लाइव न्यूज़ :

ईमानदार पत्रकारिता की मिसाल थे मार्क टली

By विश्वनाथ सचदेव | Updated: January 28, 2026 07:09 IST

भारत में ही जन्मे मार्क टली के निधन से ईमानदार पत्रकारिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण हमारे बीच से उठकर चला गया.

Open in App

यह मेरा दुर्भाग्य ही है कि मुझे बीबीसी के भारत स्थित संवाददाता स्वर्गीय मार्क टली से मिलने का कभी अवसर नहीं मिला, पर हकीकत यह भी है कि मैं पिछले चार-पांच दशकों में उनसे अक्सर मिलता रहा हूं. यह मिलना बीबीसी रेडियो के माध्यम से होता था. मार्क टली जैसे सजग और ईमानदार पत्रकार ने बीबीसी की विश्वसनीयता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

आज मार्क टली हमारे बीच नहीं हैं. भारत में ही जन्मे मार्क टली के निधन से ईमानदार पत्रकारिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण हमारे बीच से उठकर चला गया. वे चाहते थे कि उनका निधन भारत में ही हो और यह संयोग मात्र नहीं है कि भारत के बनते इतिहास का यह साक्षी अपनी जन्मभूमि से ही विदा हुआ. आज जब रेडियो के माध्यम से समय की सच्चाई जानने वाले श्रोता उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं, तो उस व्यक्ति के साथ ही उस पत्रकारिता की बात भी होनी चाहिए जिसके लिए वह जाना जाता रहा.  

मुझे याद है जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 1984 में हत्या हुई तो राजीव गांधी दिल्ली से बाहर (बंगाल में) थे. तब उन्होंने बीबीसी रेडियो के माध्यम से ही समाचार की पुष्टि की थी. ज्ञातव्य है कि ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) ने तो शाम छह बजे तक उनकी मृत्यु की आधिकारिक घोषणा नहीं की थी. कारण कुछ भी बताए जाएं, पर यह हकीकत अपनी जगह है कि राजीव गांधी को तब इंग्लैंड का बीबीसी रेडियो ही विश्वसनीय लगा था. यह तथ्य इस बात को रेखांकित करता है कि मीडिया की विश्वसनीयता उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है.  

बीबीसी से सेवानिवृत्त होने के बाद भी मार्क टली ने भारत को ही अपना देश बनाया. वे भारत और भारत की चुनौतियों को अच्छी तरह समझते थे, और उनका मानना था कि जनता तक सही और समुचित जानकारी पहुंचाना पत्रकारिता का दायित्व है. उनका स्पष्ट कहना था कि पत्रकारिता का एक ही नियम है- अपने आप से यह पूछिए कि कोई आप पर क्यों विश्वास करता रहे. यदि आप दिमाग में यह सवाल बनाए रखेंगे तो स्वयं ही पता चल जाएगा कि आप रिपोर्ट कैसे करें. एक बार यदि विश्वास टूट जाए तो फिर से प्राप्त करना लगभग असंभव है. जितना आप सत्ता के निकट रहेंगे, इस विश्वास पर उतना अधिक जंग लगेगा.

भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया और इंग्लैंड की महारानी ने उन्हें ‘सर’ का खिताब दिया. दो सरकारों द्वारा इस तरह से सम्मानित करना अपने आप में एक विशेष उपलब्धि से कम नहीं है, पर सर मार्क टली के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार अपने पाठकों-श्रोताओं का विश्वास प्राप्त करना था. इस तरह विश्वास अर्जित करने वाले पत्रकार कम ही होते हैं. यह विश्वास ही सच्ची-अच्छी पत्रकारिता की पहचान है.

टॅग्स :पत्रकारBBC
Open in App

संबंधित खबरें

भारतRam Rahim Acquitted: पत्रकार छत्रपति की हत्या के आरोप से बरी हुआ राम रहीम, 24 साल पुराने केस में हाईकोर्ट ने किया फैसला

भारतबिहार में पत्रकारों को पेंशन देने का मामला उठा विधानसभा में, सरकार ने कहा-पत्रकार पेंशन योजना का लाभ 20 वर्ष की सेवा अवधि वाले पत्रकारों को ही मिलेगा

भारतछात्रों के लिए शानदार मौका, शिक्षा मंत्रालय ने पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए शुरू किए 2 नए कोर्स; नि:शुक्ल ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध

विश्वडोनाल्ड ट्रंप की स्पीच से छेड़छाड़ का आरोप, बीबीसी के डायरेक्टर जनरल और न्यूज CEO ने दिया इस्तीफा, ट्रंप ने कहा- 'बहुत बेईमान लोग'

भारतमुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के पत्रकारों को मिलने वाली पेंशन राशि में किया इजाफा, अब हर महीने 6 हजार रुपये की जगह मिलेगी 15 हजार रुपये पेंशन की राशि

विश्व अधिक खबरें

विश्वअबू धाबी में रोकी गई ईरानी मिसाइलों के मलबे की चपेट में आने से घायल 12 लोगों में 5 भारतीय शामिल

विश्व2027 में रिटायरमेंट और 2026 में जबरन हटाया?, सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज पर गाज?, ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी रक्षा में हलचल

विश्वअमेरिका-इजरायल के वार बेअसर? हमलों के बावजूद ईरान की मिसाइल क्षमता बरकरार: रिपोर्ट

विश्वNASA Artemis II: पृथ्वी पीछे छूटी, लक्ष्य सामने! मानव इतिहास में पहली बार आर्टेमिस II 'वहां' जाने की तैयारी, जहां कोई नहीं पहुंचा

विश्वकौन कहता है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता!