लाइव न्यूज़ :

ब्लॉग: आरोग्य के देवता धन्वंतरि का अवतरण दिवस है धनतेरस

By योगेश कुमार गोयल | Updated: November 10, 2023 11:43 IST

पांच दिवसीय दिवाली महोत्सव की शुरुआत प्रतिवर्ष स्वास्थ्य चेतना जागृति के पर्व ‘धनतेरस’ से ही होती है। इन पांच दिनों को शास्त्रों में ‘यम पंचक’ कहा गया है और इन दिनों में यमराज, वैद्यराज धन्वंतरि, लक्ष्मी-गणेश, हनुमान, काली और भगवान चित्रगुप्त की पूजा का विधान है।

Open in App
ठळक मुद्देभगवान विष्णु के 24 अवतारों में 12वां अवतार धन्वंतरि का माना गया हैयह त्यौहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता हैधनतेरस को अब भारत में ‘राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है

प्रतिवर्ष दीवाली से पहले ‘धनतेरस’ त्यौहार मनाया जाता है। इसी दिन धनत्रयोदशी से शुरू होकर यम द्वितीया तक दिवाली के पंच पर्व की शुरुआत होती है। पांच दिवसीय दिवाली महोत्सव की शुरुआत प्रतिवर्ष स्वास्थ्य चेतना जागृति के पर्व ‘धनतेरस’ से ही होती है। इन पांच दिनों को शास्त्रों में ‘यम पंचक’ कहा गया है और इन दिनों में यमराज, वैद्यराज धन्वंतरि, लक्ष्मी-गणेश, हनुमान, काली और भगवान चित्रगुप्त की पूजा का विधान है।

‘धन्वंतरि जयंती’ आरोग्य के देवता धन्वंतरि का अवतरण दिवस है। भगवान विष्णु के 24 अवतारों में 12वां अवतार धन्वंतरि का माना गया है। धनतेरस के प्रचलन का इतिहास बहुत पुराना माना जाता है। यह त्यौहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। धनतेरस को अब भारत में ‘राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है। धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता और देवताओं का चिकित्सक माना गया है इसलिए धनतेरस को चिकित्सकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।

धन्वंतरि को आयुर्वेद का जन्मदाता माना जाता है, जिन्होंने विश्वभर की वनस्पतियों पर अध्ययन कर उनके अच्छे और बुरे प्रभावों व गुणों को प्रकट किया। इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि तथा धन एवं समृद्धि की देवी लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय इसी दिन धन्वंतरि आयुर्वेद और अमृत लेकर प्रकट हुए थे। दिवाली महापर्व का पहला दीप जलाकर शुरू हुए महोत्सव का एक अंग नए बर्तन खरीदना भी है, ताकि भगवान के लिए भोग-प्रसाद नए पात्र में तैयार किया जा सके।

दरअसल धन्वंतरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था और चूंकि भगवान धन्वंतरि कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसीलिए इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परंपरा है। धनतेरस मनाए जाने के संबंध में जो प्रचलित कथा है, उसके अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवताओं और असुरों द्वारा मिलकर किए जा रहे समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से निकले नवरत्नों में से एक धन्वंतरि ऋषि भी थे, जो जनकल्याण की भावना से अमृत कलश सहित अवतरित हुए थे।

समुद्र मंथन की इस कथा का उल्लेख श्रीमद्भागवत पुराण, विष्णु पुराण, अग्नि पुराण, महाभारत इत्यादि विभिन्न पुराणों में मिलता है। समुद्र मंथन के दौरान कई प्रकार की औषधियां उत्पन्न हुईं और उसके बाद अमृत निकला। इसी अमृत कलश के लिए देवताओं और दानवों के बीच भयानक संग्राम हुआ था। धन्वंतरि ऋषि ने समुद्र से निकलकर देवताओं को अमृतपान कराया और उन्हें अमर कर दिया। यही वजह है कि धन्वंतरि को ‘आरोग्य का देवता’ माना जाता है और आरोग्य तथा दीर्घायु प्राप्त करने के लिए ही लोग इस दिन उनकी पूजा करते हैं।

टॅग्स :धनतेरसदिवालीत्योहारदिल्लीशॉपिंग
Open in App

संबंधित खबरें

भारतघायल हूं इसलिए घातक हूं?, राघव ने एक्स पर किया पोस्ट, मैं बोलना नहीं चाहता था, मगर चुप रहता तो बार-बार दोहराया गया झूठ भी सच लगने लगता, वीडियो

भारतLPG Cylinder Update: सिलेंडर के लिए अब लंबी वेटिंग खत्म! दिल्ली में बस ID कार्ड दिखाओ और 5KG सिलेंडर पाओ

भारतदिल्ली और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में महसूस हुए भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में आया भूकंप

भारतजो डर गया, समझो मर गया?, सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर निशाना साधा, कहा- केजरीवाल गिरफ्तार हुए तो विदेश में छिपा?

पूजा पाठBaisakhi 2026: सिर्फ पंजाब ही क्यों? भारत के इन 5 शहरों में भी दिखती है बैसाखी की रौनक, चेक करें बेस्ट स्पॉट्स

पूजा पाठ अधिक खबरें

पूजा पाठPanchang 05 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 05 April 2026: आज शत्रुओं की चाल से बचें वृषभ राशि के लोग, कर्क राशिवालों के जीवन में खुशियां

पूजा पाठGuru Nakshatra Parivartan 2026: अप्रैल में इन 5 राशिवालों का शुरू होगा गोल्डन पीरियड, मोटी कमाई की उम्मीद

पूजा पाठPanchang 04 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 04 April 2026: कुंभ राशिवालों को अचानक धनलाभ मिलने की संभावना, जानें सभी राशियों का फल