हिस्से पर रियायतें दी जा रही हैं।'' दूसरी ओर, यूरोपीय संघ को भारत में दस वर्षों की अवधि में अपने 93 प्रतिशत सामानों के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। भारत समझौते को लागू करने के पहले दिन यूरोपीय वस्तुओं के केवल 30 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क हटाएगा।

कपड़ा, परिधान, समुद्री उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक, रबर, चमड़ा और जूते-चप्पल शामिल

भारत यूरोपीय संघ को व्यापार मूल्य के 3.7 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क रियायतें और कोटा-आधारित कटौती भी दे रहा है। कुल मिलाकर, भारत ईयू को व्यापार मूल्य के 97.5 प्रतिशत पर शुल्क रियायतें दे रहा है। अधिकारी ने बताया कि शुल्क-मुक्त पहुंच पाने वाले प्रमुख भारतीय क्षेत्रों में कपड़ा, परिधान, समुद्री उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक, रबर, चमड़ा और जूते-चप्पल शामिल हैं।

इसके अलावा आधार धातु, रत्न और आभूषण, फर्नीचर, खिलौने और खेल के सामान को भी यह लाभ मिलेगा। इस समय इन क्षेत्रों पर यूरोपीय संघ में शून्य से 26 प्रतिशत तक शुल्क लगता है। भारत ने एफटीए के तहत ईयू की वस्तुओं के लिए भी शुल्क को उदार बनाया है। अधिकारी ने कहा, ''हमारे मामले में, भारत 10 वर्षों में ईयू के लिए आयात शुल्क को घटाकर शून्य कर देगा।

सबसे अच्छे प्रस्तावों में से एक दिया है। उसने 155 उप-क्षेत्रों में 144 को खोल दिया

शुरुआत में शून्य तक की कमी सीमित है। समझौते के लागू होने पर हम अपने व्यापार मूल्य के 30 प्रतिशत तक की कटौती करेंगे। लेकिन धीरे-धीरे, हम अपने कुल द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के 93 प्रतिशत पर शून्य तक पहुंच जाएंगे।'' सेवाओं के मोर्चे पर यूरोपीय संघ ने भारत को अपने अब तक के सबसे अच्छे प्रस्तावों में से एक दिया है। उसने 155 उप-क्षेत्रों में 144 को खोल दिया है।

ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और सरकारी खरीद पर कोई अध्याय नहीं

जबकि भारत उनके लिए 102 उप-क्षेत्र खोल रहा है। अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा छात्रों की आवाजाही को लेकर भी प्रतिबद्धताएं हैं। उन्होंने कहा, ''हमारे पास यूरोपीय संघ से पढ़ाई के बाद कामकाजी वीजा पर भी कुछ प्रतिबद्धताएं हैं।'' वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार के अलावा, एफटीए में डिजिटल व्यापार, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपायों, व्यापार में तकनीकी बाधाओं और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर अध्याय शामिल हैं। इसमें ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और सरकारी खरीद पर कोई अध्याय नहीं है।

सभी पर यूरोपीय संघ व्यापार सौदे के तहत भारत के लिए शुल्क समाप्त कर देगा

यूरोपीय संघ का औसत शुल्क पहले से ही कम है। ये लगभग 3.8 प्रतिशत हैं और व्यापार सौदे के तहत उन्हें भारत के लिए घटाकर 0.1 प्रतिशत कर दिया जाएगा। कुछ क्षेत्रों में शुल्क अधिक हैं। इनमें समुद्री उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक और रबर शामिल हैं। इन सभी पर यूरोपीय संघ व्यापार सौदे के तहत भारत के लिए शुल्क समाप्त कर देगा।

वर्ष 2024 में इन क्षेत्रों से भारत का निर्यात कुल 35 अरब डॉलर था। कार्यान्वयन के पहले दिन 33.5 अरब डॉलर पर शुल्क हटा दिया जाएगा। बाकी पर यह तीन, पांच और सात वर्षों में 'शून्य' हो जाएगा। वाहन क्षेत्र में दोनों पक्षों ने कोटा आधारित शुल्क रियायतों पर बातचीत की है, क्योंकि इस क्षेत्र में यूरोपीय संघ की मांग बहुत आक्रामक है।

देश में 25 लाख रुपये से कम में बिकने वाली हैं, ईयू उन कारों का भारत में निर्यात नहीं करेगा

भारत का वाहन क्षेत्र काफी हद तक छोटी कारों (खुदरा कीमतें 10 लाख रुपये से 25 लाख रुपये) के दबदबे वाला है। इस खंड में यूरोपीय संघ की रुचि बहुत अधिक नहीं है। अधिकारी ने कहा, ''हमने तय किया है कि जो कारें इस देश में 25 लाख रुपये से कम में बिकने वाली हैं, ईयू उन कारों का भारत में निर्यात नहीं करेगा। वे इनका विनिर्माण यहां कर सकते हैं।''

दूसरी ओर 25 लाख रुपये से ऊपर भारत का बाजार सीमित है, लेकिन ईयू की इसमें रुचि अधिक है क्योंकि वे इस खंड में अच्छे विनिर्माता हैं। इस समय वाहन पर भारत का आयात शुल्क 66 प्रतिशत से 125 प्रतिशत तक है। भारत कोटे से बाहर कोई शुल्क कटौती नहीं देगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भारत का कोटा समझौते के पांचवें वर्ष से शुरू होगा।

