नई दिल्लीः केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संशोधित ‘उड़े देश का आम नागरिक’ (उड़ान) योजना को 2035-36 तक 10 वर्ष की अवधि के लिए 28,840 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ बुधवार को मंजूरी दे दी। संशोधित क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना के लिए सरकार की ओर से बजटीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आज कैबिनेट बैठक में तीन प्रमुख निर्णय लिए गए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आव्रजन, वीजा, विदेशी पंजीकरण एवं ट्रैकिंग (आईवीएफआरटी) योजना की अवधि को पांच साल के लिए बढ़ाने की बुधवार को मंजूरी दे दी।
इस योजना का उद्देश्य भारत में आव्रजन, वीजा जारी करने और विदेशियों के पंजीकरण से संबंधित कार्यों को आपस में जोड़ना एवं उन्हें सुव्यवस्थित करना है। पहला, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आव्रजन, वीजा, विदेशी पंजीकरण और ट्रैकिंग (आईवीएफआरटी) योजना को 31 मार्च, 2026 के बाद पांच वर्षों के लिए, 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक, 1800 करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ जारी रखने की मंजूरी दी।
दूसरा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना संशोधित उड़ान को वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक दस वर्षों की अवधि के लिए, 28,840 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ भारत सरकार के बजटीय समर्थन से शुरू करने और लागू करने की मंजूरी दी। तीसरा प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2025-2035 के लिए भारत के पर्यावरणीय लक्ष्यों और प्रतिबद्धताओं को मंजूरी दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आव्रजन, वीजा, विदेशी पंजीकरण एवं ट्रैकिंग (आईवीएफआरटी) योजना को 31 मार्च, 2026 के बाद भी पांच साल की अवधि के लिए, 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए 1800 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
आईवीएफआरटी का उद्देश्य भारत में आव्रजन, वीजा जारी करने और विदेशियों के पंजीकरण से संबंधित कार्यों को आपस में जोड़ना और उन्हें सुव्यवस्थित करना है। आईवीएफआरटी का मुख्य उद्देश्य एक सुरक्षित और एकीकृत सेवा वितरण ढांचे के भीतर आव्रजन और वीजा सेवाओं का आधुनिकीकरण और उन्नयन करना है।
इसका लक्ष्य वैध यात्रियों को सुविधा प्रदान करना और साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। इस परियोजना को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 13 मई 2010 को 1011 करोड़ रुपये के बजट के साथ सितंबर 2014 तक की अवधि के लिए मंजूरी दी थी। परियोजना के बजट को 2015 में संशोधित करके 638.90 करोड़ रुपये कर दिया गया और इसके कार्यान्वयन की समयसीमा को 31 मार्च 2017 तक और फिर 31 मार्च 2021 तक बढ़ा दिया गया, बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय लागत के।
कुल संशोधित बजट 638.90 करोड़ रुपये के मुकाबले 613.28 करोड़ रुपये का व्यय हुआ। कैबिनेट ने 19 जनवरी 2022 को 1365 करोड़ रुपये के बजट के साथ परियोजना को पांच साल की अवधि के लिए 01 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026 तक बढ़ाने की मंजूरी दी।