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कोयला संकट: शनिवार को बिजली की खपत में 7.2 करोड़ यूनिट की कमी

By भाषा | Updated: October 10, 2021 18:54 IST

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नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक बिजली की खपत शनिवार को लगभग दो प्रतिशत या 7.2 करोड़ यूनिट घटकर 382.8 करोड़ यूनिट हो गई, जो शुक्रवार को 390 करोड़ यूनिट थी। इसके चलते कोयले की कमी के बीच देशभर में बिजली की आपूर्ति में सुधार हुआ।

आंकड़ों के मुताबिक शुक्रवार, आठ अक्टूबर को बिजली की खपत 390 करोड़ यूनिट थी, जो इस महीने अब तक (1-9 अक्टूबर) सबसे ज्यादा थी। बिजली की मांग में तेजी देश में चल रहे कोयला संकट के बीच चिंता का विषय बन गई थी।

टाटा पावर की इकाई टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड (डीडीएल), जो उत्तर और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में बिजली वितरण का काम करती है, ने शनिवार को अपने उपभोक्ताओं को फोन पर संदेश भेजकर कोयले की सीमित उपलब्धता के चलते विवेकपूर्ण तरीके से बिजली का उपयोग करने का अनुरोध किया था।

बिजली मंत्रालय ने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) द्वारा कोयले की कुल आपूर्ति 15.01 लाख टन प्रतिदिन तक पहुंच गई। इस कारण खपत और वास्तविक आपूर्ति के बीच अंतर कम हो गया। कोयला मंत्रालय और सीआईएल ने आश्वासन दिया है कि वे अगले तीन दिन में बिजली क्षेत्र में कोयले की को बढ़ाकर 16 लाख टन प्रतिदिन करने के लिए भरपूर कोशिश कर रहे हैं और उसके बाद इसे बढ़ाकर 17 लाख टन प्रतिदिन किया जाएगा।

बिजली संयंत्रों में कोयले के भंडार में कमी होने के चार कारण हैं- अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार के कारण बिजली की मांग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी, कोयला खदानों में भारी बारिश से कोयला उत्पादन और ढुलाई पर प्रतिकूल प्रभाव, आयातित कोयले की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और मानसून से पहले पर्याप्त कोयला स्टॉक न करना।

बिजली मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि बिजली मंत्री आर के सिंह ने ताप संयंत्रों में कोयले के भंडार की स्थिति की समीक्षा की, इसमें दिल्ली की वितरण कंपनियों को आपूर्ति करने वाले बिजली संयंत्र शामिल हैं।

मंत्री ने निर्देश दिया कि दिल्ली की वितरण कंपनियों को उनकी मांग के अनुसार बिजली दी जाए।

इस बीच मंत्रालय ने यह चेतावनी भी दी कि यदि कोई बिजली वितरण कंपनी पीपीए के अनुसार बिजली उपलब्ध होने के बावजूद लोड शेडिंग का सहारा लेता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर कोयला मंत्रालय ने रविवार को स्पष्ट किया कि बिजली उत्पादक संयंत्रों की जरूरत को पूरा करने के लिए देश में कोयले का पर्याप्त भंडार है। मंत्रालय ने कोयले की कमी की वजह से बिजली आपूर्ति में बाधा की आशंकाओं को पूरी तरह निराधार बताया।

इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि कोयले की कमी की वजह से देश में बिजली संकट पैदा हो सकता है। इसके बाद मंत्रालय का यह बयान आया है।

मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘कोयला मंत्रालय आश्वस्त करता है कि बिजली संयंत्रों की जरूरत को पूरा करने के लिए देश में कोयले का पर्याप्त भंडार है। इसकी वजह से बिजली संकट की आशंका पूरी तरह गलत है।’’

कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ट्वीट किया, ‘‘देश में कोयले के उत्पादन और आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। मैं सभी को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि बिजली आपूर्ति में बाधा की कोई आशंका नहीं है। कोल इंडिया के मुख्यालय पर 4.3 करोड़ टन कोयले का भंडार है जो 24 दिन की कोयले की मांग के बराबर है।’’

कोयला मंत्रालय ने कहा कि बिजली संयंत्रों के पास करीब 72 लाख टन का कोयला भंडार है जो चार दिन के लिए पर्याप्त है। कोल इंडिया के पास 400 लाख टन का भंडार है जिसकी आपूर्ति बिजली संयंत्रों को की जा रही है।

देश में कोयला आधारित बिजली उत्पादन इस साल सितंबर तक 24 प्रतिशत बढ़ा है। बिजली संयंत्रों को आपूर्ति बेहतर रहने की वजह से उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है।

बिजली संयंत्रों को प्रतिदिन औसतन 18.5 लाख टन कोयले की जरूरत होती है। दैनिक कोयला आपूर्ति करीब 17.5 लाख टन की है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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