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एक्साइज ड्यूटी बढ़ने के बाद 18 रुपये का आप तक पहुंचते-पहुंचते हुआ 70 रुपये, यहां समझे पूरा कैलकुलेशन

By स्वाति सिंह | Updated: March 15, 2020 15:42 IST

एक्साइज ड्यूटी एक तरह का टैक्स है, जो देश के अंदर किसी उत्पाद के उत्पादन या उसे बेचने पर लगाया जाता है. सरकार इससे मिले पैसे से समाज कल्याण की दिशा में काम करती है. यह कस्टम ड्यूटी से बिल्कुल अलग है, जो बाहर से देश में आने वाली चीजों पर लगती है. डीजल-पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 3 रु पए बढ़ाने से प्रति लीटर पर सरकार की कमाई 3 रु पए बढ़ जाएगी.

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ठळक मुद्देडीजल-पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 3 रु पए बढ़ने से लोगों में डर फैल गया है डीजल-पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 3 रु पए बढ़ाने से प्रति लीटर पर सरकार की कमाई 3 रु पए बढ़ जाएगी.

नई दिल्ली: डीजल-पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 3 रु पए बढ़ने से लोगों में डर फैल गया है कि अब इनके दाम बढ़ जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं होगा. दरअसल, कच्चे तेल के दाम लगातार घटने से डीजल-पेट्रोल के दाम कम होने थे, लेकिन सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर इसका लाभ ग्राहकों को देने के बदले मुनाफा सरकारी खजाने में रखने का फैसला किया है.

एक्साइज ड्यूटी एक तरह का टैक्स है, जो देश के अंदर किसी उत्पाद के उत्पादन या उसे बेचने पर लगाया जाता है. सरकार इससे मिले पैसे से समाज कल्याण की दिशा में काम करती है. यह कस्टम ड्यूटी से बिल्कुल अलग है, जो बाहर से देश में आने वाली चीजों पर लगती है. डीजल-पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 3 रु पए बढ़ाने से प्रति लीटर पर सरकार की कमाई 3 रु पए बढ़ जाएगी.

पिछले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है. साल की शुरु आत में कच्चा तेल 67 डॉलर प्रति बैरल यानी 30.08 रु पए प्रति लीटर था. अब 12 मार्च के हिसाब से देखें तो कच्चे तेल की कीमत 38 डॉलर प्रति बैरल (17.79 रु पए प्रति लीटर) हो गई है. वहीं, खुदरा ग्राहकों के लिए कीमत में इतनी कमी नहीं आई है. आइए जानते हैं एक्साइज ड्यूटी में 3 रु पए की बढ़ोत्तरी से पहले कैसे तय होती थी डीजल-पेट्रोल की कीमत.

पेट्रोल डीजल कच्चे तेल की कीमत 17.79 17.79

तेल कंपनियों का चार्ज : 13.91 17.55

एक्साइज ड्यूटी+रोड सेस 19.98 15.83

पेट्रोल पंप मालिक कमीशन 3.55 2.49

वैट 14.91 9.23

कुल 70.14 62.89 (रु पए/लीटर)

तेल कंपनियां रख रहीं थी मुनाफा

अब तक कच्चे तेल के दाम मेंगिरावट आने के बावजूद डीजल-पेट्रोल की कीमतें कम नहीं हो रही थीं, क्योंकि सारा मुनाफा तेल कंपनियां खुद रख रही थीं. अब सरकारी खजाने में 3 रुपए जमा होने से तेल कंपनियों का फायदा कम होगा. हालांकि, ग्राहकों पर इसका असर नहीं पड़ेगा. सरकार ने ग्राहकों पर न तो कोई बोझ डाला है और न ही उन्हें राहत दी है.

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