Sarang Thatte's blog: China gets a strong message from Modi's Ladakh visit | सारंग थत्ते का ब्लॉग: मोदी की लद्दाख यात्रा से चीन को मिला कड़ा संदेश
सारंग थत्ते का ब्लॉग: मोदी की लद्दाख यात्रा से चीन को मिला कड़ा संदेश

पिछले दो महीने से देश की उत्तरी सीमा पर चीन की खतरनाक मंशा के बादलों का बवंडर गहराया हुआ था. मई के पहले सप्ताह में शुरू हुआ यह तूफान अपने चरम पर पहुंचा जब 15/16 जून को गलवान घाटी में हमारे सैनिकों के साथ चीनी सैनिकों की हिंसक झड़प हुई. विश्वास के माहौल में गहरी दरार पड़ गई. विभिन्न स्तरों पर हुई बातचीत के दौर में अब तक कोई हल नहीं निकल पाया है. हर भारतीय को इस बात का इल्म हो चुका था कि चीन ने हमारे साथ धोखा किया है. जन आक्रोश का गुबार फूट पड़ा- चीनी सामान को भारत से बाहर करने की सबने ठान ली- चीन को 20 भारतीय सैनिकों की शहादत का जवाब देने के लिए देश एकजुट हुआ.

शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्नी नरेंद्र मोदी की आकस्मिक और गोपनीय लद्दाख यात्ना ने सबको चौंका दिया. इस यात्ना के कई पहलू हैं और देश की सुरक्षा से जुड़े कई समीकरणों को समझना जरूरी है. सीमा पार तो संदेश पहुंच ही गया, लेकिन प्रधानमंत्नी का सीमा के अग्रिम मोर्चे तक जाना, देश के भीतर भी एक नए जुनून को जन्म दे गया है. देश का सैनिक कहीं भी हो, उस तक यह बात पहुंच चुकी है- सैनिकों से रूबरू होकर स्वयं प्रधानमंत्नी जमीनी हालात का जायजा ले रहे हैं, चीन से सटी हमारी सीमा पर मौजूदा स्थिति और उससे जूझते हमारे सैनिकों से संवाद कर रहे हैं. यह संवाद बेहद महत्वपूर्ण है, एक नई ऊर्जा का संचार सेना के हर तबके में होगा.

गलवान के हादसे के तुरंत बाद वायुसेना प्रमुख लेह पहुंचे थे- वायुसेना की तैयारी का जायजा लिया था. उसी दिन प्रधानमंत्नी ने कहा था- जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा! देश की जनता ने इन शब्दों से भी भविष्य की सोच पर पहेलियां सुलझाना शुरू किया था. 18 जून को चीन के विदेश मंत्नी ने हमारे विदेश मंत्नी से फोन पर बातचीत की. इस बातचीत में हमने चीन को गलवान की हत्याओं के लिए जिम्मेवार ठहराया है. अब जब प्रधानमंत्नी लेह गए हैं, तब भी राष्ट्र इस दौरे के रणनीतिक और सामरिक महत्व का आकलन करने में जुटा है.  

इस बीच सेना मुख्यालय ने देश की सरहद पर सभी जरूरी सामान, गोला-बारूद, टैंक, तोपें, विशेष यूनिट और सैनिकों की मौजूदगी बढ़ा दी है. लेह और उससे आगे के इलाकों में सभी जरूरी सैन्य सामान को पहुंचाने में आर्मी सर्विस कोर ने बड़े वाहन, वायुसेना के मालवाहक विमान और अग्रिम मोर्चो के लिए हेलिकॉप्टर मुहैया कर रसद पूर्ति की है. हमारी वायुसेना ने अपाचे और चिनूक हेलिकॉप्टरों को वायुसेना के अग्रिम बेस पर भेज दिया, साथ भी एसयू 30 एमकेआई, जगुआर, मिग लड़ाकू विमानों की तैनाती अग्रिम इलाकों में की गई है. यह सिर्फ उत्तर में लद्दाख ही नहीं बल्कि चीन के साथ पूर्वी इलाके में मौजूद सीमा तक की रखवाली की जरूरत का हिस्सा बन गया था.

क्या प्रधानमंत्नी का लद्दाख में होना चीन को एक बहुत बड़ा संदेश नहीं दे रहा? देश का प्रधानमंत्नी जब देश की अग्रिम सीमा तक पहुंच कर स्वयं देख रहा है जमीनी हालात तब चीन जैसा देश भी सोचने को मजबूर हो जाता है! क्या प्रधानमंत्नी का यह दौरा चीनी सेना को अपनी हरकतों पर नकेल कसने के लिए मजबूर कर पाएगा? सामरिक रूप से चीनी विश्लेषक भारतीय प्रधानमंत्नी की लद्दाख यात्ना को किस नजर से देखेंगे? क्या हम इसे राजनय का मास्टर स्ट्रोक मानेंगे?

सीमा पर मौजूद हमारे सैनिकों से रूबरू होकर प्रधानमंत्नी के साथ होने वाली बातचीत से बहुत कुछ सामने आएगा. नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक के दफ्तरों से बाहर आकर जमीन पर सही आकलन किया जा सकता है- यह सर्वविदित है. सेना की जरूरतों का तुरंत हल निकलेगा और कई जरूरी फौजी सामान को खरीदने की मंजूरी तुरंत दी जा सकेगी. फाइलों में उलङो हुए सरकारी कर्मचारी अपनी सोच से कई बातों को एक अलग अंदाज में पेश करने में माहिर हैं. लेकिन सीमा पर खड़ा 

एक सैनिक अपनी असली जरूरतों का आकलन लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों से ऊपरी मोर्चो पर खुद बयान करता हुआ नजर आता है. सेना की हौसला अफजाई इस किस्म के दौरे का एक अहम हिस्सा है, लेकिन सबसे जरूरी है सीमा पार संदेश पहुंचाना. यह बेहद जरूरी है. इसके चलते देश का प्रधानमंत्नी अपने निर्णय शीघ्र लेता है, जानकारी का अभाव नहीं होता और समय नहीं बेकार जाता-निर्णय लेने में हम एक कदम आगे बढ़ जाते हैं. गलवान घाटी में हुए दर्दनाक हादसे में घायल हुए सैनिकों से भी प्रधानमंत्नी मिले. इसमें कोई दो राय नहीं कि उन्हें 16 जून के हादसे का आंखों देखा हाल सुनने को मिला- उन शूरवीर जवानों से जो उस रात चीनी घात का शिकार हुए थे.

गलवान में हुए नरसंहार के बाद रक्षा मंत्नालय ने रणनीति में बदलाव किया है. हथियार के इस्तेमाल के लिए मंजूरी देने का जिम्मा फील्ड कमांडरों पर सौंपा गया है. प्रधानमंत्नी ने गलवान घाटी में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए सैनिकों के साथ अपनी बातचीत में उनकी शहादत को याद किया. प्रधानमंत्नी ने चीन का नाम लिए बगैर यह कहा कि विस्तारवाद का युग समाप्त हो चुका है और अब विकासवाद का युग है. इसके अलावा एक महत्वपूर्ण बात भी कही गई कि लद्दाख का पूरा हिस्सा हमारा है. अब देखना होगा कि क्या हम चीन के साथ बातचीत से उसकी सेना को पीछे धकेल सकेंगे या फिर कोई नया पैंतरा बदल कर चीनी ड्रैगन नई फुंकार मारेगा. इसका जवाब अब हमें देना ही होगा-हम तैयार हैं!

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