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तकनीकी कपड़ों के लिये उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के ढांचे पर काम कर रही सरकार: ईरानी

By भाषा | Updated: December 18, 2020 17:15 IST

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नयी दिल्ली, 18 दिसंबर कपड़ा मंत्रालय तकनीकी कपड़ों और मानव निर्मित कपड़े के लिये उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना की रुपरेखा तैयार कर रहा है। केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने शुक्रवार को यह भी कहा कि नई कपड़ा नीति जल्द जारी होगी।

पिछली राष्ट्रीय कपड़ा नीति दो दशक पहले लाई गई थी। स्मति ईरानी वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम के स्थापना सप्ताह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रही थी।

स्मृति ईरानी कपड़ा मंत्रालय के साथ ही महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का भी कामकाज देख रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम नई कपड़ा नीति जल्द जारी करने पर काम कर रहे हैं। इससे पहले दो दशक हो चुके हैं जब कपड़ा नीति लाई गई थी।’’

भारतीय उद्योग पर कृषि क्षेत्र के सुधारों के प्रभाव का उल्लेख करते हुये ईरानी ने कहा, ‘‘भारत सरकार ने पूरी प्रतिबद्धता के साथ यह सुनिश्चित किया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत खरीद कार्य प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुये आगे बढ़ाया जाये। जो भी एमएसपी के परिचालन में भागीदारी करता है उसे धन की प्राप्ति सीधे उसके बैंक खाते में प्राप्त हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2013- 14 में कपास के मामले में एमएसपी के तहत केवल 90 करोड़ रुपये की खरीदारी की गई थी जबकि पिछले साल कपास की 28,500 करोड़ रुपये की खरीदारी की गई । वहीं चालू सत्र के दौरान कपास क्षेत्र में 14,659 करोड़ रुपये का खरीद कार्य हो चुका हो चुका है और देश में कपास का उत्पादन करने वाले 9.63 लाख किसानों के बैंक खाते में सीधे 11,799 करोड़ रुपये का हस्तांतरण किया जा चुका है। यह काम केवल दो महीने में किया गया है।’’

ईरानी ने कहा कि इससे तात्पर्य यह है कि जब हम नीतिगत सुधारों पर गौर करते हैं तो आत्मनिर्भर भारत जैसे विचार को लेकर आगे बढ़ते हुये सीमित दायरे वाले अलग अलग खांचों में रहकर सफलता हासिल नहीं की जा सकती है।

कृषि सुधारों की बात करते हुये उन्होंने कहा कि जब किसी एक क्षेत्र में सुधार किये जाते हैं तो उसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था की समूची मूल्य श्रृंखला पर पड़ना है। उनहोंने कहा कि कृषि सुधारों को कोई एक झटके में नहीं किया गया। यह 19 साल तक चले विचार विमर्श और चर्चा के बाद किया गया। उद्योगों, कृषि क्षेत्र, किसान संगठनों और कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का लाभ देने वाले विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श के बाद यह हुआ है ताकि इससे मिलने वाले लाभ न केवल किसानों तक पहुंचे बल्कि उद्योग और लोगों को भी इसका लाभ मिले।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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