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कृषि क्षेत्र वर्तमान समय में अपने 'स्वर्ण युग' में : जितेंद्र सिंह

By भाषा | Updated: October 28, 2021 22:02 IST

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नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश अगले 25 वर्ष में एक प्रमुख कृषि तथा वैज्ञानिक शक्ति के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के तहत देश में कृषि क्षेत्र ‘स्वर्ण युग’ में है।

किसानों को संबोधित करते हुए, सिंह ने उन्हें आश्वासन दिया कि विज्ञान आधारित कृषि नवाचारों को खोजने के लिए सरकार की अनूठी पहल न केवल किसानों की आय को दोगुना करेगी बल्कि 25 साल बाद आजादी के 100वें वर्ष में भारत को एक प्रमुख कृषि और वैज्ञानिक शक्ति बना देगी। .

मंत्री ने कहा कि पिछले सात वर्षों में किसानों के कल्याण के लिए कई नई पहल की गई हैं।

उन्होंने कहा कि पीएम किसान मान धन योजना, पीएम फसल बीमा योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, नीम लेपित यूरिया, ई-नाम जैसी कल्याणकारी योजनाएं कृषि और कृषि उत्पादन में क्रांति लाने वाली कुछ पहलों में से हैं।

उन्होंने कहा कि किसान हितैषी योजनाओं और कार्यक्रमों ने कृषि क्षेत्र को भी सशक्त बनाया है, साथ ही उन किसानों को वो सम्मान दिया है जिनकी पहले कमी थी।

मंत्री ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी-किसान योजना 2017 में कृषि नवाचार के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा शुरू की गई एक वैज्ञानिक-किसान साझेदारी है, जिसका उद्देश्य खेत के स्तर पर लागू होने वाले नवीन समाधानों और प्रौद्योगिकियों का पता लगाने के लिए किसानों के साथ विज्ञान प्रयोगशालाओं को जोड़ना है। .

उन्होंने कहा कि विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी-किसान केंद्रों की स्थापना कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को राष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं और संस्थानों से जोड़कर नवीनतम तथा नवीन तकनीकों के साथ मजबूत एवं सशक्त बनाएगी।

सिंह ने बताया कि अब तक 36 जैव प्रौद्योगिकी-किसान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो देश के सभी 15 कृषि-जलवायु क्षेत्रों को कवर करते हैं और उनकी गतिविधियों को कुल 169 जिलों में लागू किया गया है। इसमें 112 ‘आकांक्षी जिले’ शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इस योजना से अब तक तीन लाख से अधिक किसानों को फायदा मिला है जहां उनके कृषि उत्पादन और आय में वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में 200 से अधिक उद्यम भी विकसित किए गए हैं।

सिंह ने कहा कि विभाग ने अपने विशेष कार्यक्रमों के तहत पूर्वोत्तर के साथ-साथ अन्य हिमालयी राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में जैव प्रौद्योगिकी-किसान केंद्रों का एक नेटवर्क स्थापित करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में 15 जैव प्रौद्योगिकी-किसान केंद्र स्थापित करने के प्रस्तावों को पहले ही विकसित और अंतिम रूप दिया जा चुका है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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