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ब्लॉग: गोवा - पुर्तगाली अतीत से सनातन की ओर

By विवेक शुक्ला | Updated: March 19, 2024 09:42 IST

जिस गोवा के सांस्कृतिक आकर्षण को लेकर कभी एलेक पद्मसी जैसे दिग्गज लेखक कहते थे कि समुद्र के किनारे भारत का यह हिस्सा वेस्टर्न कल्चर का ईस्टर्न गेटवे है, वह गोवा आज सनातन और अध्यात्म के साथ अपने कल्चरल डीएनए पर नाज कर रहा है।

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ठळक मुद्देगोवा की इमेज इस तरह की बनाई जाती रही कि मानो यह भारत में यूरोप का कोई अंग होगोवा पर लंबे समय तक पुर्तगाल का नियंत्रण रहा गोवा अपने सनातन और भारतीय मूल्यों से जुड़ने को बेकरार है

गोवा की इमेज इस तरह की बनाई जाती रही कि मानो यह भारत में यूरोप का कोई अंग हो। हां, गोवा पर लंबे समय तक पुर्तगाल का नियंत्रण रहा. उसका असर होना लाजिमी है पर अब गोवा अपने सनातन और भारतीय मूल्यों से जुड़ने को बेकरार है। शताब्दियों लंबे विदेशी प्रभाव और हस्तक्षेप के बावजूद गोवा लगातार भारतीय परंपरा के साथ जुड़ा रहा। 

जिस गोवा के सांस्कृतिक आकर्षण को लेकर कभी एलेक पद्मसी जैसे दिग्गज लेखक कहते थे कि समुद्र के किनारे भारत का यह हिस्सा वेस्टर्न कल्चर का ईस्टर्न गेटवे है, वह गोवा आज सनातन और अध्यात्म के साथ अपने कल्चरल डीएनए पर नाज कर रहा है। गोवा का यह नाज वहां के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के संकल्प के साथ और मजबूत हुआ है। उन्होंने गोवा के पर्यटन को आध्यात्मिक राष्ट्रवाद का नया टेम्प्लेट दिया है।

बेशक, डॉ. प्रमोद सावंत आज जब अपने प्रदेश की परंपरा और संस्कृति के बारे में बात करते हैं तो यह साफ दिखता है कि वे अपने प्रदेश के विकास और समृद्धि के बीज सनातन मूल्य में देखते हैं, भारत की अध्यात्म यात्रा में देखते हैं. राजनीतिक तौर पर देखें तो गोवा वह राज्य है, जहां जनसंघ के जमाने से भाजपा की जड़ें गहरी रही हैं।  पंडित दीनदयाल उपाध्याय अक्सर कहा करते थे कि गोवा ने न सिर्फ पुर्तगालियों के खिलाफ लंबा संघर्ष किया, बल्कि गुलामी के खिलाफ भारतीय मूल्य और संस्कार का शानदार आदर्श भी दुनिया के सामने रखा. गौरतलब है कि अंग्रेजों ने भारत पर करीब दो सौ साल शासन किया, लेकिन गोवा के लोगों ने साढ़े चार सौ साल तक पुर्तगालियों को सहा।

इतिहास बताता है कि तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद गोवा भारत का वह हिस्सा है, जहां मंदिरों का पुनर्निर्माण हुआ. 16वीं शताब्दी में जो मंदिर पुर्तगालियों ने नष्ट किया था, उस सप्त कोटेश्वर मंदिर को छत्रपति शिवाजी ने बनवाया। अब जब सावंत सरकार ने छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा बनवाए गए इस मंदिर के पुनरुद्धार का बीड़ा उठाया है तो यह निस्संदेह एक बड़ी सांस्कृतिक पहल है। श्रेय देना होगा वहां के मुख्यमंत्री डॉ. सावंत को कि वे यह सब शोर-शराबे के बजाय धीर और प्रशांत चित्त के साथ कर रहे हैं। उनका संकल्प और उनकी प्रतिबद्धता गोवा के सांस्कृतिक इतिहास का ऐसा आख्यान साबित होने जा रहा है, जिसका मूल्यांकन महज राजनीतिक आधार पर नहीं किया जा सकता। गोवा की निर्माण और वास्तु परंपरा में हिंदू प्रभाव साफ दिखाई देता है। मंगेशी मंदिर, शांता दुर्ग मंदिर, महादेव मंदिर, चंद्रेश्वर भूतनाथ मंदिर, ब्रह्मा मंदिर, महालसा नारायणी मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, सप्तकोटेश्वर मंदिर और कामाक्षी मंदिर हिंदू आस्था से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। 1000-1200 साल पहले तक तो स्थिति यह थी कि गोवा की सांस्कृतिक पहचान कोंकण की काशी के रूप में थी।

टॅग्स :गोवाPortugal
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