बेंगलुरु (कर्नाटक):बेंगलुरु की इलेक्ट्रॉनिकसिटी से राष्ट्रीय राजमार्ग 44 (NH44) पर 40 किलो मीटर दक्षिण की ओर ड्राइव करें और आपतमिलनाडु के कृष्णा गिरी जिले में प्रवेश करते हैं, जिसे संपत्ति विश्लेषक (property analysts) दक्षिण भारत के सब से दिलचस्प आवासीय कॉरिडोर (residential corridors) में से एक कह रहे हैं। होसुर, जो कभी मुख्य रूप से अपने औद्योगिक परिसरों और इसकी संपर् कसड़कों के किनारे स्थित कारखानों के लिए जाना जाता था, अब तेजी से बेंगलुरु के कार्यबल (workforce) के लिए एक 'डॉरमेट्री टाउन' (Dormitory town - रहने के स्थान) के रूप में विकसित हो रहा है।
इसका गणित सीधा है। इलेक्ट्रॉनिक सिटी या सरजापुर रोड पर आने-जाने वाला (commuting) एक कामकाजी पेशेवर होसुर में 20-33 लाख रुपये में एक आवासीय प्लॉट खरीद सकता है, जो कि बेंगलुरु शहर की सीमा के अंदर इसी तरह की संपत्ति की कीमत का एक छोटा सा हिस्सा है। इसके बदले में बस सफर (commute) थोड़ा लंबा हो जाता है, लेकिन बेहतर होता राजमार् गबुनियादी ढांचा और भविष्य में मेट्रो कनेक्टिविटी की संभावना साल दर साल उस अंतर को कम कर रही है।
इस समीकरण ने आवासीय विकास की एक लहर को आकर्षित किया है। उद्योग के अनुमानों से पता चलता है कि पिछले पांच वर्षों में कॉरिडोर के चुनिंदा हिस्सों में जमीन की कीमतों में सालाना 8-12% की वृद्धि हुई है, हालांकि सूक्ष्म-स्थान (micro-location) के अनुसार रिटर्न (मुनाफा) अलग-अलग होता है।
कौन क्या बना रहा है (Who’s Building What) इस कॉरिडोर पर सबसे बड़े फुटप्रिंट (व्यापकउपस्थिति) वाले डेवलपर्स में बेंगलुरु स्थित NBR ग्रुप शामिल है, जिसने होसुर-बगलूर-सरजापुर अक्ष (axis) पर कई परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। होसुर-बगलूर रोड पर 'NBR ग्रीनवैली' (NBR Green Valley), 1,224 आवासीय प्लॉट के साथ 80 एकड़ का विकास है, जिसकी शुरुआती कीमत लगभग 26 लाख रुपये है। होसुर के पास आगे बढ़ने पर, 'NBR गोल्डन वैली' (NBR Golden Valley) 35 एकड़ में 655 प्लॉट प्रदान करता है, जिनकी शुरुआत लगभग 20 लाख रुपये से होती है।
बेंगलुरु के करीब, 'NBR ट्राइफेक्टा' (NBR Trifecta) 60 एकड़ में 679 प्लॉट के साथ सरजापुर-बगलूर रोड पर स्थित है, जिसकी कीमत लगभग 33 लाख रुपये से शुरू होती है। कुल मिलाकर, ये तीन परियोजनाएं ही 175 एकड़ से अधिक भूमि और 2,500 से अधिक आवासीय प्लॉट का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो एक ही कॉरिडोर पर एक अकेले डेवलपर के लिए एक पर्याप्त लैंड बैंक (land bank) है।
यहां केवल NBR ग्रुप ही एकमात्र खिलाड़ी (player) नहीं है। इस बेल्ट में कई अन्य डेवलपर्स की भी परियोजनाएं हैं। लेकिन कंपनी की केंद्रित मल्टी-प्रोजेक्ट उपस्थिति इसे इस विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में सबसे अधिक दिखाई देने वाले ऑपरेटरों में से एक बनाती है।
बुनियादी ढांचे पर दांव (The Infrastructure Bet) बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) ही वह चीज़ है जो इस कॉरिडोर को इसका दीर्घकालिक निवेश आधार (long-term investment thesis) देता है। बेंगलुरु और होसुर के बीच NH44 के हिस्से में चौड़ीकरण का काम हुआ है।
पेरिफेरलरिंग रोड (Peripheral Ring Road), यदि समय पर पूरा हो जाता है, तो पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी में नाटकीय रूप से सुधार करेगा। BMRCL की मेट्रो विस्तार योजनाओं में दक्षिणी विकास क्षेत्र की ओर विस्तार शामिल है। और होसुर के औद्योगिक पारिस्थिति की तंत्र में तमिलनाडु का निरंतर निवेश वह रोजगार आधार प्रदान करता है जो आवासीय मांग को मजबूती देता है।
किसी भी बुनियादी ढांचे के नेतृत्व वाले (infrastructure-led) प्रॉपर्टी निवेश की तरह, इसमें भी जोखिम डिलीवरी (परियोजनाओं के पूरा होने) का है। भारत में सड़क चौड़ीकरण की परियोजनाएं अक्सर अपनी समय सीमा (deadlines) से चूक जाती हैं। मेट्रो विस्तार को भूमिअधिग्रहण (land acquisition) की बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
भविष्य की कनेक्टिविटी पर भरोसा करने वाले खरीदारों को इस संभावना को ध्यान में रखना चाहिए किये सुधार वर्षों की देरी से आ सकते हैं, या कुछ मामलों में, बिल्कुल नहीं आ सकते हैं। "यह कॉरिडोर होसुर की कीमतों पर बेंगलुरु के वेतन (salaries) की पेशकश करता है। मांग को समझाने का यह सबसे सरल तरीका है।"
दो राज्य, दो नियम-पुस्तिकाएं (Two States, Two Rulebooks) इस कॉरिडोर की एक असामान्य विशेषता यह है कि यह दो राज्यों में फैला है। तमिलनाडु की ओर की परियोजनाएं राज्य योजना प्राधिकरण (state planning authority) की मंजूरी के अंतर्गत आती हैं। कर्नाटक की ओर की परियोजनाओं के लिए अलग पंजीकरण और स्थानीय योजना मंजूरी की आवश्यकता होती है। NBR ग्रुप की परियोजनाएं दोनों अधिकार क्षेत्रों (jurisdictions) में फैली हुई हैं, जिससे यह इस बेल्ट में राज्य की सीमाओं के पार काम करने वाले कुछ मिड-टियर (मध्य-स्तरके) डेवलपर्स में से एक बन जाता है।
खरीदारों के लिए, इस दोहरे अधिकार क्षेत्र की वास्तविकता का मतलब है अतिरिक्त जांच-पड़ताल (होमवर्क) करना। दोनों राज्यों के बीच अनुमोदन के ढांचे, भूमि शीर्षक सत्यापन (land title verification), और खरीदार सुरक्षा तंत्र अलग-अलग हैं। सीमापार काम करने वाले डेवलपर्स को दोनों प्रणालियों से निपटना (navigate) होता है, यह एक अनुपालन जटिलता (compliance complexity) है जिसे छोटे ऑपरेटर शायद हमेशा प्रभावी ढंग से प्रबंधित नहीं कर पाते हैं।