लाइव न्यूज़ :

पुण्यतिथि विशेष: सुरीली आवाज के बादशाह मुकेश ने आखिरी गीत में कहा था जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल, पढ़ें कुछ खास बातें

By ऐश्वर्य अवस्थी | Updated: August 27, 2019 08:23 IST

बॉलीवुड गायक मुकेश की आज पुण्यतिथि है, ऐसे में आज मुकेश के जीवन की कुछ खास बातों को जानते हैं

Open in App

'दोस्त-दोस्त ना रहा', 'जीना यहां मरना यहां',  'दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई', 'आवारा हूं', 'मेरा जूता है जापानी' जैसे खूबसूरत नगमों के सरताज मुकेश माथुर की आवाज की दीवानी पूरी दुनिया है। आज ही के दिन मुकेश ने 27 अगस्त 1976 को दुनिया को अलविदा कहा था। कहते हैं मुकेश को बचपन से ही अभिनेता बनने का शौक था। उन्होंने बतौर एक्टर व सिंगर उनकी पहली फिल्म 'निर्दोष' थी।  इसके अलावा  उन्होंने 'माशूका', 'आह', 'अनुराग'  में भी बतौर अभिनेता काम किया। लेकिन वह खुद भी नहीं जानते थे शायद की उनकी आवाज ही फैंस के बीच उनकी असली पहचान थी। भले आज मुकेश अपने फैंस के बीच ना हों लेकिन उनके गानें आज भी उनको जिंदा रखे हुए हैं।

मुकेश का पहला गाना

कहते हैं मुकेश के एल सहगल के बहुत बड़े फैन थे ऐसे में जब मुकेश पहला गाना ‘दिल जलता है तो जलने दे’ के एल सहगल को सुनाया गया तो वो बहुत हैरान हुए और कहने लगे मुझे याद ही नहीं मैंने ये गाना कब गाया है। कहा जाता है कि फिर उनको बताया गया था कि ये उनकी नहीं मुकेश की आवाज है।

दिलीप साहब की आवाज

मुकेश की गायिकी का कॉपी करना खासा मुश्किल है। यही कारण है कि 40 के दशक में मुकेश का अपना प्लेबैक सिंगिंग स्टाइल था। मुकेश की आवाज में सबसे ज्यादा गाने दिलीप कुमार पर फिल्माए गए थे। एक समय ऐसा भी था जब उनको दिलीप साहब की आवाज तक कहा जाता था।वहीं, मुकेश ने 40 साल के लंबे करियर में लगभग 200 से अधिक फिल्मों के लिए गीत गाए।

राज कूपर के करीब

कहते हैं 50 के दशक में मुकेश मे राज कपूर की लगभग हर फिल्म में गाना गाया था। इतना ही नहीं ये ही वो दशक था जबउन्हें 'शोमैन' राजकपूर की आवाज कहा जाता था। एक बार अपने कई इंटरव्यू में राजकपूर ने कहा था कि मैं तो सिर्फ शरीर हूं मेरी आत्मा तो मुकेश है। कहीं ना कहीं ये बात सच भी थी।

राष्ट्रीय पुरस्कार

साल 1959 में ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म 'अनाड़ी' के लिए  मुकेश को 'सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी' के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला था। इसके बाद फिल्म 1974 में 'रजनीगंधा' से 'कई बार यूं भी देखा है' के लिए नेशनल पुरस्कार, 1976 में 'कभी कभी' से 'कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है' के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

आखिरी गीतमुकेश ने अपने करियर का आखिरी गाना अपने जिगरी दोस्त राजकपूर के लिए गाया था। जिसके बोल थे 'एक दिन बिक जाएगा, 'माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल'। 27 अगस्त, 1976 को अमेरिका में मुकेश को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 

Open in App

संबंधित खबरें

क्रिकेटGT vs RR: तुषार देशपांडे ने आखिरी ओवर में 11 रन बचाकर राजस्थान रॉयल्स को दिलाई IPL 2026 की लगातार दूसरी जीत

भारत'Three Allegations, Zero Truth': आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा की भूमिका से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा का जवाब

क्रिकेटवैभव सूर्यवंशी, यशस्वी जयसवाल ने सहवाग-गंभीर के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए बनाया नया IPL रिकॉर्ड

क्रिकेटदिल्ली कैपिटल के समीर रिज़वी ने छीनी रोहित शर्मा से IPL 2026 की ऑरेंज कैप, एमआई के खिलाफ खेली 90 रनों की विनिंग पारी

भारतMadhya Pradesh: अनूपपुर ज़िले में चार-मंज़िला होटल गिरने से मलबे में कई लोगों के फँसे होने की आशंका, एक की मौत

बॉलीवुड चुस्की अधिक खबरें

बॉलीवुड चुस्कीआदित्य धर ने संतोष कुमार आरएस को भेजा नोटिस, कुमार ने दावा किया था कि 'धुरंधर 2' के मेकर्स ने उनकी कहानी को किया है कॉपी

बॉलीवुड चुस्कीरिलीज के 20 साल बाद?, रैपर यो यो हनी सिंह और बादशाह के 'अश्लील और अपमानजनक' गाने को हटाने का निर्देश, दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा-‘अंतरात्मा पूरी तरह से झकझोर’ दी?

बॉलीवुड चुस्की13 दिन में 1435 करोड़! धुरंधर 2 बनी चौथी सबसे बड़ी फिल्म, RRR को पछाड़कर रच दिया इतिहास

बॉलीवुड चुस्कीRamayana: रणबीर कपूर की 'रामायण' का टीजर, इमोशनल हुए फैंस

बॉलीवुड चुस्कीआज का इतिहासः देश-दुनिया में 30 मार्च की तारीख, महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा?