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ब्लॉग: ईरान की धमकी के बाद फिर से छिड़ सकता है खाड़ी युद्ध, अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकते हैं पेट्रोल और डीजल के दाम

By विकास कुमार | Updated: December 8, 2018 08:25 IST

ईरान ने होर्मुज समुद्री मार्ग को बंद करने की धमकी दी है। मध्य-पूर्व में होर्मुज क्षेत्र को तेल कूटनीति के हिसाब से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र की महता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे विश्व के 20% कच्चे तेल का आवागमन इसी रास्ते से होता है।

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ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने एक बार फिर अमेरिका को धमकी दी है कि यदि ईरान के तेल का निर्यात रोका गया तो ईरान फारस की खाड़ी से होने वाले तेल की सप्लाई बंद कर देगा। किसी भी देश के तेल का निर्यात फारस की खाड़ी और खासकर होर्मुज क्षेत्र से नहीं होने देगा। पूरे विश्व के 20% कच्चे तेल का आवागमन इसी रास्ते से होता है।

ईरान ने इससे पहले भी इस तरह की चेतावनी दी थी। आपको बता दें कि बीते 5 नवंबर से अमेरिका ने ईरान के ऊपर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा दिए हैं जिसके कारण वो किसी भी देश के साथ व्यापार नहीं कर सकता। हालांकि, तेल निर्यात करने के मामले में अमेरिका ने ईरान के कुछ प्रमुख आयातकों को छूट दी थी जिसमें भारत भी शामिल है। लेकिन ये छूट अस्थायी है। 

ईरान को निचोड़ने की तैयारी 

हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने ईरान को निचोड़ने की धमकी दी थी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पिछले कई मौकों पर ईरान पर निशाना साधा है। उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की बात कही है। अमेरिकी प्रतिबंध के कारण ईरान में हालात दिन पर दिन बदतर होते चले जा रहे हैं। ईरान की मुद्रा लगातार गिर रही है। ईरान के लोगों में वहां के सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा है। ईरान में आये दिन विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। युवाओं में बेरोजगारी बढ़ रही है। 

होर्मुज इलाके का महत्‍व

ईरान ने होर्मुज समुद्री मार्ग को बंद करने की धमकी दी है। मध्य-पूर्व में होर्मुज क्षेत्र को तेल कूटनीति के हिसाब से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र की महता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे विश्व के 20% कच्चे तेल का आवागमन इसी रास्ते से होता है। खाड़ी के अन्य देश भी तेल के व्यापार के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। इस इलाके पर ईरान का नियंत्रण है और अगर ईरान इस रास्ते को ब्लॉक कर देता है तो कच्चे तेल के दाम अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकते हैं। खाड़ी देशों में एक बार फिर खाड़ी युद्ध छिड़ने की सम्भावना बढ़ जाएगी। दरअसल इस रास्ते को रोक कर ईरान मध्य-पूर्व में अमेरिका के सहयोगियों को सबक सिखाना चाहता है। 

ईरान की धमकी ने मध्य-पूर्व की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। ईरान के होर्मुज समुद्री क्षेत्र को रोकने की स्थिति में क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ सकता है। शिया और सुन्नी देशों का मतभेद एक बार फिर सतह पर आ सकता है। सऊदी अरब और ईरान की परम्परागत दुश्मनी एक खतरनाक मोड़ ले सकती है। ईरान भी खुलकर सामने आएगा और शिया देशों को सऊदी अरब के खिलाफ लामबंद करने की कोशिश करेगा। 

अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर डील को तोड़ने के लिए सऊदी अरब ने करोड़ों डॉलर की राशि लॉबिंग पर खर्च की थी। सऊदी अरब नहीं चाहता है कि ईरान मध्य-पूर्व में उसके प्रतिद्वंदी के रूप में उभरे। ईरान ने भी फारस की खाड़ी को लेकर जो धमकी दी है उसका पता सऊदी अरब तक ही पहुंचता है। ईरान मध्य-पूर्व में अमेरिका के सहयोगियों को निशाना बना रहा है क्योंकि ईरान को चीन और रूस का नैतिक समर्थन हासिल है।

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