किरण चोपड़ा
मैं हर धर्म को मानती हूं. हर समाज से जुड़ी और मुझे हर स्थान पर बोलने, सुनने का अवसर प्राप्त होता है, परंतु इस बार जब मुझे मोरारी बापू और आचार्य लोकेश मुनि जी द्वारा रामकथा को सुनने और वहां बोलने का अवसर मिला तो मैं इन दोनों संतों के सामने नमन हुई. क्या मिसाल कायम की है. आज के युग में जब विश्व शांति, आपसी भाईचारे और समाज में बढ़ रही कुरीतियों को दूर करने के लिए संस्कारों की जरूरत है, दोनों आवश्यकताओं को दोनों संत मिलकर पूरा कर रहे हैं.
अगर हमारे देश की संस्कृति, संस्कार जीवित हैं तो ऐसे संतों के ही कारण, जो समय-समय पर समाज को अपने प्रवचनों से जगाते हैं, संस्कार भरते हैं.
मैंने आचार्य लोकेश मुनि जी के साथ बहुत से मंच पिछले 20-25 वर्षों में शेयर किए. वह भी हर समाज से जुड़े हैं. यहां तक कि कोराना के समय हमने आनलाइन प्रोग्राम भी किए, परंतु इस प्रयास के लिए उन्होंने जो मेहनत की, कई महीनों से वे हर समाज, हर संगठन में जाकर निमंत्रण दे रहे थे और वो सब मेहनत नई दिल्ली के भारत मंडपम में देखने को मिली.
जो हर समाज, हर वर्ग के लोगों से खचाखच भरा हुआ था और बहुत ही सुनियोजित था. सबसे बड़ी बात वहां हर उम्र के लोग थे और मुझे यूथ यानी युवा वर्ग भी बहुत नजर आया. सही मायने में बापू जी की रामकथा केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज और राष्ट्र तथा पूरी मानवता से संवाद करती है, क्योंकि राम सबके हैं और सब राम के हैं. आचार्य लोकेश मुनि जी जैन समाज के संत हैं और अहिंसा, करुणा, संयम और शांति का संदेश देते हैं. वे धर्म को जोड़ने वाला माध्यम मानते हैं, तोड़ने वाला नहीं.
उनके अनुसार धर्म का उद्देश्य इंसान को बेहतर बनाना है, समाज में भाईचारा और नैतिकता बढ़ाना है. आज के समय में जब समाज में तनाव है, टूटन बढ़ रही है. रामकथा जोड़ने का काम करती है और जब कथा मोरारी बापू कर रहे हों तो सरल भाषा से लोगों के दिलों को छूते हैं और लोगों के दिल में रामकथा की मर्यादा, संस्कारों को जोड़ते हैं. इसीलिए आज रामकथा की बहुत जरूरत है, क्योंकि समाज को नैतिक दिशा की जरूरत है, धर्म को मानवता से जोड़ना आवश्यक है.
मोरारी बापू जी केवल कथा वाचक ही नहीं वे मानवता के संदेशवाहक भी हैं. उनकी सरल कथा हृदय को छूती है और समाज को जोड़ती है. धर्म का उद्देश्य किसी को बांटना नहीं बल्कि इंसान को इंसान से जोड़ना है और जब मोरारी बापू जी और लोकेश मुनि जी जैसे संत एक साथ आते हैं तो यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं रहता, यह सामाजिक और मानवीय आंदोलन बन जाता है. यह आंदोलन समाज को विशेषकर युवाओं को सही दिशा दिखाएगा.
आचार्य लोकेश मुनि और मोरारी बापू ने विश्व शांति की ओर बहुत सराहनीय कदम बढ़ाया है और जिन्होंने इस आयोजन में योगदान दिया उनको साधुवाद. वाकई संतों! आप दोनों ने कमाल कर दिया.