रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का ब्लॉग: महात्मा गांधी की नई तालीम के अनुरूप शिक्षा नीति

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Published: May 14, 2022 01:27 PM2022-05-14T13:27:11+5:302022-05-14T13:30:05+5:30

देश की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, महात्मा गांधी की ‘नई तालीम’ का अनुकरण करती है. नई शिक्षा नीति में भी प्राथमिक या माध्यमिक कक्षाओं में शिक्षा का माध्यम मातृभाषा रखने का प्रस्ताव किया गया है. विद्यार्थियों में उद्यमिता बढ़ाने के लिए कौशल प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है.

national education policy mahatma gandhi language | रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का ब्लॉग: महात्मा गांधी की नई तालीम के अनुरूप शिक्षा नीति

रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का ब्लॉग: महात्मा गांधी की नई तालीम के अनुरूप शिक्षा नीति

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Highlightsदेश की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, महात्मा गांधी की ‘नई तालीम’ का अनुकरण करती है.गांधीजी का मानना था कि एक छात्र को पहले उसकी मातृभाषा में पढ़ाया जाना चाहिए.राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से छात्रों के लिए व्यावसायिक एवं उच्च शिक्षा पर जोर दिया गया है.

कुछ दिन पूर्व ही मुझे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के तीर्थ, वर्धा आने का सुअवसर मिला. वर्धा और विदर्भ की पावन भूमि महात्मा गांधी, विनोबा भावे और डॉ. आंबेडकर के जीवन दर्शन की साक्षी रही है. 

वर्धा राष्ट्र के लिए प्रेरणा का केंद्र रहा है. 1937 में यहीं, महात्मा गांधी ने नई और व्यावहारिक शिक्षा प्रणाली, ‘नई तालीम’ प्रस्तावित की थी. महात्मा गांधी ने आज से 100 साल पहले नई तालीम के माध्यम से जिस नई शिक्षा नीति के सिद्धांतों और प्रणाली का सपना देखा था, उसे आज के समय में पूरा किया जा रहा है. 

महात्मा गांधी ने शिक्षा के माध्यम से ही सत्य, शांति और अहिंसा का मार्ग देश की जनता को दिखाया था. गांधीजी की नई तालीम की एकदम आधुनिक संदर्भ में व्याख्या करते हुए विनोबा भावे ने कहा था कि यह कोई किसी खांचे में बंद प्रणाली नहीं है. 

यह सीखने और जीवन जीने का एक दर्शन है. यह नई राजनीति, नई अर्थव्यवस्था, नई आध्यात्मिकता और एक नया अहिंसक समाज बनाने का कुतुबनुमा है. यहां शिक्षा जीवन का अंग नहीं बल्कि जीवन शिक्षा के भीतर है. 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, आधुनिक शैक्षिक विचारधाराओं और विचार प्रक्रिया के कई पहलुओं के अलावा शिक्षा पर गांधीवादी विचारों की याद दिलाती है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बहुभाषावाद और भाषा, जीवन कौशल, नैतिकता और मानव, संवैधानिक मूल्यों, रचनात्मकता और बहुविषयकता, समग्र शिक्षा आदि की शक्ति को बढ़ाने की क्षमता है. 

शिक्षा में गांधीजी ने सबसे पहले व्यक्तिगत चरित्र के गठन पर जोर दिया. गांधीजी ने कहा था कि एक मजबूत चरित्र के बिना कोई भी जीवन के किसी भी क्षेत्र में विशिष्टता हासिल नहीं कर सकता है. चरित्र के निर्माण में व्यवहार, अहिंसा और सत्यता बहुत महत्वपूर्ण घटक होते हैं. 

गांधीजी ने मातृभाषा को स्वराज से जोड़ा. उनका मानना था कि स्वराज का अर्थ ये नहीं है कि किसी पर कोई भाषा थोपी जाए. सबसे पहले मातृभाषा को ही महत्व दिया जाना चाहिए. 

देश की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, महात्मा गांधी की ‘नई तालीम’ का अनुकरण करती है. नई शिक्षा नीति में भी प्राथमिक या माध्यमिक कक्षाओं में शिक्षा का माध्यम मातृभाषा रखने का प्रस्ताव किया गया है. विद्यार्थियों में उद्यमिता बढ़ाने के लिए कौशल प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है. इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मातृभाषा और कौशल पर अधिक जोर दिया गया है. 

