लाइव न्यूज़ :

स्वच्छ हवा का संकट और दुनिया का वित्तीय मकड़जाल?, सबसे भारी बोझ भारत को उठाना पड़ रहा...

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 8, 2026 05:41 IST

रिपोर्ट के मुताबिक 2023–24 के दौरान दुनिया की सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने जीवाश्म ईंधन को लंबे समय तक बनाए रखने वाली परियोजनाओं में वित्तीय राशि 80 फीसदी बढ़ाकर 9.5 अरब डॉलर कर दी.

Open in App
ठळक मुद्देसबसे भारी बोझ तीसरी दुनिया के देशों, खासकर भारत को उठाना पड़ रहा है.कुल वैश्विक विकास सहायता का महज एक फीसदी ही है.बजट आवंटन की बात आती है तो वही सरकारें और संस्थाएं पीछे हट जाती हैं.

कुमार सिद्धार्थ

स्वच्छ हवा आज दुनिया की सबसे बुनियादी जरूरतों में शामिल है, लेकिन वैश्विक वित्तीय व्यवस्था इसे अब भी प्राथमिकता नहीं मानती.  क्लीन एयर फंड की ताजा वैश्विक रिपोर्ट एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को सामने लाती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और विकास एजेंसियां स्वच्छ हवा के लिए बड़े-बड़े वादे तो जरूर करती हैं, लेकिन उनका धन उन्हीं परियोजनाओं में जा रहा है, जो हवा को और जहरीला बना रहा है. यह स्थिति केवल नीतिगत विफलता नहीं, बल्कि एक ऐसे वैश्विक अन्याय का उदाहरण है, जिसका सबसे भारी बोझ तीसरी दुनिया के देशों, खासकर भारत को उठाना पड़ रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक 2023–24 के दौरान दुनिया की सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने जीवाश्म ईंधन को लंबे समय तक बनाए रखने वाली परियोजनाओं में वित्तीय राशि 80 फीसदी बढ़ाकर 9.5 अरब डॉलर कर दी.  इसके उलट, स्वच्छ हवा और वायु गुणवत्ता सुधार के लिए दी जाने वाली सहायता घटकर 3.7 अरब डॉलर रह गई, जो कुल वैश्विक विकास सहायता का महज एक फीसदी ही है.

यह आंकड़ा बताता है कि विकास वित्त और मानव स्वास्थ्य के बीच की खाई कितनी गहरी होती जा रही है.हर साल होने वाले अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन, चाहे वे जलवायु पर हों या स्वास्थ्य पर, स्वच्छ हवा को मानव अधिकार के रूप में स्वीकार करते हैं. लेकिन जब बजट आवंटन की बात आती है तो वही सरकारें और संस्थाएं पीछे हट जाती हैं.

ऐसा लगता है कि वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाएं प्रदूषण से होने वाली मौतों और बीमारियों की वास्तविक कीमत को समझने के बजाय आर्थिक और कारोबारी हितों को ज्यादा महत्व दे रही हैं. स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब दुनिया की सबसे बड़ी विकास एजेंसी यूएसएड के बंद होने और विश्व बैंक पर जीवाश्म ईंधन ऋण बढ़ाने के दबाव जैसी घटनाएं सामने आती हैं.

इन फैसलों ने स्वच्छ हवा के लिए चल रहे वैश्विक प्रयासों की रीढ़ कमजोर कर दी है. क्लीन एयर फंड की मुख्य कार्यकारी जेन बर्स्टन की चेतावनी इस संदर्भ में बेहद अहम है कि अगर दिशा नहीं बदली गई तो आने वाले वर्षों में करोड़ों और लोग जहरीली हवा के कारण जान गंवाएंगे. आज वायु प्रदूषण दुनिया भर में हर साल लगभग 57 लाख लोगों की जान ले रहा है.

