कुमार सिद्धार्थ
जलवायु परिवर्तन आज मानव सभ्यता के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. दुनियाभर में बढ़ते तापमान, चरम मौसम की घटनाओं और प्रदूषण ने विकास के मौजूदा मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. इस संदर्भ में परिवहन क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह आधुनिक जीवन का आधार भी है और प्रदूषण का बड़ा स्रोत भी.परिवहन क्षेत्र वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का एक बड़ा हिस्सा पैदा करता है. अंतरसरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल के अनुसार दुनिया के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 15 फीसदी हिस्सा परिवहन क्षेत्र से आता है, जबकि ऊर्जा से जुड़े कार्बन उत्सर्जन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 23 फीसदी तक पहुंच जाती है.
यही कारण है कि आज दुनिया के अनेक देश अपनी परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में तेजी से जुटे हैं. दुनिया में ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में यूरोप सबसे आगे दिखाई देता है. नॉर्वे, नीदरलैंड और जर्मनी जैसे देशों ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक नीतियां बनाई हैं. नॉर्वे में नई कारों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 70 फीसदी से भी अधिक हो चुकी है.
इसके साथ ही यूरोप के कई शहरों ने साइकिल को शहरी परिवहन का प्रमुख साधन बनाने का प्रयास किया है. एम्स्टर्डम और कोपेनहेगन जैसे शहरों में साइकिल लेन का विशाल नेटवर्क है और बड़ी संख्या में लोग रोजाना साइकिल से ही अपने कार्यस्थल तक पहुंचते हैं.
चीन ने भी इलेक्ट्रिक वाहनों और सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. चीन के कई शहरों में हजारों इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं और बिजली वाहनों के उत्पादन में भी वह दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है.अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार वर्ष 2022 में दुनियाभर में एक करोड़ से अधिक इलेक्ट्रिक कारें बेची गईं, जो कुल कार बिक्री का लगभग 14 फीसदी हिस्सा थीं.
भारत में हालांकि पर्यावरण-अनुकूल परिवहन की दिशा में पहलें शुरू हो चुकी हैं. लेकिन सबसे पहली चुनौती बुनियादी ढांचे की है. इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन अभी भी कई शहरों में उपलब्ध नहीं हैं. दूसरी चुनौती लागत से जुड़ी है. इलेक्ट्रिक वाहनों की शुरुआती कीमत अभी भी पारंपरिक वाहनों की तुलना में अधिक है.
हालांकि लंबे समय में इनकी परिचालन लागत कम होती है, लेकिन शुरुआती निवेश कई उपभोक्ताओं को रोकता है. तीसरी चुनौती शहरी नियोजन से जुड़ी है. भारत के कई शहरों का विस्तार बिना दीर्घकालिक परिवहन योजना के हुआ है. परिणामस्वरूप सड़कों पर भीड़ और यातायात जाम आम समस्या बन गए हैं.
इसके अलावा चौथी चुनौती शहरों में साइकिल और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित ढांचों का अभाव है. यदि शहरों की योजना इस तरह बनाई जाए कि सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और पैदल मार्ग को प्राथमिकता मिले तो प्रदूषण और यातायात दोनों में कमी लाई जा सकती है.