लाइव न्यूज़ :

हाथ में शराब, लेट नाइट पार्टी और मर्दों को नीचा दिखाना, क्या यही है फेमिनिज्म?

By पल्लवी कुमारी | Updated: June 11, 2018 15:09 IST

लड़कियां समझती हैं कि फेमिनिज्म होना मतलब छोटे कपड़े पहनना, शराब-सिगरेट पीना, लेट नाइट क्लब में पार्टी करना, वन नाइट स्टैंड करना। या यूं कह लें वो सब करना जो उन्हें लगता है कि ये करके वो मर्दों को नीचा दिखा सकती हैं।

Open in App

फेमिनिज्म, नारीवाद, आखिर इस विचार धारा के मायने क्या है? क्या फेमिनिज्म का मतलब आधुनिकता और मर्दों की बराबरी के नाम पर कुछ भी करना है। फेमिनिज्म क्या है? और कैसी होती है फेमिनिस्ट लड़कियां? 

आमतौर पर आज के युवा और खासकर लड़कियां समझती हैं कि फेमिनिज्म होना मतलब छोटे कपड़े पहनना, शराब-सिगरेट पीना, लेट नाइट क्लब में पार्टी करना, वन नाइट स्टैंड करना। या यूं कह लें वो सब करना जो उन्हें लगता है कि ये करके वो मर्दों को नीचा दिखा सकती हैं।

फेमिनिस्ट लड़कियों को बिना जिम्मेदारी वाले फिजिकल रिलेशन बनाने में भी कोई परेशानी नहीं होती, वह अपने आप को हमेशा 'ईजी अवेलेबल' रखती हैं और वह लड़कों को खुद से नीच समझती हैं। 

फेमिनिस्ट लड़कियां सोचती हैं कि वह लड़कों की तरह बात-बात में गालियां दें, सार्वजनिक स्थान पर चाय की दुकान पर झूठे फेमिनिज्म का दिखावा करने के लिए हाथ में सिगरेट लेकर पीना शुरू कर दे तो उन्होंने मर्दों को नीचा दिखा दिया, कि हां भाई देख लो मैं भी ये कर सकती हूं। 

असल में फेमिनिज्म और लड़कों की बराबरी के नाम पर आजकल की कुछ लड़कियां वह सब करती हैं, जो मर्द करते हैं। मसलन गाली देना और सेक्स के लिए बस लड़कों को एक ''सामान'' की तरह देखना।  

उम्र से पहले उम्रदराज़ होती गरीबी, गरीब के बच्चों के पास नहीं होता खिलौनों से खेलने तक का समय!

सिर्फ इतना ही नहीं फेमिनिज्म का यहां एक और पहलू भी हैं जिसमें लड़कियां छोटे कपड़े नहीं पहनती बल्कि सुट-सलवार, कूर्ता पहन माथे पर बड़ी बंदी लगाकर इंडियन गेटअप में दिखना भी फेमिनिज्म का ही एक पहलू माना जा रहा है। मुझे तो ये समझ नहीं आता कि कपड़े छोटे हो या बड़े, माथे पर बिंदी और या हाथ में शराब का गिलास इसका नारीवाद से क्या लेना-देना है? 

फेमिनिज्म को लव-सेक्स और धोखा तक रखने वाली लड़कियों को यह समझना होगा कि नारीवाद एक विचार धारा है। जिसका मकसद समाज में महिलाओं की विशेष स्थिति के कारणों का पता लगाना और उनकी बेहतरी के लिए वैकल्पिक समाधान प्रस्तुत करना है, ना की मर्दों को नीचा दिखाना है। 

नारीवाद ही बता सकता है कि किस समाज में महिला सशक्तीकरण के लिए कौन-कौन सी रणनीति अपनाई जानी चाहिए, लड़कियां किसी भी मामले में मर्दों के कम नहीं हैं, इसके बाद भी उन्हें कई अवसरों से वंचित कर दिया जाता है। नारीवाद ऐसी तमाम परिस्थितियों के विषय में बताता है

फेमिनिज्म और पुरुषों की खिलाफत करते-करते हम लड़कियां शायद अपने नारी होने के महत्व को खोते जो रहे हैं। हन अपने व्यवहार में नारी के समर्पण के प्रति सम्मान नहीं रख पा रहे हैं। नारीवाद का मतलब यह नहीं है कि आप आरक्षण मांगें या दूसरे जेंडर पर दबाव बनाने के लिए एक्स्ट्रा अधिकार मांगें। बल्कि दोनों जेंडर्स को बराबरी पर लाने का हमें प्रयास करना चाहिए। 

मेरे हिसाब से मर्दों के साथ चलना फेमिनिस्ट है और हां मैं एक महिला हूं, और एक फेमिनिस्ट भी, क्योंकि बहूत सुंदर अहसास होता है फेमिनिस्ट होना। वह हमें मर्दों को नीचा दिखाना या उनका विरोध करना नहीं सिखाता बल्कि उनके साथ चलना सिखाता है। आज के वक्त में नारीवाद उस विचार धारा की तरह हो गया है, जिसपर बहस या विमर्श करना बेमानी है। अंत में मैं इतना ही कहना चाहूंगी एक -दूसरे जेंडर को नीचा दिखाने में नहीं बल्कि हमें बराबरी में यकीन करना चाहिए।

लोकमत न्यूज के लेटेस्ट यूट्यूब वीडियो और स्पेशल पैकेज के लिए यहाँ क्लिक कर के सब्सक्राइब करें

टॅग्स :फेमिनिज्म
Open in App

संबंधित खबरें

भारतमहिला अधिकारों की बुलंद आवाज रहीं कमला भसीन का निधन

ज़रा हटकेफेमिनिज्म और मीटू को खत्म करने के लिए मर्दों ने की 'पिशाचिनी मुक्ति पूजा', कहा- 'भारत के परिवार को बचाने के लिए जरूरी'

भारतललित गर्ग का ब्लॉगः बदलनी होगी पुरुषवादी मानसिकता

भारतफिर सुर्खियों में आया 'फेमिनिज्म', जानें क्या कहते हैं चर्चित चेहरे

भारत अधिक खबरें

भारतMadhya Pradesh: अनूपपुर ज़िले में चार-मंज़िला होटल गिरने से मलबे में कई लोगों के फँसे होने की आशंका, एक की मौत

भारततमिलनाडु चुनावों के लिए BJP का टिकट न मिलने के बाद अन्नामलाई ने दिया अपना स्पष्टीकरण

भारतलखनऊ सहित यूपी के 17 शहरों में कूड़े का अंबार?, मतदान करने असम गए हजारों सफाईकर्मी, 12 अप्रैल को लौंटेगे?

भारतबारामती विधानसभा सीटः सुनेत्रा पवार के खिलाफ प्रत्याशी ना उतारें?, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा- निर्विरोध जिताएं, सभी दलों से की अपील

भारत'एकनाथ शिंदे और बलात्कार के आरोपी अशोक खरात के बीच 17 बार फोन पर बातचीत हुई', अंजलि दमानिया का आरोप