गांधीजी का मानना था कि एक छात्र को पहले उसकी मातृभाषा में पढ़ाया जाना चाहिए और उसके बाद राष्ट्रभाषा का परिचय दिया जाना चाहिए और जब वह रुचि और बुद्धिमत्ता का विकास करता है तो वह अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को भी सीख सकता है. उनका मानना था कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिससे छात्र जीवन की लड़ाई में सफलता प्राप्त करे. 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से छात्रों के लिए व्यावसायिक एवं उच्च शिक्षा पर जोर दिया गया है, ताकि छात्रों के लिए रोजगार को आसान बनाया जा सके. वह जीवन और दुनिया की समस्याओं के बारे में स्पष्ट और आलोचनात्मक तरीके से सोचने और इसके समाधानों को विकसित करने में भी सक्षम हो.

शिक्षा प्रणाली में क्रांति लाने के लिए गांधीजी ने ‘वास्तविक शिक्षा प्रणाली’ की शुरुआत की थी और इसका प्रारंभ टॉल्स्टॉय फार्म से प्रयोगों से हुआ था, जहां ‘नई तालीम’ के बीज बोए गए थे. 

भारत लौटने के बाद वर्धा के सेवाग्राम में उनके काम ने उन्हें बुनियादी शिक्षा प्रणाली की जड़ें स्थापित करने में मदद की, एक ऐसी प्रणाली, जिसमें शिक्षा मुफ्त और अनिवार्य थी और मातृभाषा में प्रदान की जाती है.

शिक्षा की प्रक्रिया शारीरिक और उत्पादक कार्यों पर केंद्रित थी, जो बच्चे के वातावरण के करीब है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति इक्कीसवीं शताब्दी की आवश्यकताओं और मांगों को पूरा करने के लिए अपनी रणनीतियां बनाते हुए, गांधीजी के दृष्टिकोण को भी रेखांकित करती है. 
ऐसे कई तरीके हैं, जो उनकी शिक्षा प्रणाली भारत और पूरे विश्व में शिक्षा के मुद्दे पर वाद-विवाद प्रस्तुत करने के लिए उपयुक्त हैं. इनमें पहला है- ‘शांति के लिए शिक्षा’. 

गांधीजी के लिए सत्य और अहिंसा श्रेष्ठ मूल्य थे. छात्रों को मानव समुदाय के बीच शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक जीवन के लिए तैयार रहना चाहिए, नई तालीम उसी की अभिव्यक्ति थी. 

हमारी नई शिक्षा नीति का मूल सिद्धांत अच्छे मनुष्य विकसित करना है, जो समतापूर्ण और समावेशी समाज के विकास में योगदान दे सकें, जिसमें तर्क, करुणा, सहानुभूति, सहनशीलता, वैज्ञानिक प्रवृत्ति तथा नैतिकता और मूल्यों को कायम रखने के साथ-साथ सर्जनात्मकता का भी समावेश हो. 

दूसरी प्रमुख बात मातृभाषा की आती है. गांधीजी ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चे की शिक्षा में मातृभाषा को केंद्रीय या प्रमुख स्थान मिलना चाहिए. उनके सिद्धांतों को प्रतिध्वनित करते हुए, नई शिक्षा नीति बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है और स्पष्ट करती है कि जहां भी संभव हो, शिक्षा का माध्यम घरेलू भाषा, मातृभाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा होनी चाहिए. 

गांधीजी का मानना था कि शारीरिक प्रशिक्षण ही बुद्धि को बढ़ाने का साधन है. व्यावसायिक शिक्षा को यांत्रिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी पढ़ाया जाना चाहिए. प्रयोगवाद, निर्माणवाद जैसे सिद्धांत व्यावसायिक शिक्षा के समावेश के माध्यम से ही समृद्ध होंगे. 

श्रम की गरिमा-महत्ता का संरक्षण पहले किया जाना चाहिए. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आगमन के साथ कला और विज्ञान, पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या गतिविधियों, व्यावसायिक और अकादमिक धाराओं के बीच सख्त विभाजन नहीं होगा. 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति गांधीजी की परिकल्पना के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करती है, जो 2025 तक कम से कम 50 फीसदी स्कूल व उच्च शिक्षा प्रणाली को व्यावसायिक शिक्षा के साथ संबद्ध करने का प्रयास करेगी.

Web Title: national education policy mahatma gandhi language

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