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ब्लॉग: शिया-सुन्नी संघर्ष की धुरी बन चुका है यमन, 3 साल में मारे जा चुके हैं 50 हजार लोग

By विकास कुमार | Updated: November 22, 2018 16:40 IST

यमन में 2015 से ही गृह युद्ध छिड़ा हुआ है। यूएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 'इस छोटे से देश में एक करोड़ से ज्यादा लोग भुखमरी की कगार पर खड़े हैं, अंतराष्ट्रीय बिरादरी को अपना सिर शर्म से झुका लेना चाहिए'।

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मध्य-पूर्व का एक छोटा सा देश यमन पिछले तीन वर्षों से सऊदी अरब और उसकी गठबंधन सेनाओं का हवाई हमला झेल रहा है। इस देश में 2015 से ही गृह युद्ध छिड़ा हुआ है। यमन सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच भीषण संघर्ष जारी है। इस लड़ाई में सऊदी और अमीरात गठबंधन की सेनाएं यमन सरकार का समर्थन कर रही हैं तो वहीं हौथी विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है।

ईरान और सऊदी अरब के दखलंदाजी के कारण हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, यमन में युद्ध जारी होने के बाद से 50 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। यूएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 'इस छोटे से देश में एक करोड़ से ज्यादा लोग भुखमरी की कगार पर खड़े हैं और अंतराष्ट्रीय बिरादरी को अपना सिर शर्म से झुका लेनी चाहिए। यमन में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं और अगर युद्ध को नहीं रोका गया तो इस यह देश पिछली सदी के भयंकर आकाल के जैसे हालात का सामना करने को मजबूर होगा, जिसके कारण लाखों लोग भूख से मर जायेंगे'।

यमन खाड़ी के देशों के लिए युद्ध का एक अखाड़ा बन गया है, जहां सऊदी के नेतृत्व में दिन-रात बमबारी जारी है। पिछले दिनों यमन सरकार और हौथी विद्रोहियों में संघर्ष विराम को लेकर समझौता हुआ था, लेकिन यह समझौता 24 घंटे भी नहीं टिक सका। सऊदी गठबंधन उसके बाद से लगातार यमन के हुदैदा बंदरगाह पर हवाई हमले कर रहा है।

हवाई हमले के बीच सऊदी मदद का एलान 

हुदैदा बंदरगाह को यमन का लाइफलाइन माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा भेजे गए ऐड और रसद की आपूर्ति भी इसी बंदरगाह के जरिये होती है, लेकिन सऊदी हवाई हमले के कारण पिछले कुछ दिनों से हालात और भी बदतर हो गए हैं। सऊदी का मानना है कि ईरान हौथी विद्रोहियों को इस बंदरगाह के जरिये हथियारों की सप्लाई कर रहा है।

आम नागरिक भूख से बिलख रहे हैं। इसी बीच सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने साझा रूप से यमन के लिए 50 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद का एलान किया है। 

हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है. यमन की लड़ाई सऊदी अरब और ईरान के लिए नाक का सवाल बन गया है, जिसके कारण यह लड़ाई लम्बा खिचता चला जा रहा है। सऊदी अरब और उसके सहयोगियों को अमेरिका का समर्थन प्राप्त है। हाल के दिनों में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब को निशाना बनाते हुए कई मिसाइल दागे हैं जिसमें रियाद का अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी शामिल है। इन विद्रोहियों को ईरान से हथियार और आर्थिक मदद दोनों प्राप्त हो रहा है।

इस लड़ाई में ईरान को सीरिया से भी मदद मिल रहा है जिसके कारण ये संघर्ष शिया और सुन्नी संघर्ष में तब्दील हो चूका है जिसका खाड़ी क्षेत्र में दूरगामी परिणाम दिख सकता है। हूती विद्रोहियों का समर्थन भी ईरान और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर संधि टूटने के कारणों में से एक है, क्योंकि अमेरिका सऊदी अरब का समर्थन करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने दुनिया के ताकतवर देशों को आईना दिखाने का काम किया है। एक गरीब देश आज भयंकर भुखमरी की कगार पर खड़ा है जिसके जिम्मेवार खाड़ी के देश और अमेरिका भी है।

 

टॅग्स :सऊदी अरबईरानसंयुक्त अरब अमीरात
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