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पुलवामा : निर्देषों की हत्या बेहद शर्मनाक

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: February 21, 2019 19:09 IST

एक और बेहद शर्मनाक और कड़ी से कड़ी भर्त्सना के काबिल अमानवीय आतंकवादी हरकत पुलवामा में की गई. एक बार फिर इन्सानों के खून से खेला गया. टेलीविजन पर खबरें देखने से दिल लरज उठा.

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(लेखक-अब्दुल मजीद पारेख)

एक और बेहद शर्मनाक और कड़ी से कड़ी भर्त्सना के काबिल अमानवीय आतंकवादी हरकत पुलवामा में की गई. एक बार फिर इन्सानों के खून से खेला गया. टेलीविजन पर खबरें देखने से दिल लरज उठा. दूसरे दिन का अखबार देखा तो लगा मानो खून से लथपथ अखबार पढ़ रहे हैं. मैं दिली हमदर्दी पेश करता हूं इस जघन्य हत्याकांड में शहीद हुए लोगों के घर वालों के लिए.  घायल लोगों के लिए अल्लाह से दुआ है कि उन्हें जल्द से जल्द सेहतयाब कर दे. सारे देश के मुसलमानों ने जगह-जगह अपने प्रदर्शनों में अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए  इस बात का सबूत दिया कि उनका पाकिस्तान से और आतंकवाद से कोई  रिश्ता नहीं है.

इस गैर इंसानी कांड पर पूरे भारत में अमन और शांति का वातावरण बना  रहा. मैं इस पर संसार के मालिक का आभारी हूं कि इस भयानक आतंकवादी हरकत के पीछे छिपे इरादों को कामयाब न होने दिया और देश की धर्मनिरपेक्षता  और लोकतांत्रिक वातावरण को बनाए रखा. सारा देश शोक में डूब गया कि मुल्क की रक्षा करने वाले फौजी जवान की जानें कुर्बान हुईं. इस्लाम में आत्मघाती हमले की कड़ी से कड़ी निंदा की गई है कि कोई भी इंसान किसी एक भी इंसान की बिना वजह से जान लेता है तो मानो उसने सारे इंसानों की हत्या कर दी. और यह भी बताया गया कि जमीन पर अल्लाह को किसी भी किस्म का फसाद बिलकुल पसंद नहीं. खून किसी का भी गिरे नस्ले आदम का खून  है. खून के नापाक धब्बे अल्लाह से कैसे छिप सकते हैं. मासूमों की कब्र पर चढ़ कर जन्नत में नहीं जाया जा सकता. जिस काम को आत्मघाती दस्ता दिलेरी और बहादुरी  का काम समझ रहा है यह कतई इस्लाम नहीं है. मुङो भारत की जनता पर गर्व है कि अपने दुख और संवेदना का इजहार शांतिपूर्वक किया और देश की धर्मनिरपेक्षता का सबूत दिया. ऐसी मोहब्बत का सबूत दिया जिसमें अहम नाम कि कोई चीज नहीं जिसमें मतभेद का कोई किला नहीं, गुस्से का कोई पहाड़ नहीं नफरत का कोई जज्बा नहीं.

संसार के मालिक की अदालत में मुजरिम बिल्कुल नहीं बच सकते जैसा कुरआन में कहा गया ‘‘जो कोई किसी की जान-बूझकर हत्या करे उसकी सजा हमेशा-हमेशा के लिए नर्क वाली होगी और अल्लाह उस पर लानत और धिक्कार भेजेगा और बड़ी दर्दनाक सजा ऐसे लोगों के लिए तैयार की गई है.

पवित्र कुरआन में इस संसार के मालिक ने हजरत मोहम्मद पैगंबर (स) को बतौर दूत नियुक्त किया. उनके संदेश में महजबी तानाशाही की कोई जगह नहीं. पवित्र कुरआन में कहा गया कि, ‘‘अगर तुम्हारा रब चाहता तो इस धरती पर सारे के सारे इंसान एक ही महजब के होते! तो क्या ऐ मोहम्मद आप किसी पर जबरदस्ती करेंगे इसे मानने के लिए? मजहब  के मामले में कोई जबरदस्ती नहीं, कोई नहीं और मजहब को चुनने के लिए तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन-धर्म मेरे लिए मेरा दीन धर्म!’’

अब कोई अपनी अंतरात्मा से एक सवाल करे, जो सारी दुनिया के लिए रहमत, करुणा, दया हो क्या वह नफरत, हिंसा, अराजकता, दहशतगर्दी, कट्टरवाद, आतंकवाद की तालीम दे सकता हैं. पवित्र कुरआन और हदीस शरीफ में इंसानी जान की कीमत में रंग व नस्ल, खानदान व बिरादरी या महजब की कोई शर्त नहीं है. इसी तरह इस दुनिया में कोई किसी से बरतर या कमतर नहीं है

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