वस्तुओं पर इस समय 33 प्रतिशत से 150 प्रतिशत की सीमा में शुल्क लगता

ईवी के लिए शुल्क कटौती अलग-अलग खंड में भिन्न होगी। अधिकारी ने कहा, ''पहले साल में कुछ खंड में यह 35 फीसदी और कुछ में 30 फीसदी होगी। फिर यह धीरे-धीरे नीचे जाएगी।'' ईयू की प्रमुख वस्तुओं जिन्हें शुल्क रियायत मिलेगी उनमें वाहन, वाइन, स्पिरिट, बीयर, जैतून का तेल, कीवी और नाशपाती, फलों के रस, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जैसे ब्रेड, पेस्ट्री, बिस्कुट, पास्ता, चॉकलेट, पेट फूड, भेड़ का मांस, सॉसेज और अन्य मांस उत्पाद शामिल हैं। इन वस्तुओं पर इस समय 33 प्रतिशत से 150 प्रतिशत की सीमा में शुल्क लगता है।

ईयू भारतीय ऑटोमोबाइल के लिए चरणबद्ध तरीके से शुल्क समाप्त करेगा

एक अधिकारी ने कहा कि द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता लागू होने के बाद भारतीय बाजार में बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज, लेम्बोर्गिनी, पोर्श और ऑडी जैसी प्रीमियम लक्जरी यूरोपीय कारों के सस्ते होने की संभावना है, क्योंकि भारत इस समझौते के तहत कोटा-आधारित आयात शुल्क रियायतें देगा। ईयू भारतीय ऑटोमोबाइल के लिए चरणबद्ध तरीके से शुल्क समाप्त करेगा।

प्लास्टिक, रसायन, लोहा और इस्पात, तथा फार्मा जैसे ईयू सामानों को भारतीय बाजारों में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी

जबकि भारत ईयू की कारों के लिए शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत कर देगा, जो प्रति वर्ष 2.5 लाख के कोटे के अधीन होगा। समझौते के तहत मशीनरी और इलेक्ट्रिकल उपकरण, विमान और अंतरिक्ष यान, ऑप्टिकल, मेडिकल और सर्जिकल उपकरण, प्लास्टिक, रसायन, लोहा और इस्पात, तथा फार्मा जैसे ईयू सामानों को भारतीय बाजारों में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।

यूरोपीय संघ सालाना लगभग 1.4 अरब डॉलर के टेबल ग्रेप्स का आयात करता

भारत डेयरी (पनीर सहित), सोया मील और अनाज क्षेत्रों में कोई शुल्क रियायत नहीं देगा। यूरोपीय संघ ने भी अपने चीनी, बीफ, मांस और पोल्ट्री क्षेत्रों में कोई छूट नहीं दी है। भारत को यूरोपीय संघ में 'टेबल ग्रेप्स' (खाने वाले अंगूर) के लिए कोटा आधारित शुल्क कटौती मिली है। यूरोपीय संघ सालाना लगभग 1.4 अरब डॉलर के टेबल ग्रेप्स का आयात करता है।

2.5 यूरो से कम की वाइन के लिए कोई रियायत नहीं

अधिकारी ने कहा, ''हमें लगभग 10 करोड़ डॉलर यानी 85,000 टन अंगूरों के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच मिली है।'' भारत सात वर्षों में शुल्क कम करेगा। उच्च मूल्य वाली वाइन पर शुल्क सात वर्षों में 150 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत हो जाएगा। दूसरी ओर 2.5 यूरो से कम की वाइन के लिए कोई रियायत नहीं होगी।

लगभग 80-85 अरब डॉलर का है, बढ़कर 125 अरब डॉलर तक पहुंच सकता

मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार इस समय दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर है। समझौते के लागू होने पर तीन से चार वर्षों के भीतर इसके 200 अरब डॉलर को पार करने की उम्मीद है। इसी तरह सेवाओं का व्यापार, जो वर्तमान में लगभग 80-85 अरब डॉलर का है, बढ़कर 125 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

भारत को अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत के कड़े शुल्क का सामना करना पड़ रहा

इसमें कहा गया कि यह समझौता भारत की ताकत वाले प्रमुख क्षेत्रों जैसे आईटी और आईटीईएस, पेशेवर सेवाओं, शिक्षा, वित्तीय सेवाओं, पर्यटन और निर्माण में ईयू से विस्तृत और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं सुरक्षित करता है। इस समझौते की घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब भारत को अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत के कड़े शुल्क का सामना करना पड़ रहा है।

यूरोपीय संघ को भी ग्रीनलैंड मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा नए शुल्क की धमकी का सामना करना पड़ रहा है। यूरोपीय संघ भारत का 22वां एफटीए भागीदार बन गया है। एनडीए सरकार ने 2014 से मॉरीशस, यूएई, ब्रिटेन, ईएफटीए, ओमान और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौते किए हैं और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते की घोषणा की है। भारत ने 2025 में ओमान और ब्रिटेन के साथ व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते के संपन्न होने की घोषणा की।

(इनपुट एजेंसी)

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