लाइव न्यूज़ :

वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: ईरान में चीन की चुनौती से सतर्क रहे भारत

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: April 1, 2021 09:15 IST

चीन की कोशिश ये भी होगी कि अफगान-समस्या के हल में पाकिस्तान और ईरान की भूमिका बढ़ जाए जबकि भारत की भूमिका गौण हो जाए.

Open in App

ईरान के साथ चीन ने बहुत बड़ा सौदा कर लिया है. 400 बिलियन डॉलर चीन खर्च करेगा ईरान में. किसलिए? सामरिक सहयोग के लिए. इसमें आर्थिक, फौजी और राजनीतिक- ये तीनों सहयोग शामिल हैं. 

भारत वहां चाबहार का बंदरगाह बनाने और उससे जाहिदान तक रेल-लाइन डालने की कोशिश कर रहा है. इस पर वह मुश्किल से 2 बिलियन डॉलर खर्च करने की सोच रहा है. 

भारत ने अफगानिस्तान में जरंज-दिलाराम सड़क तैयार तो करवा दी है पर अभी भी उसके पास मध्य एशिया के पांचों राष्ट्रों तक जाने के लिए थल-मार्ग की सुविधा नहीं है. 

अफगानिस्तान तक अपना माल पहुंचाने के लिए उसे फारस की खाड़ी का चक्कर काटना पड़ता है, क्योंकि पाकिस्तान उसे अपनी जमीन में से रास्ता नहीं देता है.

चीन ने इस पच्चीस वर्षीय योजना के जरिए पूरे पश्चिम एशिया में अपनी जड़ें जमानी शुरू कर दी हैं. चीनी विदेश मंत्री आजकल ईरान के बाद अब सऊदी अरब, तुर्की, यूएई, ओमान और बहरीन की यात्रा कर रहे हैं. 

यह यात्रा उस वक्त हो रही है, जबकि अमेरिका का बाइडेन-प्रशासन ईरान के प्रति ट्रम्प की नीति को उलटने के संकेत दे रहा है. ट्रम्प ने 2018 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को रद्द करके उस पर कई प्रतिबंध लगा दिए थे. 

अब चीन के साथ हुए इस सामरिक समझौते का दबाव अमेरिका पर जरूर पड़ेगा. चीन, रूस और यूरोपीय राष्ट्रों ने अमेरिका से अपील की है कि वह ओबामा-काल में हुए इस बहुराष्ट्रीय समझौते को पुनर्जीवित करे. 

साल 2016 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तेहरान-यात्रा के दौरान वर्तमान समझौते की बात उठी थी. उस समय तक चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीददार था. 

अब चीन उससे इतना तेल खरीदेगा कि अमेरिकी प्रतिबंध लगभग निर्थक हो जाएंगे. लेकिन इस चीन-ईरान समझौते के सबसे अधिक परिणाम भारत को ङोलने पड़ेंगे. हो सकता है कि अब उसे मध्य एशिया तक का थल मार्ग मिलना कठिन हो जाए. 

इसके अलावा चीन चाहेगा कि अफगान-समस्या के हल में पाकिस्तान और ईरान की भूमिका बढ़ जाए और भारत की भूमिका गौण हो जाए. भारत और अमेरिका की बढ़ती हुई निकटता चीन की आंख की किरकिरी बन गई है. 

‘खाड़ी सहयोग परिषद’ के साथ चीन का मुक्त व्यापार समझौता हो गया तो मध्य एशिया और अरब राष्ट्रों के साथ मिलकर चीन अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. 

भारतीय विदेश नीति निर्माताओं के लिए भारत के दूरगामी राष्ट्रहितों के बारे में सोचने का यह सही समय है.  भारत के पास ‘प्राचीन आर्यावर्त’ (म्यांमार से ईरान व मध्य एशिया) को जोड़ने के लिए कोई जन-दक्षेस-जैसी योजना क्यों नहीं है?

टॅग्स :चीनईरानशी जिनपिंगअमेरिकाजो बाइडन
Open in App

संबंधित खबरें

विश्व'अगर युद्ध छिड़ता है और पाकिस्तान शांति स्थापित करने में नाकाम रहता है, तो इज़रायल पर हमला करना हमारा फ़र्ज़ है': तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान

विश्वIslamabad Talks: ईरान के साथ वार्ता विफल, जेडी वेंस इस्लामाबाद से रवाना; पाकिस्तान ने दोनों देशों से की ये अपील

विश्वअमेरिका-ईरान वार्ता के तीन दौर बेनतीजा, जेडी वैंस बोले- हमने 'बेस्ट ऑफर' दिया लेकिन बात नहीं बनी

विश्वडोनाल्ड ट्रंप ने दी चीन को चेतावनी, कहा- 'ईरान की मदद करने पर भुगतना होगा अंजाम'

विश्वअमेरिका ईरान की जब्त संपत्तियां रिहा करने पर हुआ सहमत, इस्लामाबाद वार्ता के बीच रिपोर्ट का दावा

विश्व अधिक खबरें

विश्व'सबसे खूबसूरत दुल्हन और एक अरब डॉलर दो, वरना...': युगांडा के सेना प्रमुख की तुर्की से अजीबोगरीब मांग

विश्वUS-Iran War: अमेरिका-ईरान वार्ता के लिए वैंस की टीम इस्लामाबाद पहुंची, ट्रंप बोले— 'गुड लक'

विश्वHormuz Toll: ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम, होर्मुज पर नहीं चलेगा 'टोल राज'

विश्वधरती पर लौट आए NASA के चंद्रयात्री?, आर्टेमिस 2 ने सफलतापूर्वक की लैंडिंग, वीडियो

विश्वमिया खलीफ़ा ने लेबनान पर हुए हवाई हमलों पर एक भावुक वीडियो शेयर किया, कहा- 'मेरे टैक्स के पैसे मेरे वतन के साथ ऐसा कर रहे हैं'