यह संख्या 2040 तक 62 लाख तक पहुंच सकती है. रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि स्वच्छ हवा के लिए उपलब्ध सीमित वित्तीय अनुदान का वितरण बेहद असमान है. 2023 में फिलीपींस, बांग्लादेश और चीन को वायु गुणवत्ता सुधार के लिए 65 फीसदी बाहरी फंडिंग मिली, जबकि उप-सहारा अफ्रीका की फंडिंग 91 फीसदी घटकर केवल 1.18 करोड़ डॉलर रह गई.

यानी जिन इलाकों में स्वास्थ्य ढांचा सबसे कमजोर है, वहीं मदद सबसे कम पहुंच रही है. भारत इस वैश्विक असमानता का सबसे बड़ा उदाहरण है.  दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में भारत के शहर लगातार ऊपर बने हुए हैं. दिल्ली, पटना, लखनऊ, कानपुर, धनबाद, गाजियाबाद- ये नाम अब केवल शहर नहीं, बल्कि वैश्विक प्रदूषण चेतावनी बन चुके हैं.

सर्दियों के महीनों में उत्तर भारत का बड़ा हिस्सा गैस चेंबर में बदल जाता है, जहां बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है. इसके बावजूद भारत को स्वच्छ हवा के लिए अंतरराष्ट्रीय फंडिंग में प्राथमिकता नहीं मिलती. न तो वायु प्रदूषण पर शोध के लिए पर्याप्त सहयोग मिलता है,

न ही स्थानीय समाधान विकसित करने के लिए दीर्घकालिक निवेश. जबकि भारत की स्थिति यह है कि यहां वायु प्रदूषण से हर साल करीब 95 अरब डॉलर की आर्थिक क्षति होती है. यह नुकसान केवल अस्पतालों के बढ़ते खर्च में नहीं दिखता, बल्कि काम के दिनों की हानि, स्कूल न जा पाने वाले बच्चों, घटती उत्पादकता और जीवन की गिरती गुणवत्ता के रूप में सामने आता है.  

टॅग्स :वायु प्रदूषणदिल्लीमुंबईचेन्नईकोलकाता
Open in App

संबंधित खबरें

भारतदिल्ली दंगा साजिश मामला: 5 साल बाद शिफा उर रहमान को मिली जमानत, घर पहुंचते ही बरसे फूल

भारतTurkman Gate voilence: दिल्ली की अदालत ने 5 आरोपियों को 13 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

क्रिकेटविजय हजारे ट्रॉफी क्वार्टरफाइनलः 12 को कर्नाटक बनाम मुंबई, यूपी बनाम सौराष्ट्र और 13 जनवरी को दिल्ली बनाम विदर्भ, पंजाब बनाम मध्य प्रदेश, देखिए सेमीफाइनल और फाइनल मैच कब?

क्राइम अलर्टक्या हुआ बेटी, आखिर क्यों ऐसा बिहेव कर रही हो?, मां ने बार-बार पूछा तो टूट गई बिटिया और नाबालिग निशानेबाज ने कोच अंकुश भारद्वाज की करतूत की खोली पोल?

कारोबारक्या है ‘उदय’?, आधार को सरल भाषा में समझेंगे आम लोग, जानें खासियत

स्वास्थ्य अधिक खबरें

स्वास्थ्यCold Wave Alert: कड़ाके की ठंड में खुद को कैसे रखें हेल्दी? जानिए इन आसान उपायों के बारे में, छू नहीं पाएगी सर्दी

स्वास्थ्यपूर्ण चंद्रग्रहण, ब्लू मून, सुपरमून, दो चमकीले ग्रहों के बेहद करीब आना और चंद्रमा के पीछे बृहस्पति का ओझल होना?, 2026 में कई खगोलीय घटनाएं, देखिए डेटशीट

स्वास्थ्यगर्मी में एक्सरसाइज करना कितना सुरक्षित? जानिए जोखिम, सावधानियां और सही तरीका

स्वास्थ्यइलाज के अभाव में बदतर न होने पाएं मानसिक रोग

स्वास्थ्यचाइनीज मांजे से कटती जीवन की डोर को बचाना जरूरी