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जयंतीलाल भंडारी ब्लॉग: चीन से आयात पर अंकुश लगाने की पहल

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 14, 2023 11:48 IST

पिछले माह 23 फरवरी को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एशिया इकोनॉमिक डायलॉग में कहा कि चीन से व्यापारिक असंतुलन की गंभीर चुनौती के लिए सिर्फ सरकार ही जिम्मेदार नहीं है, चीन के साथ व्यापार असंतुलन के लिए सीधे तौर पर देश का उद्योग-कारोबार और देश की कंपनियां भी जिम्मेदार हैं।

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ठळक मुद्दे वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने चीन से आयात करने वाले समानों पर नियंत्रण करने के लिए कदम उठाया हैबीते कुछ समय में चीन और भारत सीमा पर विवाद काफी अधिक हुआ हैचीन-भारत बॉर्डर पर झड़प के बाद भी हमारी चीन पर निर्भरता बनी रही जिस पर सरकार अकुंश लगाना चाहती है

हाल ही में वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 7 मार्च को एक एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के कार्यक्रम में कहा कि जल्द ही चीन से आयात होने वाले घटिया स्तर के 2000 उत्पादों को गुणवत्ता नियंत्रण के दायरे में लाया जाएगा। साथ ही चीन से सस्ता माल मांगना आसान नहीं होगा। मैन्युफैक्चरिंग के प्रोत्साहन के लिए बड़े पैमाने पर गुणवत्ता मानक का नियम लागू होगा।

इस समय जब चीन से हर तरह का आयात बढ़ रहा है और चीन से देश का व्यापार असंतुलन चिंताजनक स्तर पर है, तब सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है। इससे चीन से आयात पर अंकुश लगेगा। गौरतलब है कि इस समय चीन से लगातार बढ़ता व्यापार असंतुलन पूरे देश की एक बड़ी आर्थिक चिंता का कारण बन गया है और इस पर पूरे देश में विभिन्न स्तरों पर विचार मंथन हो रहा है।

पिछले माह 23 फरवरी को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एशिया इकोनॉमिक डायलॉग में कहा कि चीन से व्यापारिक असंतुलन की गंभीर चुनौती के लिए सिर्फ सरकार ही जिम्मेदार नहीं है, चीन के साथ व्यापार असंतुलन के लिए सीधे तौर पर देश का उद्योग-कारोबार और देश की कंपनियां भी जिम्मेदार हैं। उन्होंने कलपुर्जे सहित संसाधनों के विभिन्न स्रोत और मध्यस्थ विकसित करने में अपनी प्रभावी भूमिका नहीं निभाई है। साथ ही देश की बड़ी कंपनियां शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में भी बहुत पीछे हैं।

विगत 17 फरवरी को वाणिज्य मंत्रालय ने भारत-चीन व्यापार के वित्त वर्ष 2022-23 के अप्रैल 2022 से जनवरी 2023 तक 10 महीनों के आयात-निर्यात के जो नवीनतम आंकड़े जारी किए हैं, उनके मुताबिक इन 10 महीनों की अवधि में चीन से किए जाने वाले आयात में 9 फीसदी का उछाल आया है जबकि इस अवधि में चीन को किए जाने वाले निर्यात में 34 फीसदी की भारी कमी आई है। वित्त वर्ष 2022-23 के पहले 10 महीनों में भारत के द्वारा किए जाने वाले कुल आयात में चीन की हिस्सेदारी 13.91 फीसदी है।

भारत ने 10 महीनों में कुल 8376 अरब डॉलर का आयात चीन से किया है जबकि इसी अवधि में भारत ने चीन को केवल 12.20 अरब डॉलर का निर्यात किया है। भारत द्वारा किए जाने वाले निर्यात में चीन की हिस्सेदारी केवल 3.30 फीसदी है। स्थिति यह है कि इस समय जहां दुनिया के 150 से अधिक देशों में भारत से किए जाने वाले निर्यात में लगातार बढ़ोत्तरी देखने को मिली है, वहीं चीन को निर्यात में लगातार कमी का परिदृश्य उभरकर दिखाई दे रहा है।

यद्यपि पिछले दो सालों में चीन और भारत के बीच सीमा पर तनाव बढ़ा है, यहां तक कि कई बार हिंसक झड़पें हुई हैं, लेकिन फिर भी व्यापार के क्षेत्र में भारत की चीन पर निर्भरता भी लगातार बढ़ी है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि वर्ष 2014-15 से स्वदेशी उत्पादों को हर संभव तरीके से प्रोत्साहित करके चीन से आयात घटाने के प्रयास हुए हैं।

वर्ष 2019 और 2020 में चीन से तनाव के कारण जैसे-जैसे चीन की भारत के प्रति आक्रामकता और विस्तारवादी नीति सामने आई, वैसे-वैसे प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों के उपयोग की लहर देश भर में बढ़ती हुई दिखाई दी। देशभर में चीनी सामान के जोरदार बहिष्कार और सरकार के द्वारा टिकटॉक सहित विभिन्न चीनी एप्प पर प्रतिबंध, चीनी सामान के आयात पर नियंत्रण, कई चीनी सामान पर शुल्क वृद्धि, सरकारी विभागों में चीनी उत्पादों की जगह यथासंभव स्थानीय उत्पादों के उपयोग की प्रवृत्ति को लगातार प्रोत्साहन दिए जाने से चीन के सामानों की भारत में मांग में कमी दिखाई दी है।

इसमें कोई दो मत नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा बार-बार स्थानीय अर्थव्यवस्था का समर्थन करने और वोकल फॉर लोकल मुहिम के प्रसार ने स्थानीय उत्पादों की खरीदी को पहले की तुलना में अधिक समर्थन दिया। जहां वर्ष 2022 में दीपावली पर्व पर भारतीय बाजारों में चीनी उत्पादों की बिक्री में बड़ी कमी आई, वहीं मार्च 2023 में होली पर्व पर चीनी उत्पाद बाजार से लगभग गायब रहे।

यह भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान में मैन्युफैक्चरिंग के तहत 24 सेक्टर को प्राथमिकता के साथ तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। चीन से आयात किए जाने वाले दवाई, रसायन और अन्य कच्चे माल का विकल्प तैयार करने के लिए पिछले दो वर्ष में सरकार ने प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव (पीएलआई) स्कीम के तहत 14 उद्योगों को करीब दो लाख करोड़ रुपए आवंटन के साथ प्रोत्साहन सुनिश्चित किए हैं।

हम उम्मीद करें कि जिस तरह भारतीय खिलौना उद्योग ने चीन से खिलौनों के आयात में भारी कमी करके चमकीली मिसाल बनाते हुए देश और दुनिया को अचंभित किया है, उसी तरह उद्योग-कारोबार के अन्य क्षेत्रों में भी चीन से आयात घटाने और चीन को निर्यात बढ़ाने के नए अध्याय लिखे जाएंगे।

हम उम्मीद करें कि चीन से घटिया स्तर के सामानों के आयात पर अंकुश लगाने से चीन के साथ देश के व्यापार असंतुलन में कमी आएगी। हम उम्मीद करें कि एक बार फिर से देश के करोड़ों लोग चीनी उत्पादों की जगह स्वदेशी उत्पादों के उपयोग के नए संकल्प के साथ आगे बढ़ेंगे।

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