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ब्लॉग: 10 साल की बच्ची ने पीएम मोदी से पूछा चौंका देने वाला सवाल और तेज हो गई अगले राष्ट्रपति को लेकर सुगबुगाहटें

By हरीश गुप्ता | Updated: August 19, 2021 10:13 IST

देश का अगला राष्ट्रपति कौन होगा, इस चर्चा के बीच कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत का नाम अचानक सामने आ गया है. यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का भी नाम लिया जा रहा है.

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संसद में रिकॉर्ड संख्या में विधेयक पारित होने के बावजूद हालिया मानसून सत्र किसी भी सार्थक बहस के संदर्भ में भले ही विफल रहा हो, लेकिन सत्ता के गलियारों में ऐसी खबरें थीं कि भाजपा नेतृत्व ने जुलाई-अगस्त 2022 में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों पर आम सहमति बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 में उस समय चौंका दिया था जब रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार के रूप में नामित किया गया था. यह आम धारणा थी कि आरएसएस 70 साल बाद राष्ट्रपति भवन में अपने कैडर के किसी व्यक्ति को देखना पसंद करेगा. लेकिन प्रधानमंत्री की योजना कुछ और थी, और उन्होंने इस प्रतिष्ठित पद के लिए बिहार के राज्यपाल को चुना. 

एम. वेंकैया नायडू राजनीति में सक्रिय भूमिका जारी रखने के इच्छुक थे और उम्र भी उनके पक्ष में थी. लेकिन मोदी एक समर्पित पार्टी कार्यकर्ता को उपराष्ट्रपति पद पर देखना चाहते थे, जो राज्यसभा को चलाने में सक्षम हो. अब वे राष्ट्रपति पद के लिए संभावित उम्मीदवारों की कतार में सबसे आगे हैं. लेकिन राह इतनी आसान नहीं है. 

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत का नाम अचानक सामने आ गया है. वे राज्यसभा के नेता थे और सेवानिवृत्ति की निर्धारित आयु 75 वर्ष तक पहुंचने में अभी दो वर्ष बाकी थे. लेकिन उन्होंने अचानक ही कर्नाटक का राज्यपाल बनने के लिए कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया. वे एक दलित, मृदुभाषी और पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं. 

भाजपा सोशल इंजीनियरिंग की राह पर है और इसी सिलसिले में गहलोत का नाम लिया जा रहा है. चूंकि गुजरात पसंदीदा है और हर प्रमुख पद पर वहीं के लोगों का कब्जा है इसलिए यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का भी नाम लिया जा रहा है. वे एक महिला और मोदी की वफादार हैं. कुछ जानकार लोगों को यह भी लगता है कि कोविंद को दूसरा कार्यकाल भी दिया जा सकता है बशर्ते मोदी के मन में कोई अन्य योजना न हो.

कैसे बहस छिड़ी?

महाराष्ट्र की 10 साल की एक स्कूली छात्रा द्वारा किए गए एक सीधे-सादे सवाल ने प्रधानमंत्री को चकरा दिया. उसने पीएम मोदी से पूछा कि वे भारत के राष्ट्रपति कब बनेंगे. आखिरकार, भारत के राष्ट्रपति का पद राजनीतिक रूप से सर्वोच्च है, हालांकि प्रधानमंत्री को सरकार के मामलों में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता है. बच्ची को अपने सरल प्रश्न के राजनीतिक निहितार्थ का कोई अंदाजा नहीं था. 

प्रत्यक्षदर्शियों के कथनानुसार, प्रधानमंत्री केवल मुस्कुराए और लड़की के परिवार के सदस्यों ने उसे आगे प्रश्न करने से मना किया. बच्ची के प्रतिष्ठित परिवारजनों में राधाकृष्ण विखे पाटिल, उनके बेटे, जो वर्तमान में भाजपा सांसद हैं और अन्य शामिल थे. वे काफी शर्मिदा भी थे क्योंकि उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि लड़की के दिमाग में क्या चल रहा है. 

बैठक समाप्त हो गई, लेकिन यह सामने आ गया कि अगले साल होने वाले राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों के बारे में राजनीतिक दलों के बीच क्या चल रहा था.

क्षेत्रीय दलों से भाजपा की बातचीत

हाल ही में संपन्न हुए संसद के मानसून सत्र में शीर्ष नेताओं के बीच इस मुद्दे पर प्रारंभिक चर्चा हुई. कहा जाता है कि मोदी सरकार में एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने वाईएसआर कांग्रेस नेता के साथ संसद में अनौपचारिक चर्चा की. भाजपा के मंत्री ने जानना चाहा कि क्या वाईएसआर कांग्रेस की दोनों पदों (राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति) के लिए कोई पसंद या नापसंदगी है. 

भाजपा दोनों पदों के लिए अपने उम्मीदवारों पर सर्वसम्मति बनाने के लिए काम कर रही है और अनौपचारिक रूप से वाईएसआर कांग्रेस, टीआरएस, बीजू जनता दल जैसे गैर-भाजपा गैर-कांग्रेसी दलों से बात कर रही है. 

इस कवायद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य लोग शामिल हैं. दोनों समूहों के बाद वाईएसआर कांग्रेस, बीजद, टीआरएस के पास संसद में सांसदों की सबसे बड़ी संख्या है.

राजनाथ छुपे रुस्तम!

भाजपा पर नजर रखने वालों का कहना है कि पार्टी इन दिनों पीढ़ीगत बदलाव के दौर से गुजर रही है. अगर 2014 में मोदी के पहले कार्यकाल में सरकार में 75 साल से अधिक उम्र के राजनेताओं को आराम दिया गया, तो 2021 में एक और बदलाव भी देखा गया. 

राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे कुछ प्रमुख नेताओं को छोड़कर, कोई भी अटल-आडवाणी युग से संबंधित नहीं है. अगर राजनाथ सिंह ने बेहिसाब लचीलापन दिखाया है, तो सार्वजनिक रूप से गडकरी की स्पष्ट टिप्पणियों ने कई लोगों की भौंहें चढ़ा दीं. 

गडकरी के बारे में उस मुद्दे पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है जिसमें उनके अपने राज्य के पार्टी अध्यक्ष ने उनकी सहकारी कंपनियों के संबंध में एक शिकायत दर्ज की है. हाल के फेरबदल में भी मोदी ने आरएसएस के बाहर एक बड़े दल को चुना. 

इसी संदर्भ में भाजपा में कई लोगों का मानना है कि राजनाथ सिंह को अगले उपराष्ट्रपति के रूप में आगे बढ़ाया जा सकता है. चतुर ठाकुर रायसीना हिल्स के महलनुमा भवन में स्थायित्व पाकर खुश ही होंगे.

टॅग्स :नरेंद्र मोदीरामनाथ कोविंदBharatiya Janata Partyएम. वेकैंया नायडूसंसद मॉनसून सत्रराजनाथ सिंहनितिन गडकरीआनंदीबेन पटेलथावर चंद गहलोत
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