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भरत झुनझुनवाला का ब्लॉग: तेल के ऊंचे दाम लाभ भी, संकट भी

By भरत झुनझुनवाला | Updated: October 1, 2021 19:49 IST

तेल के ऊंचे दाम का एक विशेष प्रभाव यह है कि महंगाई में वृद्धि होती है. पेट्रोल के साथ डीजल के दाम बढ़ते हैं जिससे माल की ढुलाई महंगी हो जाती है.

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वर्ष 2015 में विश्व बाजार में तेल के दाम उछल रहे थे और 111 अमेरिकी डालर प्रति बैरल के स्तर पर थे. इसके बाद 2020 में कोविड संकट के दौरान इनमें भारी गिरावट आई और दाम केवल 23 डालर प्रति बैरल रह गए. वर्तमान में पुन: इसमें कुछ वृद्धि हुई है और ये मूल्य आज 76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गए हैं. 

इसी अवधि में देश के घरेलू बाजार में पेट्रोल के दाम की चाल बिल्कुल अलग रही है. 2015 में घरेलू बाजार में पेट्रोल के दाम 70 रुपए प्रति लीटर थे. जब 2020 में विश्व बाजार में तेल के दाम घटकर 23 डालर प्रति बैरल हो गए थे, उस समय हमारे बाजार में तेल के दाम घटे नहीं बल्कि 70 रुपए प्रति लीटर के लगभग हीबने रहे.

कारण यह कि जैसे-जैसे विश्व बाजार में तेल के दाम में गिरावट आई, उसी के समानांतर हमारी केंद्र सरकार ने तेल पर वसूल की जाने वाली एक्साइज डय़ूटी एवं राज्य सरकारों ने तेल पर वसूल की जाने वाली सेल टैक्स में वृद्धि की.

तेल के ऊंचे दाम का एक विशेष प्रभाव यह है कि महंगाई में वृद्धि होती है. पेट्रोल के साथ डीजल के दाम बढ़ते हैं जिससे माल की ढुलाई महंगी हो जाती है और बाजार में प्रत्येक माल महंगा हो जाता है. पेट्रोल के दाम में वृद्धि का दूसरा संभावित प्रभाव मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों पर पड़ सकता है.

पेट्रोल के दाम में वृद्धि का एक लाभ यह है कि हमारी आर्थिक संप्रभुता की रक्षा होती है. हम अपनी खपत का 85 प्रतिशत पेट्रोल आयात करते हैं जिससे कि हमारी अर्थव्यवस्था आयातों पर निर्भर हो जाती है. किसी भी वैश्विक संकट के समय हम दबाव में आ सकते हैं. 

जब घरेलू बाजार में पेट्रोल के दाम बढ़ते हैं तो लोग ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों का उपयोग ज्यादा करते हैं जैसे बस से यात्रा ज्यादा करना चाहेंगे जिसमें ईंधन की खपत कम होती है; अथवा बिजली की कार अथवा मेट्रो का उपयोग करेंगे. इसलिए तेल के दाम बढ़ने से देश में पेट्रोल की खपत कम होगी, हमारी आयातों पर निर्भरता कम होगी और हमारी आर्थिक संप्रभुता की रक्षा होगी. 

तेल के ऊंचे दाम का दूसरा लाभप्रद प्रभाव पर्यावरण का है. तेल के जलने से कार्बन डाईऑक्साइड का भारी मात्ना में उत्सर्जन होता है फलस्वरूप धरती का तापमान बढ़ रहा है. प्राकृतिक प्रकोप बढ़ रहे हैं. इसलिए तेल के ऊंचे मूल्य मूल रूप से देश के लिए लाभप्रद हैं. 

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